मध्यप्रदेश में खसरे का प्रकोप प्रदेश के 25 जिले प्रभावित

  • चार माह में 800 मामले आए सामने, अलर्ट जारी

गौरव चौहान
प्रदेश में जिस वर्ष आम की बौर ज्यादा आए, उस वर्ष खसरे के मामले भी ज्यादा आने की संभावना रहती है। ऐसा नहीं कि बौर का खसरे से कोई संबंध है, बल्कि चक्र ऐसा है कि हर चौथे वर्ष आम में बौर भी ज्यादा आती है और इस बीमारी के मामले भी। 2026 में अधिक मरीज मिलने का अंदेशा था और हुआ भी यही। वर्ष 2025 में एक वर्ष में 1300 मामले प्रदेश में आए थे, इस वर्ष के शुरुआती चार माह में ही 800 रोगी मिल चुके हैं। लैब जांच में इनमें बीमारी की पुष्टि हो चुकी है। इनमें आउट ब्रेक (बीमारी का अचानक फैलाव) और नियमित मामले भी हैं।
टीकाकरण आंकड़ों पर सवाल और पोर्टल बदलाव
उधर, स्वास्थ्य आयुक्त धनराजू एस ने भी एक दिन पहले समीक्षा के दौरान कहा है कि एचएमआईएस की जगह भारत सरकार के यू-विन पोर्टल का आंकड़ा मान्य किया जाए। विशेषज्ञ भी कहते हैं कि टीकाकरण का भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए।
आउट ब्रेक और रोकथाम की स्थिति
बता दें कि क्षेत्र विशेष में किसी साल जब पांच या अधिक केस मिलते हैं तो इसे आउट ब्रेक माना जाता है और तत्काल रोकथाम के उपाय करने होते हैं। स्वास्थ्य विभाग हेल्थ मैनेजमेंट इनफार्मेशन सिस्टम (एचएमआईएस) की रिपोर्ट के अनुसार 96 प्रतिशत बच्चों को खसरे से बचाव के टीका की दोनों डोज लगी हुई है। विशेषज्ञ इन आंकड़ों पर भी प्रश्न उठा रहे हैं।
रतलाम और मुरैना में सर्वाधिक मामले
मार्च 2026 की स्थिति में सबसे अधिक 123 मामले रतलाम में सामने आए हैं, जबकि पिछले वर्ष मात्र 23 मामले सामने आए थे। इसके बाद मुरैना में 103, भिंड में 92, विदिशा में 76 रोगी इस वर्ष मिल चुके हैं।
ये लक्षण दिखें तो सतर्क हो जाएं
– आंखें लाल होने के साथ तेज बुखार और सिरदर्द होता है।
– तीसरे दिन शरीर में दाने भी निकल आते हैं।
– उपचार नहीं किया जाए तो पीड़ितों में 30त्न की मृत्यु का जोखिम रहता है।
– बचाव के लिए टीका की दो खुराक, पहली नौ से 12 माह और दूसरी 16 से 24 माह के बीच लगाई जाती है।
मार्च से हो जाना था सतर्क
टीकाकरण मामलों के जानकार स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं 16 मार्च को विश्व खसरा दिवस मनाया जाता है। दरअसल, मौसम बदलने से संक्रमण बढऩा शुरू हो जाता है। ऐसे में विभाग को सतर्क हो जाना चाहिए। अप्रैल से जून के बीच बीमारी बढऩे की आशंका रहती है। उनका यह भी कहना है जैसे ही आउटब्रेक की जानकारी मिलती है, 24 घंटे में सर्वे और रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंच जानी चाहिए। 48 घंटे के भीतर पांच किलोमीटर की परिधि में क्षेत्र का सर्वे होना चाहिए। यह सब काम प्रभावी तरीके से किए जाएं तो बीमारी नहीं बढ़ेगी।

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