- नेपाल से चीन तक फैला वन्यजीव माफिया का नेटवर्क
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश, जिसे गर्व से टाइगर स्टेट का दर्जा प्राप्त है और जो दुनिया की बाघ राजधानी के रूप में जाना जाता है, अब अंतरराष्ट्रीय तस्करों का सबसे बड़ा केंद्र और आसान शिकारगाह बन गया है। बाघों के शरीर के अंगों (जैसे- खाल, हड्डियां, नाखून और पंजे) की विदेशों में भारी मांग और करोड़ों रुपये की कीमत के कारण, अंतरराष्ट्रीय तस्कर स्थानीय और अंतरराज्यीय शिकारियों (जैसे पारदी गैंग) की मदद से इन संरक्षित जीवों को लगातार निशाना बना रहे हैं। राज्य के प्रमुख टाइगर रिजर्व और वन क्षेत्रों में सक्रिय संगठित शिकारी गिरोह बाघों के शिकार और उनके अंगों की तस्करी के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। चिंताजनक तथ्य यह है कि नेपाल, म्यांमार, चीन और बांग्लादेश से जुड़े 10 कुख्यात अंतरराष्ट्रीय शिकारी एवं तस्करों की पहचान हो चुकी है, जिनके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस तक जारी हैं, लेकिन वे अब भी कानून की गिरफ्त से बाहर हैं।
मप्र स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स के अनुसार प्रदेश में शिकार के मामलों में वांछित 20 राष्ट्रीय और 27 राज्य स्तरीय आरोपी भी लंबे समय से फरार हैं। इनकी गिरफ्तारी के लिए विभिन्न राज्यों की पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर कार्रवाई की जा रही है।
टाइगर रिजर्व बने तस्करों का प्रमुख निशाना
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सतपुड़ा और पन्ना जैसे प्रमुख टाइगर रिजर्व लंबे समय से शिकारियों के निशाने पर रहे हैं। बाघ की खाल, हड्डियां, दांत और पंजों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग के कारण तस्करी का नेटवर्क लगातार सक्रिय बना हुआ है। स्थानीय शिकारी गिरोहों से लेकर अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट तक इस अवैध कारोबार से जुड़े हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बाघ संरक्षण की सफलता के साथ-साथ शिकार और तस्करी पर नियंत्रण बनाए रखना भी वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
टाइगर स्ट्राइक फोर्स की सक्रियता से बढ़ा दबाव
स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स ने हाल के वर्षों में कई बड़े गिरोहों का भंडाफोड़ कर वन्यजीव अपराधियों पर शिकंजा कसा है। मजबूत साक्ष्य और वैज्ञानिक जांच के कारण तस्करों के लिए कानून से बच निकलना कठिन होता जा रहा है। इसी क्रम में 5 जून को देश की सर्वोच्च अदालत ने मिजोरम के जामखानकाप निवासी थुम्पुई की ट्रांसफर याचिका खारिज कर दी। आरोपी पर बाघों के अवैध शिकार और उनके अंगों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी में शामिल होने के आरोप हैं।
दस साल पुराने मामले अब भी लंबित
प्रदेश के जंगलों में वन्यजीव अपराधों की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कुछ अंतरराष्ट्रीय तस्करों के खिलाफ दर्ज मामले एक दशक से अधिक पुराने हैं। सबसे पुराना लंबित वारंट वर्ष 2015 का बताया गया है। जांच एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार नेपाल और महाराष्ट्र से जुड़े आरोपियों की संख्या सबसे अधिक है, जबकि सिवनी, श्योपुर और कटनी जिले चिन्हित शिकारियों के मामलों में शीर्ष पर हैं।
