
बिच्छू डॉट कॉम। जीरो ट्रैफिक प्रोटोकॉल नाम की कोई चीज होती ही नहीं है। कोई भी नेता या व्यक्ति ऐसा नहीं है, जिसके लिए ट्रैफिक रोका जाए। वीआइषी मूवमेंट के वक्त कुछ समय के लिए ट्रैफिक जरूर रोका जाता है, लेकिन उसे तुरंत बहाल कर दिया जाता है। केवल जेड प्लस सिक्यूरिटी प्राप्त लोगों को सुरक्षा के लिए बंदोबस्त किए जाते हैं। ये बात शहर के ट्रैफिक प्रभारी डीसीपी राजेश कुमार त्रिपाठी ने युगलपीठ के समक्ष शहर के बदहाल यातायात को लेकर दायर जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान स्वीकार की। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की कोर्ट ने कहा कि, बदहाल यातायात से हम खुद परेशान हैं। घर जाते हैं तो यू-टर्न लेना पड़ता है। डर लगता है कि कहीं दोपहिया वाहन न टकरा जाए। वहां कोई पुलिसवाला नहीं होता। प्रमुख सचिव (गृह) को शहर में यातायात पुलिसकर्मियों के रिक्त 237 पदों पर नियुक्ति के बारे में विचार करना चाहिए। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 7 मई तय की है। रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
