मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक टली, पोषण आहार व्यवस्था बदलने पर फैसला अटका

मोहन यादव

बिच्छू डॉट कॉम। पोषण आहार व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा सोमवार शाम को प्रस्तावित अहम समीक्षा बैठक स्थगित हो गई। इस बैठक में आंगनवाड़ी केंद्रों के जरिए महिलाओं और बच्चियों को वितरित किए जाने वाले पोषण आहार की मौजूदा व्यवस्था पर चर्चा होनी थी। प्रदेश में फिलहाल यह काम स्व-सहायता समूह कर रहे हैं, लेकिन इसे वापस लेकर नेफेड के माध्यम से संचालित करने पर विचार चल रहा है। अहम बात यह है कि नेफेड खुद पोषण आहार तैयार नहीं करता, बल्कि यह काम आउटसोर्स कर ठेकेदारों के जरिए करवाता है। ऐसे में यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो प्रदेश में चार साल पहले की ठेकेदारी आधारित व्यवस्था की वापसी हो सकती है, जिसमें हर साल करीब 1200 करोड़ रुपए का काम निजी हाथों में चला जाएगा। बताया जा रहा है कि इस बदलाव को लेकर मुख्यमंत्री स्तर पर समीक्षा के लिए बैठक बुलाई गई थी, लेकिन अपरिहार्य कारणों से इसे टाल दिया गया। बैठक का मुख्य एजेंडा पोषण आहार वितरण की वर्तमान व्यवस्था और वैकल्पिक मॉडल पर निर्णय लेना था। इधर, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी पहले ही स्व-सहायता समूहों से यह कार्य वापस लेने के संबंध में पत्र लिख चुकी हैं।

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