- नीट पेपर लीक के बाद पीएचक्यू ने की तैयारी

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
देश भर में हाल ही में हुए नीट पेपर लीक विवाद और नकल एवं पेपर लीक रोकने के लिए संसद द्वारा लोक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026 पास किए जाने के बाद एमपी में भी हलचल शुरू हो गई है। केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत राज्य का पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) अब परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों और पेपर लीक के मामलों की जांच के लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के गठन की तैयारी में है। एमपी पुलिस के पास पहले से ही एसटीएफ की यूनिट एक्टिव है जो अभी संगठित अपराधों से जुड़े मामलों की जांच करती है।
यह है नए कानून के मुख्य प्रावधान
संसद से पास हुए नए विधेयक में परीक्षा संबंधी धांधलियों को रोकने और उनकी जांच के लिए कड़े नियम तय किए गए हैं। इस कानून के मुताबिक, पेपर लीक या किसी भी परीक्षा में गड़बड़ी की जांच उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) या सहायक कमिश्नर (एसीपी) से नीचे के रैंक का अधिकारी नहीं कर सकेगा। यह विधेयक केंद्र सरकार को यह अधिकार भी देता है कि वह किसी भी मामले की जांच किसी भी केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंप सके या इसके लिए खुद एक विशेष टास्क फोर्स का गठन कर सके। हर केस की जांच के लिए एक निश्चित समय सीमा तय की गई है, जिसके तहत परीक्षा से जुड़े मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। फिलहाल राज्य की एसटीएफ के पास ही टाइपिंग पात्रता परीक्षा घोटाला, शिक्षकों की पात्रता परीक्षा घोटाला, वित्तीय धोखाधड़ी और फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर सरकारी नौकरी पाने से जुड़े मामलों की जांच है। इसके अलावा एक दशक पहले बहुचर्चित व्यापमं भर्ती घोटाले का मामला भी एसटीएफ को सौंपा गया था। एसटीएफ की शुरुआती जांच के बाद व्यापमं में हुए घोटालों की जांच का जिम्मा सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया था।
एसटीएफ ने भी की अपनी तैयारी
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पीएचक्यू के अधीन काम करने वाली एसटीएफ ने भी अपनी तैयारी पूरी कर ली है। अधिकारियों के अनुसार पीएचक्यू अगर ऐसे मामलों की जांच एसटीएफ को सौंपेगा, तो विधेयक के तय नियमों के अनुसार ऐसे केस के लिए स्पेशल टीम बनाकर उसकी जांच कराई जाएगी। एसटीएफ के आला अफसरों के अनुसार राज्य में संगठित अपराधों से जुड़ी जांच करने में उनकी विंग सक्षम है और जरूरत होने पर ऐसे घोटालों के लिए एसटीएफ में नई टीम भी बनाई जा सकेगी। एसटीएफ से मिली जानकारी के अनुसार अगर सरकार अनुमति देगी तो किसी भी चुनिंदा भर्ती या योग्यता परीक्षा के लिए गठित इस टीम को परीक्षा के आयोजन से लेकर उसके मूल्यांकन तक पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी जाएगी।
