सवाल सटीक होगा तो जवाब भी सटीक मिलेगा

नरेंद्र सिंह तोमर
  • मप्र विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा-

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि विधानसभा में सरकार से जवाबदेही तय कराने का सबसे प्रभावी माध्यम प्रश्नकाल है। यदि विधायक का प्रश्न और पूरक प्रश्न स्पष्ट, तथ्यपरक और सार्थक होगा तो सरकार को भी सटीक जवाब देना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कमजोर या भटकाने वाले प्रश्नों से न केवल समय नष्ट होता है, बल्कि सरकार भी स्पष्ट जवाब देने से बच जाती है।  शुक्रवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में नव निर्वाचित विधायकों के प्रबोधन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए तोमर ने सरकार की जवाबदेही तय करने के लिए संसदीय प्रश्न एवं अन्य संसदीय उपकरणों की महत्ता विषय पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश सहित विभिन्न राज्यों के पीठासीन अधिकारी और विधानसभा एवं लोकसभा के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
विधायक प्रश्न पूछने से पहले अध्ययन करें: तोमर ने कहा कि विधायक को प्रश्न पूछने से पहले विषय का गंभीर अध्ययन करना चाहिए। कई बार तैयार प्रश्न मिल जाने पर बिना समझे उन्हें प्रस्तुत कर दिया जाता है, जबकि प्रश्न स्वयं तैयार करने या उसे गहराई से समझने पर उसकी वास्तविक भावना और उद्देश्य स्पष्ट होता है। उन्होंने कहा कि प्रश्न किसी व्यक्ति विशेष को लक्ष्य बनाकर नहीं होना चाहिए, बल्कि जनहित और नीतिगत विषयों पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल को किसी भी स्थिति में स्थगित नहीं किया जाना चाहिए। पूरक प्रश्न पूछते समय लंबा भाषण देने के बजाय सीधे मुद्दे पर सवाल करना चाहिए। यदि सरकार के पास जवाब नहीं होगा तो वह सदन में निरुत्तर होगी और यदि जवाब देगी तो जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र के लोगों के सामने प्रभावी ढंग से अपनी भूमिका निभा सकेंगे।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सत्र शुरू होने से पहले विधायकों को अपने क्षेत्र का दौरा करना चाहिए। इससे स्थानीय समस्याओं की सही जानकारी मिलती है और सदन में उठाए जाने वाले मुद्दे अधिक प्रभावी बनते हैं।  उन्होंने ध्यानाकर्षण और काम रोको प्रस्ताव जैसे संसदीय उपकरणों का भी सोच-समझकर उपयोग करने की सलाह दी।
सार्वजनिक जीवन में आचरण भी अहम
तोमर ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में आने के बाद व्यक्ति का आचरण भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है जितना उसका काम। व्यक्तिगत जीवन की शुचिता ही सार्वजनिक जीवन की विश्वसनीयता का आधार बनती है। जनप्रतिनिधि यदि ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ काम करेंगे तो जनता का विश्वास और लोकतंत्र दोनों मजबूत होंगे। उन्होंने कहा कि विधानसभा केवल कानून बनाने का मंच नहीं, बल्कि लोकतंत्र की वह संस्था है जहां सरकार हर निर्णय, नीति और खर्च के लिए जनता के प्रतिनिधियों के प्रति जवाबदेह होती है। प्रश्न, चर्चा, समितियां और वित्तीय नियंत्रण जैसे संसदीय माध्यम लोकतंत्र को मजबूत बनाने का काम करते हैं।

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