
- नए चेहरों को मिलेगा मौका…
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश कांग्रेस के आधा दर्जन दिग्गज नेता संगठन चलाने में फ्लाप साबित हुए हैं, जिनसे पार्टी जल्द ही संगठन की जिम्मेदारी वापस लेगी। उनके स्थान पर संगठन सृजन अभियान में चिह्नित किए गए दूसरे नेताओं को जिलों की कमान दी जा सकती हैं। सूत्रों की मानें तो इन नेताओं सहित प्रदेश के 14 जिलाध्यक्षों को बदले जा सकते हैं। गौरतलब है कि गुजरात के बाद मध्यप्रदेश में लगभग 8 माह पहले कांग्रेस ने संगठन सूजन अभियान के तहत ब्लॉक से लेकर जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की थी। जिन्हें पद संभालने के साथ ही अपनी परफार्मेस दिखाने का लक्ष्य भी दिया गया था। जिसका भोपाल में पिछले सप्ताह चार दिनों तक रिव्यू किया गया। बताया गया है कि परफार्मेस समीक्षा में 14 जिलाध्यक्ष तय गाइडलाइन के आधार पर संगठन नहीं चला सके। इनमें से केन्द्रीय चुनाव समिति के सदस्य एवं पूर्व मंत्री ओमकार सिंह मरकारम, ओबीसी कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष व सतना विधायक सिद्धार्थ सिंह कुशवाहा जैसे जिलाध्यक्ष भी शामिल बताए जा रहे हैं। इनके अलावा मंडला जिलाध्यक्ष अशोक मर्सकोले, आलीराजपुर जिलाध्यक्ष मुकेश पटेल और इंदौर शहर की कमान संभालने वाले चिंटू चौकसे भी सक्रियता के पैमाने पर खरे नहीं उतरे हैं। इसी तरह रीवा जिलाध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा, मऊगंज जिलाध्यक्ष हरिलाल कोल, सिंगरौली जिलाध्यक्ष सरस्वती सिंह, अशोकनगर के राजेन्द्र कुशवाहा, सतना शहर से आतिफ इकबाल सिद्धीकी, उमरिया से विजय कोल और नर्मदापुरम से गुड्डन पांडे भी निष्क्रिय रहे जिलाध्यक्षों की सूची में बताए जा रहे हैं।
विंध्य क्षेत्र के अध्यक्ष भी निष्क्रिय
पार्टी की गाइडलाइन पर विंधन क्षेत्र में आने वाले जिलों के कांग्रेस अध्यक्ष भी खरे नहीं उतर पाएं है। बात चाहे सतना और रीवा की करें और चाहे उमरिया मऊगंज और सिंगरौली के अध्यक्षों की। किसी ने भी गाइडलाइन पर काम नहीं किया। इधर इंदौर शहर के जिलाध्यक्ष चिंटू चौकसे से भोपाल और दिल्ली तक का संगठन नाराज बताया जा रहा है। इंदौर में वंदेमातरम विवाद पर चौकसे की बयानबाजी पर शीर्ष नेतृत्व ने नाराजगी जताई है। इससे पहले उनके द्वारा पूर्व मुयमंत्री दिग्विजय सिंह के इंदौर में किए गए एक प्रदर्शन पर भी बयान दिया गया था।
आदिवासी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा स्थिति खराब
संगठन सृजन अभियान के प्रभारी वामसी रेड्डी द्वारा चार दिवसीय रिव्यू में यह बात सामने आई है कि राज्य के आदिवासी जिलों के जिलाध्यक्षों की सक्रियता वैसी नहीं रही, जिन उम्मीदों से उन्हें जिलों की कमान सौंपी गई थी। दरअसल कांग्रेस संगठन के जरिए आदिवासी अंचलों में अपनी पहले जैसी जमीनी पकड़ मजबूत बनाना चाहती है। इसलिए डिंडौरी में पूर्व मंत्री ओमकार सिंह मरकाम का नाम संगठन सृजन अभियान में सबसे आगे था, जिससे उन्हें वहां की कमान सौंपी गई।
एक माह के अंदर बदलाव
संगठन सृजन अभियान के प्रभारी वामसी रेड्डी ने चार दिनों तक सभी जिलाध्यक्षों से वन टू वन चर्चा की। इसके बाद रिपोर्ट तैयार की गई है, जिसे रेहड़ी ने दिल्ली लौटने के बाद पार्टी नेतृत्व को सौंप दिया है। ऐसा माना जा रहा है कि इस पर जल्द ही निर्णय लिया जाएगा और जैसे ही दिल्ली से मंजूरी मिलेगी, रिपोर्ट में चिह्नित निष्क्रिय जिलाध्यक्षों को बदल दिया जाएगा।
