- 20 शहरों में सिर्फ अहमदाबाद में लागू…

नई दिल्ली/बिच्छू डॉट कॉम
शहरों को गर्मी से बचाने के लिए बनाया गया हीट एक्शन प्लान ज्यादातर शहरों में प्याऊ लगाने, एडवाइजरी जारी करने और अस्पतालों में अस्थायी इंतजाम तक सीमित है। 2016 में सरकार ने पहले चरण में दिल्ली, अहमदाबाद, इंदौर, भोपाल, जयपुर और चेन्नई समेत 20 शहरों के लिए यह योजना शुरू की थी। मकसद था कि लू के असर को कम किया जा सके और गर्मी के दौरान सामान्य कामकाज बना रहे। अहमदाबाद को छोडक़र ज्यादातर शहरों में कूल रूफ, ग्रीन कवर बढ़ाने और गर्मी के लिहाज से संवेदनशील इलाकों की पहचान जैसे कदमों पर काम नहीं हुआ। 2024 में हीट स्ट्रोक के 25 हजार मामले और 56 मौतें दर्ज हुई थीं। 2025 में यह आंकड़ा बढक़र 40 हजार केस और 110 मौतों तक पहुंच गया। 2026 में महाराष्ट्र अकेले अब तक 236 केस और 6 मौतें दर्ज कर चुका है। बढ़ती गर्मी और अल नीनो के असर को देखते हुए भारतीय मौसम विभाग लू घोषित करने के मानकों में बदलाव की तैयारी में है। अभी लू घोषित करने के नियम सिर्फ तापमान पर आधारित है, जो केरल जैसे तटीय राज्यों के लिए पूरी तरह सटीक नहीं माने जाते। नए मानकों में उमस और हीट स्ट्रेस को भी शामिल किया जा सकता है। इससे उन इलाकों में भी सटीक चेतावनी दी जा सकेगी, जहां तापमान अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद गर्मी का असर ज्यादा होता है।
कई शहरों में अधूरा सिस्टम: 3 से 7 दिन पहले हीट वेव अलर्ट जारी हो, अस्पतालों में हीट स्ट्रोक वार्ड, अतिरिक्त बेड, ओआरएस और दवाइयां उपलब्ध हों। दिहाड़ी मजदूरों, रिक्शा चालकों व गिग वर्कर्स के लिए कूलिंग सेंटर और शेड बनाएं। निर्माण स्थलों पर पानी, विश्राम, छाया हो जागरूकता अभियान और हीट स्ट्रोक के लक्षणों की जानकारी दें पौधरोपण, कूल रूफ और ग्रीन कवर को बढ़ाना चाहिए। जलाशयों और ग्रीन बेल्ट का संरक्षण हो। निगम, स्वास्थ्य विभाग, आपदा प्रबंधन एजेंसियों में समन्वय। बजट व जवाबदेही तंत्र विकसित करें।
अहमदाबाद ने ऐसे तैयार किया मॉडल
2010 में लू से 1200 मौतें होने के बाद शहर में ‘मिशन मिलियन ट्री’ शुरू किया गया। इसके तहत एक करोड़ पेड़ लगाए गए। 128 ऑक्सीजन पार्क विकसित किए गए। कूल रूफिंग अभियान की शुरुआत की। इसके तहत 15,000+ घरों और 1000+ सरकारी इमारतों को सफेद रंग से पोता। घरों का तापमान 2 से 5 डिग्री तक घट गया। सभी सरकारी स्कूलों और सरकारी भवनों में थर्माकोल इंसुलेशन और चीनी मोजेक टाइल्स का उपयोग अनिवार्य बनाया गया। गर्मी में कलर आधारित वार्निंग देते हैं। रेड जोन में आने वाले लोग दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक घर से बाहर नहीं निकलते। इसके लिए नगर निगम ने अपना फंड और सीएसआर फंड का उपयोग किया। कूल रूफिंग के लिए 7 लाख की लागत तय की। अहमदाबाद नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के अपने 15 हजार करोड़ रुपए के बजट में 6 हजार करोड़ रुपए केवल क्लाइमेट एक्शन प्लान के लिए रखे।
कूल रूफ से 2-5 डिग्री, पौधरोपण से 3 डिग्री तक घट सकता है पारा
एक्सपर्ट्स का कहना है कि ज्यादातर शहर हीट एक्शन प्लान को सिर्फ इमरजेंसी इंतजाम की तरह लागू कर रहे हैं। यानी गर्मी बढ़ने पर एडवाइजरी, अस्पतालों में अस्थायी तैयारी और पानी की व्यवस्था तक सीमित हैं। लंबे समय में तापमान कम करने वाले उपायों पर काम नहीं हो रहा। जनाग्रह की जना अर्बन स्पेस टीम की एसोसिएट मैनेजर सुज्र्यतपा रे के मुताबिक, कूल रूफ से घरों का तापमान 2 से 5 डिग्री तक कम किया जा सकता है। बड़े स्तर पर पौधरोपण से 10-15 साल में शहर का तापमान करीब 3 डिग्री तक घट सकता है, जबकि शहरों के बाहरी हिस्सों में ग्रीन बेल्ट विकसित करने से तापमान करीब 2 डिग्री तक कम हो सकता है।
