प्रदेश में नौ टाइगर रिजर्व, लेकिन पर्याप्त हाथी नहीं, बाघ तेंदुए की सुरक्षा में हो रही परेशानी

टाइगर रिजर्व

हर साल की तरह इस बार भी जून में शुरू होने वाली मानसून गश्ती में हाथियों की कमी बनी रहेगी। यह गश्त बाघ तेंदुए जैसे वन्यप्राणियों की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के लिए होती है। खासकर घने व दुर्गम वन क्षेत्रों में पहुंचने के लिए हाथी ही एक मात्र विकल्प होते, लेकिन ज्यादातर टाइगर रिजर्वों के पास एक भी हाथी नहीं है। इनमें डॉ. विष्णु वाकणकर टाइगर रिजर्व प्रमुख है। यहां 80 से 100 बाघ है लेकिन इनकी सुरक्षा व जरुरत पडऩे पर इन्हें रेस्क्यू करने के लिए एक भी हाथी नहीं है। जब भी जरुरत पड़ती है तब सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से हाथी बुलाने पड़ते हैं, जिसमें दो से तीन दिन का समय लगता है और इस तरह रेस्क्यू अभियान प्रभावित होता है। यही हाल 9 में से 4 टाइगर रिजर्वों का है, जिनके पास मानसून गश्ती के लिए हाथी ही नहीं है।

Related Articles