प्रदेश के मंत्रियों को पद जाने का सता रहा डर

  • कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल और राकेश सिंह को मिल सकता है दायित्व

गौरव चौहान
मध्य प्रदेश सरकार के कुछ मंत्री इन दिनों परेशान बताए जा रहे हैं, उन्हें इस बात का डर है कि पार्टी उन्हें संगठन की राष्ट्रीय टीम में शामिल कर उनसे मंत्री पद छोड़ने को कह सकती है। इसी तरह पार्टी के कुछ वरिष्ठ सांसद भी राष्ट्रीय टीम में शामिल होने की बजाय मोदी कैबिनेट में स्थान पाना चाहते हैं, जिससे वे भी संगठन के दायित्व से दूर भाग रहे हैं। गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी के नए अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम कभी भी आकार ले सकती है। जिसमें मध्यप्रदेश से भी कई नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। लेकिन मध्यप्रदेश सरकार में शामिल कुछ मंत्री फिलहाल ऐसी किसी भी तरह के दायित्व से बच रहे हैं, क्योंकि यदि वे राष्ट्रीय टीम में शामिल होते हैं, तो उन्हें राज्य सरकार का मंत्री पद छोड़ना पड़ेगा। इन मंत्रियों ने अपनी इस मंशा से पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को भी अवगत करा दिया है। पार्टी से जुड़े सूत्रों की मानें तो मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, राकेश सिंह और प्रहलाद पटेल के अलावा कुंवर विजय शाह का नाम भी राष्ट्रीय टीम की संभावित सूची में बताया जा रहा है। आदिम जाति कल्याण मंत्री शाह को लेकर कहा जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद यदि शाह का मंत्री पद नहीं बच पाता है, तो पार्टी उन्हें राष्ट्रीय संगठन में लेकर कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है, जिससे मध्यप्रदेश में पार्टी का आदिवासी वोट बैंक सधा रह सके। इसी तरह पार्टी तीनों वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल और राकेश सिंह को भी राष्ट्रीय राजनीति में वापस ले जाना चाहती है और उनका उपयोग अगले साल यूपी सहित दूसरे राज्यों के प्रस्तावित विधानसभा चुनाव के लिए कर सकती है। लेकिन ये सभी मंत्री फिलहाल मध्यप्रदेश सरकार में ही अपनी जिम्मेदारी उठाना चाहते हैं। बताया गया है कि पिछले दिनों इन सभी मंत्रियों ने अपनी बातें भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष रख दी है।
डॉ. नरोत्तम के नाम की भी चर्चा
इधर दतिया उपचुनाव के चर्चाओं के बीच वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का भी नाम राष्ट्रीय टीम की सूची में देखने को मिल सकता है। पार्टी उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जैसे पद पर बैठा सकती है। कहा यह भी जा रहा है कि मध्यप्रदेश की अगले महीने खाली हो रही तीन राज्यसभा सीट के लिए भी पार्टी डॉ. मिश्रा को मैदान में उतारकर पूरी तरह से केंद्रीय राजनीति में सक्रिय कर सकती है। उनके अलावा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा का भी नाम सामने आ रहा है। हालांकि शमां के बारे में कहा जा रहा है कि वे संगठन की टीम से ज्यादा केन्द्र सरकार में शामिल होना चाहते है, लेकिन संगठन का उनके अनुभव के आधार पर यदि पार्टी उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी देगी, तो वे उसे इंकार नहीं करेंगे। पांच बार के सांसद गणेश सिंह का भी नाम राष्ट्रीय टीम की संभावित सूची में ही सकता है। लेकिन सिंह भी संगठन से ज्यादा केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में जगह को प्राथमिकता दे सकते हैं। इसी तरह मध्यप्रदेश से किसी महिला नेत्री को राष्ट्रीय महासचिव पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
संसदीय बोर्ड और सीईसी पर नजर
कहा जा रहा है कि यदि केन्द्रीय संगठन इन मंत्रियों को समझाइश देकर टीम नितिन नवीन में काम करने के लिए मना लेता है, तो फिर इन नेताओं की नजर राष्ट्रीय महासचिव या फिर संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति पर रहेगी। भाजपा में ये दोनों इकाईयां शीर्ष मानी जाती है, जो पार्टी के अहम फैसले लेती है। चर्चा है कि पार्टी नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल को इन दोनों समितियों में स्थान दे सकती है, जिससे इन नेताओं का कद और मजबूत होगा और उससे उनका मध्यप्रदेश की राजनीति में भी प्रभाव बना रहेगा, साथ ही राज्य का राजनीतिक प्रभाव भी राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होगा।
तिवारी सहित दूसरे भी दावेदार
राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन जब भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री थे, तब उनके साथ मध्य प्रदेश से आने वाले गौरव तिवारी, राहुल कोठारी और भक्ति शर्मा ने राष्ट्रीय स्तर पर काम किया है। ऐसे में माना जा रहा है कि नवीन की टीम में गौरव तिवारी और भक्ति शर्मा को जगह मिल सकती है। कोठारी पहले से ही प्रदेश के महामंत्री है, ऐसे में उनका राष्ट्रीय टीम में शामिल होना मुश्किल लग रहा है।
प्रदेश को मिलेगा नया प्रभारी
मध्यप्रदेश भाजपा को जल्द ही अपना नया प्रभारी और सहप्रभारी मिल सकता है। कहा जा रहा है कि मौजूदा प्रभारी डॉ. महेन्द्र यादव अब अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर अपना पूरा फोकस करेंगे, जिससे उनके स्थान पर पार्टी मध्यप्रदेश में नया प्रभारी बना सकती है। इसी तरह सह प्रभारी सतीश उपाध्याय भी दिल्ली से विधायक है, जिससे उनका भी पूरा समय अपने क्षेत्र व पार्टी द्वारा सौंपी गई दूसरी जिम्मेदारियों पर रहेगा, जिससे मप्र के लिए किसी दूसरे नेता को सहप्रभारी के तौर पर भेजा जा सकता है।

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