- भाजपा के चार फार्म और सीएम के संकेतों ने बढ़ाई कांग्रेस की चिंता
- गौरव चौहान

मप्र की तीन राज्यसभा सीटों के लिए भाजपा और कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। भाजपा प्रत्याशियों राजनीश अग्रवाल और तरुण चुग ने कल नामांकन पत्र जमा कर दिया है। वहीं कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के पक्ष में पूरी कांग्रेस एकजुट नजर आ रही है। राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा के घोषित दोनों प्रत्याशियों ने फार्म में किसी तरह की गलती की संभावना के चलते कुल 7 नामांकन फार्म जमा किए। राजनीश अग्रवाल में चार एवं तरुण चुग ने तीन नामांकन फार्म दाखिल किए। हालांकि भाजपा द्वारा विधानसभा से अधिक फार्म लिए जाने से कांग्रेस की आशंका को बढ़ाया कि भाजपा तीसरी राज्यसभा सीट के लिए भी प्रत्याशी खड़ा कर सकती है। हालांकि मीडिया से चर्चा में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने तीसरी सीट पर प्रत्याशी उतारे जाने को लेकर मीडिया से चर्चा में कहा कि फिलहाल पार्टी का ऐसा कोई विचार नहीं है। लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का एक बयान ने सियासी अटकलें तेज कर दी। शनिवार को इंदौर में औद्योगिक निवेश से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे मुख्यमंत्री से जब पत्रकारों ने तीसरी राज्यसभा सीट को लेकर सवाल किया तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि तीसरी सीट आएगी नहीं तो कहां जाएगी। मुख्यमंत्री के इस जवाब के बाद राजनीतिक गलियारों में नई अटकलें शुरू हो गई हैं।
दरअसल, राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा ने दो उम्मीदवारों तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल को मैदान में उतारा है। लेकिन चार नामांकन फॉर्म लेने और भाजपा विधायकों को सोमवार तक भोपाल में रुकने के निर्देश दिए जाने के बाद तीसरे उम्मीदवार की संभावना को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं। दरअसल 8 जून को नामांकन का अंतिम दिन है। कांग्रेस द्वारा मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने के बाद भाजपा के लिए तीसरी सीट पर रणनीति बनाने की संभावनाएं और बढ़ गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस ने कमलनाथ या दिग्विजय सिंह जैसे बड़े नेताओं को मैदान में उतारा होता तो भाजपा शायद अतिरिक्त जोखिम लेने से बचती। मीनाक्षी नटराजन के नाम की घोषणा के बाद अब भाजपा के भीतर तीसरी सीट पर चुनावी गणित साधने की कवायद तेज हो गई है। पार्टी के रणनीतिकार कांग्रेस के भीतर संभावित असंतोष और क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं का भी आकलन कर रहे हैं।
खंडेलवाल का तीसरे उम्मीवार से इंकार
इन अटकलों के बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने स्पष्ट किया कि तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारने की पार्टी की कोई रणनीति नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास दो सीटों के लिए पर्याप्त विधायक हैं और कांग्रेस के पास भी अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या है। इसलिए कांग्रेस को किसी तरह की चिंता या डर की जरूरत नहीं है। खंडेलवाल ने कहा कि तीसरी सीट को लेकर न कोई निर्णय हुआ है और न ही इस पर कोई विचार किया गया है। पार्टी की ओर से ऐसा कोई निर्देश भी नहीं मिला है।
सीएम के बयान ने अटकलें तेज
हालांकि इसी बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का एक बयान ने फिर सियासी अटकलें तेज कर दी। शनिवार को इंदौर में औद्योगिक निवेश से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे मुख्यमंत्री से जब पत्रकारों ने तीसरी राज्यसभा सीट को लेकर सवाल किया तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि तीसरी सीट आएगी नहीं तो कहां जाएगी। मुख्यमंत्री के इस जवाब के बाद राजनीतिक गलियारों में नई अटकलें शुरू हो गई हैं। हालांकि भाजपा संगठन की ओर से अब तक तीसरे उम्मीदवार को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। फिलहाल भाजपा सार्वजनिक रूप से दो सीटों पर ही फोकस करने की बात कह रही है, लेकिन मुख्यमंत्री के बयान और पार्टी की हालिया गतिविधियों ने तीसरी सीट को लेकर सस्पेंस बनाए रखा है। अब सबकी नजरें नामांकन की अंतिम तिथि और भाजपा के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
आदिवासी चेहरे पर भी विचार
सूत्र बताते हैं कि भाजपा तीसरी सीट के लिए किसी आदिवासी चेहरे को आगे बढ़ाने के विकल्प पर भी गंभीरता से विचार कर रही है। प्रदेश में आदिवासी राजनीति का बढ़ता महत्व और आगामी चुनावों को देखते हुए यह फैसला राजनीतिक रूप से बड़ा संदेश देने वाला हो सकता है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि भाजपा किसी निर्दलीय उम्मीदवार को मैदान में उतारकर पर्दे के पीछे से समर्थन दे सकती है और चुनावी समीकरणों को अपने पक्ष में मोडऩे का प्रयास करेगी। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि भाजपा फिलहाल सभी विकल्पों पर विचार कर रही है और अंतिम फैसला नामांकन की अंतिम तिथि के आसपास लिया जा सकता है। ऐसे में 8 जून तक तीसरी राज्यसभा सीट को लेकर सस्पेंस बने रहने की पूरी संभावना है। फिलहाल इतना तय है कि दो सीटों का चुनाव भले ही औपचारिक नजर आ रहा हो, लेकिन तीसरी सीट को लेकर पर्दे के पीछे राजनीतिक बिसात पूरी तरह बिछ चुकी है।
चुनावी गणित
विधानसभा में वर्तमान में 228 सदस्य मतदान के पात्र हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 57 वोटों की आवश्यकता है। भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 63 विधायक हैं। दो सीटों पर अपने उम्मीदवारों को निर्वाचित कराने के बाद भाजपा के पास लगभग 50 वोट बचेंगे। ऐसे में तीसरी सीट जीतने के लिए उसे अतिरिक्त सात वोटों की जरूरत होगी। यही वजह है कि कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग की आशंका और भाजपा की संभावित रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
8 जून तक बना रह सकता है सस्पेंस
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि भाजपा फिलहाल सभी विकल्पों पर विचार कर रही है और अंतिम फैसला नामांकन की अंतिम तिथि के आसपास लिया जा सकता है। ऐसे में 8 जून तक तीसरी राज्यसभा सीट को लेकर सस्पेंस बने रहने की पूरी संभावना है। फिलहाल इतना तय है कि दो सीटों का चुनाव भले ही औपचारिक नजर आ रहा हो, लेकिन तीसरी सीट को लेकर पर्दे के पीछे राजनीतिक बिसात पूरी तरह बिछ चुकी है।
