ई-विकास 2.0 आज से लागू, प्रति हेक्टेयर के हिसाब से तय होगी पात्रता

  • जरूरत पर 25 प्रतिशत ज्यादा खाद भी मिलेगी

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
प्रदेश में खाद की पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद किसानों को वितरण व्यवस्था में आ रही दिक्कतों से राहत देने के लिए कृषि विभाग ने ई-विकास प्रणाली 2.0 तैयार की है। नई व्यवस्था गुरुवार से लागू हो गई है। इसमें किसानों को खाद खरीदने के लिए पहले की तुलना में अधिक विकल्प मिलेंगे। किसान अपनी पात्रता के अनुसार एक बार में मनचाही मात्रा में खाद ले सकेंगे और अपनी पसंद के रिटेलर से उर्वरक खरीदने की सुविधा भी मिलेगी। नई व्यवस्था में मोबाइल से ही टोकन बनाने की सुविधा होगी। अतिरिक्त खाद की जरूरत होने पर किसान को अब 50 शब्दों में कारण लिखने की बाध्यता नहीं होगी। पहली बार में पात्रता से 25 प्रतिशत तक अतिरिक्त खाद लेने की सुविधा भी दी जाएगी। सरकार का दावा है कि नई प्रणाली से खाद वितरण में पारदर्शिता आएगी और किसानों को बार-बार केंद्रों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी।
प्रदेश में खाद वितरण को व्यवस्थित करने के लिए ई-विकास प्रणाली में ई-टोकन व्यवस्था शुरू की गई थी, लेकिन इसके कारण किसानों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। खाद लेने के लिए टोकन, मात्रा और बिक्री केंद्र से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रहीं। इन समस्याओं को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कृषि उत्पादन आयुक्त केसी गुप्ता की अध्यक्षता में समिति गठित की थी। समिति की अनुशंसाओं के आधार पर कृषि विभाग ने ई-विकास 2.0 तैयार किया है। नई व्यवस्था में किसान को अतिरिक्त खाद की आवश्यकता होने पर 50 शब्दों में कारण लिखने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। पहली बार में किसान अपनी पात्रता से 25 प्रतिशत अतिरिक्त खाद खरीद सकेगा। इससे उन किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें फसल की स्थिति, मिट्टी या खेती के क्षेत्र के हिसाब से सामान्य पात्रता से अधिक उर्वरक की जरूरत पड़ती है।
प्रति हेक्टेयर के आधार पर होगी गणना
पुरानी व्यवस्था में अलग-अलग उर्वरकों की मात्रा की गणना को लेकर भ्रम की स्थिति बनती थी। ई-विकास 2.0 में इसे सरल करते हुए प्रति हेक्टेयर के आधार पर खाद की गणना की जाएगी। किसान को अलग-अलग उर्वरकों की जटिल गणना के बजाय यह जानकारी मिलेगी कि उसकी फसल और क्षेत्रफल के हिसाब से प्रति हेक्टेयर कुल कितनी खाद की जरूरत और पात्रता है।
पसंद के उर्वरक समूह का चयन
पोर्टल पर फसलवार भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की अनुशंसा के अनुसार विभिन्न उर्वरक समूहों की जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। किसान अपनी जरूरत के अनुसार पसंदीदा उर्वरक समूह का चयन कर सकेगा। इसके साथ ही मार्कफेड के डबल लॉक केंद्रों में अधिकतम मात्रा में उर्वरक का भंडारण करने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि मांग के समय किसानों को उपलब्धता की समस्या का सामना न करना पड़े।
24 घंटे बाद टोकन कैंसिल करने की सुविधा
नई व्यवस्था में टोकन बनाने के बाद उसे 24 घंटे के बाद निरस्त करने की सुविधा भी दी गई है। यदि किसी किसान की फसल खराब हो जाती है या किसी अन्य कारण से खाद की तत्काल जरूरत नहीं रहती तो वह टोकन निरस्त कर दोबारा खाद की मांग कर सकेगा। ऐसे मामलों में संबंधित तहसीलदार या एसडीओ राजस्व को 48 घंटे के भीतर निर्णय लेना होगा।

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