- 6 हजार व्यवसायिक शिक्षकों को राहत
- गौरव चौहान

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में आउटसोर्स के माध्यम से काम कर रहे करीब 6 हजार व्यावसायिक शिक्षकों को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। स्कूल शिक्षा विभाग ने नई व्यवस्था में यह प्रावधान किया है कि जिन कंपनियों को व्यावसायिक शिक्षा का काम दिया जाएगा, वे पहले से स्कूलों में काम कर रहे प्रशिक्षकों को अकारण सेवा से नहीं हटा सकेंगी। यानी कंपनियां बदलने के बावजूद व्यावसायिक प्रशिक्षकों का काम यथावत जारी रहेगा। समग्र शिक्षा के तहत अलग-अलग ट्रेड में काम कर रही 13 कंपनियों का एग्रीमेंट खत्म कर नई कंपनियों को जिम्मेदारी दी गई है। विभाग ने नई कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि पहले से कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों को सेवा में बनाए रखना होगा। इससे कंपनी बदलने के कारण प्रशिक्षकों की नौकरी जाने की आशंका फिलहाल टल गई है।
प्रदेश के स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा के लिए अलग-अलग ट्रेड में आउटसोर्स कंपनियां प्रशिक्षकों की सेवाएं उपलब्ध कराती हैं। विभाग के अनुसार जिन 13 कंपनियों का करार खत्म किया गया है, उनमें कृषि, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं हार्डवेयर, अपैरल, हेल्थकेयर, आईटी-आईटीईएस तथा ब्यूटी एंड वेलनेस ट्रेड से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं। कृषि ट्रेड में आकाश एग्री सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड और वालेअर फैबटेक्स प्राइवेट लिमिटेड, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड हार्डवेयर में एसेंसिव एडुकेयर लिमिटेड, टाइम्स सेंटर फॉर लर्निंग लिमिटेड और अल्टीमेट एनर्जी का करार खत्म किया गया है। वहीं अपैरल में ब्राइट फ्यूचर डॉट कॉम, हेल्थकेयर में डीसीआई स्किल्स तथा आईटी-आईटीईएस में एवरग्रीन एजुकेशन ट्रस्ट, जीके एजुकेशनल ट्रस्ट, आईसीए एजुस्किल्स, इंडस एजुट्रेन और एलएनजे इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल्स एंड टेक्नालॉजी का करार समाप्त किया गया है। ब्यूटी एंड वेलनेस ट्रेड में वीएलसीसी हेल्थकेयर का एग्रीमेंट भी खत्म किया गया है। हालांकि इंडस एजुट्रेन प्राइवेट लिमिटेड के आईटी एवं आईटीईएस ट्रेड से जुड़े करार के अलावा अन्य एग्रीमेंट खत्म नहीं किए गए हैं।
शिकायतों के बाद बदली व्यवस्था
व्यावसायिक शिक्षा से जुड़े आउटसोर्स प्रशिक्षकों की ओर से कंपनियों पर लगातार परेशान करने के आरोप लगते रहे हैं। प्रशिक्षकों का आरोप रहा है कि नियुक्ति और जॉइनिंग के लिए पैसे मांगने जैसी शिकायतें भी सामने आती रही हैं। इन्हीं मुद्दों को लेकर करीब दो महीने पहले व्यावसायिक शिक्षकों ने भोपाल में दो दिवसीय आंदोलन किया था। पहले दिन अंबेडकर पार्क में धरना दिया गया, जबकि दूसरे दिन डीपीआई का घेराव किया गया। इसके बाद विभाग की ओर से नई व्यवस्था तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई। अब कंपनी बदलने की स्थिति में पुराने प्रशिक्षकों को सेवा में बनाए रखने का निर्देश दिया गया है।
बकाया वेतन पर अभी असमंजस
नई व्यवस्था से नौकरी की सुरक्षा को लेकर राहत जरूर मिली है, लेकिन पुराने बकाया वेतन का मुद्दा अभी भी बना हुआ है। नवीन व्यावसायिक शिक्षक महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश परमार का कहना है कि कई व्यावसायिक प्रशिक्षकों को चार से पांच महीने तक का वेतन नहीं मिला है। उनका सवाल है कि जिन वीटीपी का अनुबंध खत्म किया गया है, उनके यहां काम कर रहे प्रशिक्षकों के पुराने वेतन का भुगतान कौन करेगा। उनका कहना है कि नई कंपनियों को बड़ी संख्या में स्कूलों की जिम्मेदारी मिलने के बाद यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि पुराने बकाये का भुगतान किस व्यवस्था से होगा। परमार के अनुसार, कुछ वीटीपी को पहले ही 300 से 350 स्कूलों की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में प्रशिक्षकों को समय पर वेतन मिल पाएगा या नहीं, इसे लेकर आशंका बनी हुई है।
नौकरी बची, भुगतान की गारंटी का इंतजार
विभाग के फैसले से करीब 6 हजार व्यावसायिक प्रशिक्षकों के लिए कंपनी बदलने के कारण नौकरी जाने का खतरा कम हुआ है। हालांकि उनके सामने अब अगली बड़ी चुनौती लंबित वेतन के भुगतान और नई कंपनियों से समय पर वेतन मिलने की व्यवस्था की है। ऐसे में विभाग के आदेश के बाद अब प्रशिक्षकों की नजर इस बात पर है कि नई कंपनियां सेवा शर्तों और भुगतान व्यवस्था को किस तरह लागू करती हैं।
