- 44.83 किमी मार्ग होगा फोरलेन

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्यप्रदेश में मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों के विस्तार के साथ सडक़ नेटवर्क को भी नए सिरे से विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। भोपाल और उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों को आधुनिक और निर्बाध सडक़ कनेक्टिविटी से जोडऩे के लिए बड़े पैमाने पर सडक़ परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। राज्य सरकार के रोड नेटवर्क मास्टर प्लान में वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक 1,226 मार्गों के विकास और उन्नयन का लक्ष्य रखा गया है। इन 29,682 किलोमीटर सडक़ों पर करीब 88,634 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इस व्यापक योजना में भोपाल-विदिशा मार्ग को फोरलेन में बदलने की परियोजना महत्वपूर्ण है। 44.83 किलोमीटर लंबे मौजूदा दो लेन मार्ग को पेव्ड शोल्डर सहित चार लेन में विकसित करने के लिए 1,757 करोड़ 55 लाख रुपए की परियोजना तैयार की गई है। हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर प्रस्तावित इस परियोजना को मंत्रिपरिषद की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है।
भोपाल-विदिशा मार्ग पर वर्तमान यातायात करीब 10,975 पैसेंजर कार यूनिट प्रतिदिन है। यह चार लेन सडक़ के लिए निर्धारित 10 हजार पैसेंजर कार यूनिट के मानक से अधिक है। बढ़ते यातायात और भोपाल, रायसेन तथा विदिशा के बीच बढ़ती आर्थिक गतिविधियों को देखते हुए सडक़ को फोरलेन करने की जरूरत महसूस की जा रही है। प्रस्तावित मार्ग भोपाल के अयोध्या बायपास स्थित भानपुर टी-जंक्शन से शुरू होकर सूखी सेवनिया, दीवानगंज और सलामतपुर होते हुए एनएच-146 के सांची-सलामतपुर जंक्शन तक जाएगा। इससे भोपाल से विदिशा के बीच आवागमन तेज और सुरक्षित होने के साथ क्षेत्रीय व्यापार तथा औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। मंत्रिपरिषद से स्वीकृति मिलने के बाद परियोजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना है।
भोपाल-उज्जैन-इंदौर के बीच बनेगा विकास का त्रिकोण
राज्य सरकार भोपाल और उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों को केवल शहरी सीमा के विस्तार के रूप में नहीं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। इन क्षेत्रों से जुड़े शहरों, कस्बों, औद्योगिक क्षेत्रों, धार्मिक स्थलों, पर्यटन केंद्रों और आर्थिक गतिविधियों को बेहतर सडक़ नेटवर्क से जोडऩे की तैयारी है। भोपाल की प्रशासनिक, शैक्षणिक और संस्थागत क्षमता, इंदौर की औद्योगिक एवं व्यावसायिक ताकत तथा उज्जैन की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सडक़ और अन्य परिवहन नेटवर्क से जोडकऱ प्रदेश में विकास का नया त्रिकोण तैयार करने की योजना है। सरकार का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी से इन क्षेत्रों में निवेश, उद्योग, व्यापार, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी।
इंदौर-उज्जैन 6 लेन का 80 फीसदी काम पूरा
इंदौर-उज्जैन कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली 6 लेन परियोजना का करीब 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा इंदौर आउटर रिंग रोड भी विकसित की जा रही है। उज्जैन-नागदा चार लेन मार्ग का निर्माण पूरा हो चुका है। वहीं उज्जैन-झालावाड़ चार लेन मार्ग की स्वीकृति भारत सरकार के स्तर पर विचाराधीन है। उज्जैन-जावरा मार्ग के जरिए उज्जैन को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से जोडऩे की दिशा में भी काम चल रहा है। इस कनेक्टिविटी से उज्जैन का संपर्क देश के प्रमुख औद्योगिक, व्यापारिक और आर्थिक कॉरिडोर से सीधे जुड़ सकेगा।
ढाई साल में 29,693 किमी सडक़ें विकसित
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार, पीएम गतिशक्ति पोर्टल के माध्यम से प्रदेश में सडक़ नेटवर्क की दीर्घकालिक और डेटा आधारित योजना को नई दिशा मिली है। लोक निर्माण विभाग ने पिछले ढाई वर्षों में 29,693 किलोमीटर सडक़ों का निर्माण और उन्नयन पूरा किया है। वहीं हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के तहत मध्यप्रदेश सडक़ विकास निगम 18,166 करोड़ रुपए की लागत से 444 किलोमीटर लंबी सात प्रमुख सडक़ परियोजनाओं पर काम कर रहा है। इसके अलावा 26,890 करोड़ रुपए की लागत वाली 626 किलोमीटर लंबी नौ परियोजनाएं अलग-अलग चरणों में प्रक्रियाधीन हैं।
पांच साल में 88 हजार करोड़ का निवेश
रोड नेटवर्क मास्टर प्लान के तहत अगले पांच वर्षों में 1,226 मार्गों के विकास और उन्नयन पर करीब 88,634 करोड़ रुपए खर्च किए जाने का अनुमान है। 29,682 किलोमीटर सडक़ नेटवर्क को बेहतर बनाने की यह योजना पूरी होने पर प्रदेश के प्रमुख शहरों, औद्योगिक क्षेत्रों और आर्थिक केंद्रों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी। सरकार की रणनीति में केवल नई सडक़ें बनाना ही नहीं, बल्कि मौजूदा मार्गों को यातायात के दबाव के अनुरूप चौड़ा करना, प्रमुख आर्थिक और पर्यटन केंद्रों को जोडऩा तथा मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों के आसपास निर्बाध क्षेत्रीय कनेक्टिविटी तैयार करना भी शामिल है। भोपाल-विदिशा फोरलेन इसी व्यापक रणनीति की अहम कड़ी माना जा रहा है।
