- कैबिनेट का बड़ा फैसला: यूसीसी समेत 9 विधेयकों को मंजूरी

गौरव चौहान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में गोंड वंश के ऐतिहासिक दुर्ग जगदीशपुर स्थित चमन महल में हुई मध्य प्रदेश कैबिनेट की बैठक में राज्य की प्रशासनिक, स्वास्थ्य, शिक्षा, निवेश और श्रम व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। कैबिनेट ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) सहित कुल नौ विधेयकों को मंजूरी दी, जिन्हें अब विधानसभा के मॉनसून सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा।
बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए प्रदेश के 73 अस्पतालों के उन्नयन पर 898.96 करोड़ रुपए खर्च करने की स्वीकृति दी गई। इसके साथ ही मेडिकल शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय का पुनर्गठन कर दो अलग-अलग विश्वविद्यालय बनाने का निर्णय लिया गया।
मेडिकल शिक्षा में बड़ा बदलाव
कैबिनेट ने मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2026 तथा मध्य प्रदेश धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक-2026 को मंजूरी दी। इसके तहत वर्तमान मेडिकल विश्वविद्यालय का विभाजन कर अलग-अलग विश्वविद्यालय स्थापित किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि इससे मेडिकल, नर्सिंग और पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों की परीक्षाओं और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार होगा। साथ ही जबलपुर स्थित विश्वविद्यालय का विस्तार एम्स की तर्ज पर किया जाएगा, जिससे चिकित्सा शिक्षा और शोध को नई गति मिलेगी।
15 मीटर से ऊंची इमारतों के लिए फायर एनओसी जरूरी
कैबिनेट ने मध्य प्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक-2026 को भी मंजूरी दी। नए कानून के तहत 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले स्कूल, अस्पताल, होटल, मॉल और औद्योगिक भवनों के लिए फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट अनिवार्य होगा। बिना अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र के किसी भी भवन को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाएगा। सरकार अग्निशमन सेवाओं का विस्तार करेगी तथा नए फायर स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, ताकि 10 मिनट के भीतर फायर ब्रिगेड घटनास्थल पर पहुंचना सुनिश्चित किया जा सके।
कारोबार को मिलेगी रफ्तार
कैबिनेट ने मध्य प्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक-2026 को भी स्वीकृति दी। इसके तहत उद्योगों और निवेशकों को विभिन्न विभागों से मिलने वाली स्वीकृतियों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया जाएगा। सभी अनुमतियों का समन्वित और समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति सुधारों के प्रभावी क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है और नया कानून निवेशकों के लिए प्रक्रियाओं को और सरल बनाएगा।
निजी विश्वविद्यालय खोलना होगा आसान
कैबिनेट ने निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2026 को भी मंजूरी दी। इसके तहत निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए भूमि और एंडोमेंट फंड की अनिवार्यता समाप्त करने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का मानना है कि इससे उच्च शिक्षा क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ेगा और नए संस्थानों की स्थापना आसान होगी।
राजमार्ग कानून होगा आधुनिक
मध्य प्रदेश राजमार्ग (संशोधन) विधेयक-2026 के जरिए अंग्रेजों के समय से लागू पुराने और अप्रासंगिक प्रावधानों को समाप्त किया जाएगा। सरकार आधुनिक यातायात और आधारभूत संरचना की जरूरतों के अनुरूप नया राजमार्ग कानून लागू करेगी।
छह पुराने श्रम कानून समाप्त होंगे
कैबिनेट ने मध्य प्रदेश श्रम शक्ति संहिता (कोड ऑन एम्पावरिंग वर्कस्पेस)-2026 को मंजूरी दी। इसके तहत राज्य के छह पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर एकीकृत कानून लागू किया जाएगा। नए प्रावधानों में थिएटर, रेस्टोरेंट और अन्य प्रतिष्ठानों को 24×7 संचालन, तीन शिफ्ट में कार्य व्यवस्था तथा नए प्रतिष्ठानों के पंजीयन के दौरान इंस्पेक्टर सत्यापन की अनिवार्यता समाप्त करने का प्रस्ताव शामिल है।
निरसन विधेयक को भी मिली मंजूरी
कैबिनेट ने मध्य प्रदेश निरसन विधेयक-2026 का भी अनुमोदन किया। इसके तहत अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त करने संबंधी विधेयक को विधानसभा में पुन: प्रस्तुत कर पारित कराने और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के लिए विधि एवं विधायी कार्य विभाग को अधिकृत किया गया।
यूसीसी पर मुख्यमंत्री का संदेश
कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रस्तावित यूनिफॉर्म सिविल कोड संविधान में निहित समानता, न्याय और धर्मनिरपेक्षता की भावना को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में राम, रहीम, रविंदर और रॉबिन सभी एक समान हैं। उनका कहना था कि यूसीसी का उद्देश्य महिलाओं के साथ पर्सनल कानूनों के तहत होने वाले भेदभाव को समाप्त कर उन्हें समान अधिकार और सुरक्षा प्रदान करना है, जबकि सार्वजनिक नैतिकता और नीति के अनुरूप धार्मिक परंपराओं का संरक्षण भी सुनिश्चित किया गया है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि 80 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम महिलाओं और 40 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम पुरुषों ने यूसीसी का समर्थन किया है। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश का प्रस्तावित यूसीसी उत्तराखंड, गुजरात और असम में लागू समान नागरिक संहिता के अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। इन फैसलों के साथ राज्य सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि आगामी विधानसभा सत्र में प्रशासनिक सुधार, निवेश, शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम सुधार और समान नागरिक संहिता जैसे व्यापक विषय सरकार की प्राथमिकता में रहेंगे।
