दस साल बाद खुलेगा प्रमोशन का रास्ता

प्रमोशन
  • दो लाख कर्मचारियों को मिलेगा फायदा

गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश के करीब दस साल से एक ही पद पर काम कर रहे सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों का लंबा इंतजार अब खत्म होने की उम्मीद है। तबादला नीति लागू होने के बाद राज्य सरकार की अगली बड़ी प्राथमिकता रुकी हुई पदोन्नति प्रक्रिया को फिर से शुरू करना है। सरकार के उच्च स्तर पर इस संबंध में सहमति बन चुकी है और कानूनी अड़चनों को दूर करने के लिए विधि विभाग अंतिम मसौदे पर काम कर रहा है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो जुलाई के दूसरे सप्ताह से विभागवार नियमित प्रमोशन शुरू हो सकते हैं। प्रदेश में मई 2016 के बाद से नियमित पदोन्नति नहीं हुई है। इस दौरान हजारों अधिकारी-कर्मचारियों को केवल प्रभार या कार्यवाहक व्यवस्था के तहत जिम्मेदारियां दी गईं, लेकिन उन्हें नियमित पदोन्नति का लाभ नहीं मिला। परिणामस्वरूप न तो वेतनमान बदला और न ही पदोन्नति से मिलने वाले अन्य वित्तीय लाभ मिल सके। अब सरकार इस दशक पुराने गतिरोध को समाप्त करने की तैयारी में है।
आरक्षण विवाद बना था सबसे बड़ा कारण
प्रदेश में पदोन्नति प्रक्रिया मई 2016 तक सामान्य रूप से चल रही थी, लेकिन प्रमोशन में आरक्षण को लेकर कानूनी विवाद शुरू होने के बाद मामला अदालत पहुंच गया। इसके बाद वर्षों तक पदोन्नति की फाइलें न्यायालय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझी रहीं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्ष 2025 में ही अधिकारियों को प्रमोशन प्रक्रिया दोबारा शुरू करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सरकार ने हाईकोर्ट जबलपुर और दिल्ली के वरिष्ठ अधिवक्ताओं एवं विधि विशेषज्ञों से विस्तृत सलाह लेकर नया कानूनी मसौदा तैयार कराया है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी बाधा न आए।
कैबिनेट की मंजूरी, विभागों को तैयारी के निर्देश
17 जून को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में मध्यप्रदेश लोकसेवा पदोन्नति नियम-2025 को औपचारिक मंजूरी मिल चुकी है। इसके बाद सरकार ने सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और विभागाध्यक्षों को मौखिक निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने विभागों में पदोन्नति की प्रक्रिया के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी रखें। मुख्य सचिव अनुराग जैन भी पिछले कुछ दिनों से लगातार विभागों की समीक्षा कर रहे हैं और प्रशासनिक सुधारों के साथ लंबित पदोन्नतियों पर विशेष जोर दे रहे हैं।
करीब दो लाख कर्मचारियों को मिलेगा सीधा लाभ
प्रदेश में लगभग साढ़े चार लाख नियमित सरकारी कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें से करीब दो लाख अधिकारी और कर्मचारी ऐसे हैं जिनकी पदोन्नति वर्षों से लंबित है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे कर्मचारियों की भी है जो बिना प्रमोशन पाए ही सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके हैं। यदि सरकार जुलाई में पदोन्नति प्रक्रिया शुरू कर देती है तो हजारों कर्मचारियों को न केवल नया पद मिलेगा बल्कि उन्हें वेतनमान, वरिष्ठता और सेवा संबंधी अन्य लाभ भी प्राप्त होंगे।
नई भर्तियों का भी खुलेगा रास्ता
सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव रोजगार पर भी पड़ेगा। वरिष्ठ कर्मचारियों के प्रमोशन के बाद निचले स्तर के हजारों पद खाली हो जाएंगे। फिलहाल इन पदों पर कई विभाग संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के माध्यम से काम चला रहे हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यदि सभी विभागों में नियमित पदोन्नति पूरी हो जाती है तो करीब दो लाख पद रिक्त हो सकते हैं। इससे आने वाले समय में बड़े पैमाने पर सरकारी भर्ती का रास्ता साफ होगा और युवाओं को भी रोजगार के नए अवसर मिल सकेंगे।
मानसून सत्र से पहले समाधान की तैयारी
सरकार की कोशिश है कि 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र से पहले वर्षों से लंबित इस मुद्दे का स्थायी समाधान निकाल लिया जाए। इससे सरकार कर्मचारियों के लंबे समय से चले आ रहे असंतोष को दूर करने के साथ प्रशासनिक व्यवस्था को भी नई गति देना चाहती है।

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