एथेनॉल चावल मामले की जांच में राइस मिलर और कंपनी की भूमिका उजागर

एथेनॉल चावल मामले

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने स्पष्ट किया है कि बालाघाट जिले में एथेनॉल उत्पादन के लिए भारतीय खाद्य निगम एफसीआई द्वारा प्रदाय किए गए चावल की कथित हेराफेरी के मामले में मध्यप्रदेश खाद्य विभाग एवं मध्यप्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम की न तो कोई भूमिका है और न ही उनका इस प्रकरण से कोई संबंध है।
खाद्य मंत्री ने कहा कि एथेनॉल उत्पादन योजना भारत सरकार की योजना है। इसके अंतर्गत भारतीय खाद्य निगम द्वारा निर्धारित दरों पर एथेनॉल निर्माता कंपनियों को चावल उपलब्ध कराया जाता है। इसके पश्चात एथेनॉल निर्माता तेल विपणन कंपनियों को एथेनॉल की आपूर्ति करते हैं। इस संपूर्ण व्यवस्था में चावल का आवंटन, मूल्य निर्धारण, परिवहन एवं संचालन संबंधी सभी प्रक्रियाएं केंन्द्रीय एजेंसियों द्वारा संचालित की जाती हैं। राज्य सरकार अथवा उसकी किसी संस्था की इसमें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका नहीं होती। उन्होंने बताया कि बालाघाट जिले में प्राप्त शिकायत के बाद कलेक्टर द्वारा कराई गई जांच में एफसीआई द्वारा एवीजे एग्रिको प्राइवेट लिमिटेड, बोरगांव (छिंदवाड़ा) को एथेनॉल उत्पादन के लिए प्रदाय किया गया 242.55 क्विंटल चावल ट्रक में संचेती राइस मिल, वारासिवनी (बालाघाट) के परिसर में पाया गया।
केंद्रीय मंत्री से अविलंब कार्रवाई का अनुरोध
मंत्री राजपूत ने कहा कि प्रारंभिक जांच में एथेनॉल उत्पादन के लिए एफसीआई द्वारा उपलब्ध कराए गए टीटी चावल की कथित हेराफेरी में संबंधित एथेनॉल निर्माता कंपनी एवं राइस मिलर की भूमिका सामने आई है। उन्होंने कहा कि एथेनॉल उत्पादन के लिए प्रदाय किए जाने वाले चावल में होने वाली किसी प्रकार की गड़बड़ी रोकने तथा व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रहलाद जोशी को पत्र लिखकर अविलंब कार्रवाई का अनुरोध किया गया है।

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