- दतिया उपचुनाव…भाजपा-कांग्रेस दोनों की प्रतिष्ठा दांव पर
- गौरव चौहान

मध्यप्रदेश का दतिया विधानसभा उपचुनाव अब केवल एक सीट का चुनाव नहीं रह गया है। यह भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका है। खासतौर पर भाजपा में यह मुकाबला पार्टी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी से अधिक पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक साख से जुड़ गया है। टिकट नहीं मिलने के बाद समर्थकों की नाराजगी और विरोध के बीच अब पार्टी नेतृत्व ने डॉ. मिश्रा पर दतिया में जीत सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी भी डाल दी है।
दिल्ली में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात के बाद डॉ. मिश्रा ने साफ कर दिया कि वे संगठन के निर्णय के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं और भाजपा प्रत्याशी को भारी मतों से जिताने के लिए पूरी ताकत लगाएंगे। ऐसे में उपचुनाव का परिणाम केवल आशुतोष तिवारी की जीत-हार नहीं, बल्कि डॉ. मिश्रा के संगठन पर प्रभाव और राजनीतिक स्वीकार्यता का भी पैमाना माना जा रहा है।
टिकट विवाद के बाद दिल्ली तक पहुंचा मामला
भाजपा द्वारा आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद दतिया में डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने खुलकर नाराजगी जताई। विरोध की खबरें सीधे दिल्ली तक पहुंचीं, जिसके बाद पार्टी नेतृत्व ने डॉ. मिश्रा को पहले भोपाल और फिर दिल्ली बुलाकर चर्चा की। शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद रविवार को डॉ. मिश्रा ने दिल्ली में राष्ट्रीय नेतृत्व से लगभग एक घंटे तक बंद कमरे में चर्चा की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने पार्टी के फैसले के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया और न ही किसी तरह की नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने अपने समर्थकों से भी अनुशासन बनाए रखने की अपील की।
मेरा जन्म भाजपा में हुआ, भाजपा में ही रहूंगा
दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने उन सभी अटकलों को खारिज कर दिया, जिनमें उनके निर्दलीय चुनाव लडऩे या किसी अन्य दल में जाने की चर्चा हो रही थी। उन्होंने कहा कि उनका राजनीतिक जीवन भाजपा से शुरू हुआ है और अंत भी भाजपा में ही होगा। पार्टी का निर्णय उनके लिए सर्वोपरि है और वे एक सामान्य कार्यकर्ता की तरह अधिकृत प्रत्याशी के साथ पूरी ताकत से चुनाव लड़ेंगे।
टिकट नहीं मिला, अब करेंगे आत्मचिंतन
डॉ. मिश्रा ने कहा कि पार्टी ने जो निर्णय लिया है, उसका वे पूरा सम्मान करते हैं। उन्होंने किसी व्यक्ति या नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराने से इनकार करते हुए कहा कि यदि उन्हें टिकट नहीं मिला तो निश्चित रूप से उनमें ही कोई कमी रही होगी, जिस पर वे आत्मचिंतन करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें भविष्य के लिए किसी प्रकार का कोई आश्वासन नहीं दिया गया और न ही उन्होंने किसी पद या जिम्मेदारी की मांग की है।
जीत से तय होगी कई नेताओं की साख
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दतिया उपचुनाव का परिणाम केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं रहेगा। भाजपा के लिए यह संगठनात्मक एकजुटता और टिकट वितरण के फैसले की परीक्षा होगी, जबकि डॉ. नरोत्तम मिश्रा के लिए यह साबित करने का अवसर होगा कि टिकट भले न मिला हो, लेकिन दतिया में उनकी पकड़ और प्रभाव आज भी कायम है। दूसरी ओर कांग्रेस इस चुनाव को भाजपा के भीतर की नाराजगी को भुनाने के अवसर के रूप में देख रही है। ऐसे में दतिया की लड़ाई आने वाले दिनों में प्रदेश की सबसे चर्चित राजनीतिक जंग बनने जा रही है।
भाजपा ने नरोत्तम पर जताया भरोसा
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी स्पष्ट संकेत दिए कि दतिया में पार्टी को डॉ. नरोत्तम मिश्रा के अनुभव और जनाधार पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि मिश्रा ने क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहकर विकास कार्य कराए हैं और उपचुनाव में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है।
आज नामांकन के साथ शक्ति प्रदर्शन
सोमवार को नामांकन के अंतिम दिन दतिया की राजनीति पूरी तरह चुनावी रंग में नजर आएगी। भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के नामांकन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह और डॉ. नरोत्तम मिश्रा सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह के नामांकन में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार तथा अन्य वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। दोनों दलों ने नामांकन को शक्ति प्रदर्शन का मंच बना दिया है और हजारों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी के जरिए राजनीतिक संदेश देने की तैयारी की है।
नामांकन के बाद फिर दिल्ली रवाना होंगे मिश्रा
सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय नेतृत्व से मुलाकात के दौरान कुछ वरिष्ठ नेताओं से डॉ. मिश्रा की मुलाकात नहीं हो सकी। ऐसे में नामांकन कार्यक्रम और दतिया में रणनीतिक बैठक के बाद वे एक बार फिर दिल्ली जाएंगे। वहां एक-दो दिन प्रवास के दौरान वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करेंगे और उसके बाद पूरी तरह दतिया उपचुनाव के प्रचार अभियान में सक्रिय हो जाएंगे।
