- प्रतिवर्ष सौ से अधिक सैंपल खतरनाक मिले

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
स्वास्थ्य और स्वाद के लिए दूध और इससे बने उत्पादों का सेवन अच्छा माना जाता है, लेकिन अब चिंता इस बात की है कि यह कितना सुरक्षित हैं। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में दूध और इससे बने उत्पादों के प्रति वर्ष 100 से अधिक सैंपल असुरक्षित यानी खतरनाक मिल रहे हैं। असुरक्षित का सीधा मतलब यह है कि ये हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। एक और बड़ी चिंता की बात यह है कि अधिकतर सैंपल खुदरा दुकानों से लिए जाते हैं, जहां से आम उपभोक्ता खरीदता है। ऐसे में सैंपल फेल होने तक तो उत्पाद खप चुका होता है। अधिकतर डेयरी उत्पादों के उपभोग की समय सीमा एक सप्ताह से भी कम रहती है। हाल ही में प्रदेश में घी के आठ ब्रांडों के सैंपल असुरक्षित पाए जाने और एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध के बाद खाद्य संरक्षा का मामला चर्चा में है। प्रदेश में अमानक सैंपलों की संख्या प्रतिवर्ष डेढ़ हजार से ऊपर है। इसके अतिरिक्त मिथ्याछाप यानी मिसब्रांडेड सैंपलों की संख्या जो पहले वर्ष 2021-22 में 1476 और 2022-23 में 990 थी वह अब घटकर 500 से नीचे आ गई, पर ये आंकड़े भी खुश होने के लिए नहीं हैं।
प्रदेश के एक खाद्य सुरक्षा अधिकारी का कहना है कि मिस ब्रांडेड पहले लैब से निर्धारित होता था, जिससे संख्या अधिक रहती थी। वर्ष 2022 के बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को ही मिश्रण कलाप के सैंपल चिह्नित करने और एडीएम कोर्ट में केस लगाने का अधिकार दे दिया गया। कई अधिकारी यही नहीं समझ पाते कि किन मानकों पर सैंपल इस श्रेणी में रखा जाए, जिससे मिथ्याछाप सैंपलों को संख्या 50त्न रह गई।
