
समिति प्रणाली वास्तव में लोकतांत्रिक शासन का वह आधारभूत स्तंभ है, जो नीति निर्माण को केवल सैद्धांतिक प्रक्रिया न रहने देकर उसे व्यवहारिक और उत्तरदायी बनाता है। समिति प्रणाली केवल एक संवैधानिक प्रावधान नहीं, बल्कि हमारे लोकतंत्र की जीवंत आत्मा है। हम सभी पर यह नैतिक और संवैधानिक दायित्व है कि हम इस प्रणाली को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखें, बल्कि इसे एक सशक्त, सक्रिय और परिणामोन्मुख माध्यम के रूप में विकसित करें। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने समिति प्रणाली की समीक्षा के लिए गठित समिति की राजस्थान विधानसभा जयपुर में हुई दूसरी बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह विचार व्यक्त किए। इस बैठक में मप्र-राजस्थान सहित उत्तर प्रदेश, हिमाचल, उड़ीसा, सिक्किम के विस अध्यक्ष शामिल हुए। तोमर ने कहा कि जब समितियां सशक्त होंगी, तो विधायिका सशक्त होगी और जब विधायिका सशक्त होगी, तब लोकतंत्र और अधिक दृढ़, विश्वसनीय और जन-केंद्रित बनेगा। मप्र विधानसभा समिति प्रणाली के सुदृढ़ीकरण तथा जनकल्याण में इसकी भूमिका को प्रभावी बनाने की दिशा में निरंतर अग्रसर है। समिति प्रणाली हमें यह सिखाती है कि संवाद, सहमति और सहयोग के माध्यम से ही हम बेहतर निर्णय ले सकते हैं।
