प्रदेश के 44 जिलों में एक भी एंपैनल निजी अस्पताल नहीं

एंपैनल निजी अस्पताल नहीं
  • पुलिसकर्मियों के लिए संचालित कैशलेस स्वास्थ्य योजना का दायरा लगातार सिमट रहा

    भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश के एक लाख से अधिक पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के लिए संचालित कैशलेस स्वास्थ्य योजना का दायरा लगातार सिमट रहा है। कभी इस योजना में 125 से अधिक निजी अस्पताल जुड़े थे, लेकिन अब इनकी संख्या घटकर करीब 75 रह गई है। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि प्रदेश के 55 में से 44 जिलों में एक भी एंपैनल निजी अस्पताल नहीं है। ऐसे में इन जिलों में पदस्थ पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों को गंभीर बीमारी की स्थिति में इलाज के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ रहा है। कैशलेस सुविधा उपलब्ध नहीं होने पर कई मामलों में कर्मचारियों को निजी अस्पताल में पहले अपनी जेब से भुगतान करना पड़ता है। बाद में विभाग से रीइम्बर्समेंट की प्रक्रिया होती है। लेकिन विभाग द्वारा निर्धारित दर और अस्पताल के वास्तविक बिल में अंतर होने पर अतिरिक्त राशि कर्मचारी को खुद वहन करनी पड़ती है। गंभीर सर्जरी और हृदय रोग जैसे मामलों में यह अंतर हजारों से लेकर लाखों रुपये तक पहुंच सकता है।
    पुलिस विभाग की स्वास्थ्य योजना के तहत निजी अस्पतालों का चयन निर्धारित मानकों और एनएबीएच मान्यता के आधार पर किया जाता है। कई अस्पतालों की मान्यता समाप्त होने और नई एंपैनलमेंट प्रक्रिया में देरी के कारण योजना से जुड़े अस्पतालों की संख्या लगातार कम हुई है। इसका सबसे ज्यादा असर दूरस्थ जिलों में पदस्थ पुलिसकर्मियों पर पड़ रहा है। इन जिलों में पहले से ही विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं सीमित हैं। ऐसे में कैशलेस नेटवर्क नहीं होने से गंभीर बीमारी के दौरान उपचार की व्यवस्था करना उनके लिए अतिरिक्त चुनौती बन जाता है।
    भोपाल और कुछ बड़े शहरों तक सीमित सुविधा
    वर्तमान में योजना में सबसे ज्यादा अनुबंधित अस्पताल भोपाल में हैं। इसके बाद जबलपुर, नागपुर और इंदौर में अपेक्षाकृत अधिक विकल्प उपलब्ध हैं। ग्वालियर, सागर, कटनी, शहडोल और छिंदवाड़ा जैसे शहरों में सीमित संख्या में अस्पताल योजना से जुड़े हैं। प्रदेश के अधिकांश जिलों में कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध नहीं है। पुलिस विभाग लंबे समय से दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे महानगरों के सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों को योजना में शामिल करने की मांग कर रहा है। फिलहाल प्रदेश के बाहर केवल नागपुर के अस्पताल योजना में शामिल हैं। गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए पुलिसकर्मियों को अक्सर बड़े महानगरों का रुख करना पड़ता है। वहां कैशलेस सुविधा नहीं होने की स्थिति में इलाज का खर्च पहले खुद उठाना पड़ता है और बाद में प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया से गुजरना होता है।
    25 नए अस्पताल जोडऩे की तैयारी
    पुलिस मुख्यालय स्तर पर योजना का दायरा बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। अधिकारियों के अनुसार करीब 25 नए अस्पतालों को एंपैनल करने के लिए बातचीत चल रही है। अस्पतालों का चयन एनएबीएच मान्यता और स्वास्थ्य विभाग की अनुशंसा के आधार पर किया जाएगा। यदि नए अस्पतालों को समय पर योजना में शामिल किया जाता है तो मौजूदा नेटवर्क का विस्तार हो सकता है। फिलहाल सबसे बड़ी जरूरत उन 44 जिलों में कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने की है, जहां पुलिसकर्मियों के लिए स्थानीय स्तर पर कोई एंपैनल निजी अस्पताल नहीं है।

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