उज्जैन में बनेगा नया धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय

  • स्वास्थ्य शिक्षा का बड़ा पुनर्गठन, दो स्वास्थ्य विश्वविद्यालयों में बंटेगा प्रदेश
  • जबलपुर मेडिकल विश्वविद्यालय का क्षेत्राधिकार चार संभागों तक सीमित, छह संभाग उज्जैन विवि के अधीन आएंगे

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र में बुधवार को स्वास्थ्य शिक्षा, पंचायत व्यवस्था, कर प्रशासन, निजी विश्वविद्यालयों और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए। इनमें सबसे बड़ा फैसला प्रदेश में उज्जैन में नए धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय की स्थापना का है। इसके साथ ही जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय का क्षेत्राधिकार घटाकर केवल चार संभागों तक सीमित कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम तेजी से बढ़ रहे मेडिकल शिक्षा ढांचे को व्यवस्थित करने और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए उठाया गया है, जबकि कांग्रेस ने इसे जबलपुर मेडिकल विश्वविद्यालय का विखंडन बताते हुए विरोध किया।
लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने सदन में मध्यप्रदेश धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक तथा मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक प्रस्तुत किए। दोनों विधेयक बहुमत से पारित हो गए। नई व्यवस्था के अनुसार अब जबलपुर आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के अधीन जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभाग के सरकारी एवं निजी मेडिकल कॉलेज रहेंगे। उज्जैन स्थित धन्वंतरी स्वास्थ्य विश्वविद्यालय के अधीन भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, नर्मदापुरम और चंबल संभाग के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेज संचालित होंगे। सरकार का तर्क है कि इससे दोनों विश्वविद्यालयों पर प्रशासनिक दबाव कम होगा और मेडिकल संस्थानों के संचालन में अधिक दक्षता आएगी।
सरकार का दावा—स्वास्थ्य शिक्षा का विस्तार
मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में 33 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं और सरकार आने वाले वर्षों में एमबीबीएस की 10 हजार तथा पीजी की 5 हजार सीटों का लक्ष्य लेकर चल रही है। उन्होंने कहा कि एक विश्वविद्यालय पर लगातार बढ़ते संस्थानों का बोझ प्रभावी संचालन में बाधा बन रहा था। दो विश्वविद्यालय बनने से प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी, संबद्ध कॉलेजों की निगरानी बेहतर होगी, चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता सुधरेगी, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी। संशोधन विधेयक के तहत मेडिकल विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज में 10 वर्ष तक प्रोफेसर रहने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। अब स्वास्थ्य क्षेत्र के अनुभवी विशेषज्ञों को भी कुलपति बनाया जा सकेगा।
कांग्रेस का विरोध
विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने सरकार के निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि सरकार जबलपुर मेडिकल विश्वविद्यालय की सर्जरी कर रही है। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय के विभाजन की कोई व्यावहारिक आवश्यकता नहीं थी और देश के किसी बड़े राज्य में दो मेडिकल विश्वविद्यालय नहीं हैं। इसके जवाब में मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि यह किसी विश्वविद्यालय का विखंडन नहीं बल्कि स्वास्थ्य शिक्षा के विस्तार और बेहतर प्रबंधन की दिशा में उठाया गया कदम है।
निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पर तीखी बहस
सदन में प्रस्तुत मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने दिखाई दिए। कांग्रेस विधायक महेश परमार ने आरोप लगाया कि सरकार निजी विश्वविद्यालय खोलने के लिए आवश्यक 25 एकड़ भूमि और 5 करोड़ रुपये की एफडी जैसी शर्तें समाप्त कर रही है, जिससे शिक्षा माफिया को लाभ मिलेगा और शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होगी। कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल और झूमा सोलंकी ने भी शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। वहीं भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय ने फीस नियंत्रण और प्रभावी निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने जवाब देते हुए कहा कि छात्र हित सर्वोपरि हैं और निजी विश्वविद्यालयों को यूजीसी तथा संबंधित शैक्षणिक परिषदों के सभी नियमों का पालन करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि फीस का निर्धारण फीस विनियामक आयोग करेगा।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता विधेयक भी मंजूर
सदन में मंत्री गौतम टेटवाल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता विधेयक भी प्रस्तुत किया, जिसे विधानसभा ने पारित कर दिया।
पंचायत राज संशोधन विधेयक भी पारित
सदन ने मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) विधेयक-2026 भी पारित कर दिया। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि सरकार उन गांवों को प्राथमिकता देगी जहां अभी तक पंचायत भवन और सामुदायिक भवन नहीं हैं। संशोधन का उद्देश्य पंचायत व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सशक्त बनाना है।
युवाओं पर टिप्पणी को लेकर सदन में हंगामा
सदन में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की कथित टिप्पणी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विजयवर्गीय ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से कहा कि उन्होंने युवाओं के खिलाफ कोई आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की है और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार लगातार गलत आरोप लगा रहे हैं। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने भी मंत्री का समर्थन करते हुए कहा कि ऐसा कोई बयान नहीं दिया गया। बाद में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने भी स्पष्ट किया कि सदन की कार्यवाही के अनुसार मंत्री ने युवाओं के संबंध में कोई आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की।

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