क्रॉस वोटिंग का डर: कांग्रेस की बाड़ाबंदी की तैयारी

  • मप्र में राज्यसभा की ‘तीसरी’ सीट के कारण गरमाया राजनीतिक माहौल
  • गौरव चौहान
क्रॉस वोटिंग का डर

 मप्र में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव राजनीतिक से ज्यादा गणितीय मुकाबले में तब्दील हो चुके हैं। बीजेपी ने जहां राष्ट्रीय महासिचव तरुण चुघ और प्रदेश सचिव रजनीश अग्रवाल को उतारा है, वहीं कांग्रेस की ओर से पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन मैदान में हैं। लेकिन असली कहानी इन उम्मीदवारों के नामों में नहीं, बल्कि विधानसभा के उन आंकड़ों में है जो कांग्रेस की नींद उड़ाए हुए हैं। राजनीतिक गलियारों में जोड़-तोड़ और रणनीतिक तैयारियों को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। इसी बीच कांग्रेस द्वारा अपने विधायकों की बाड़ाबंदी किए जाने की संभावना ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस विधायक दल की आज होने वाली बैठक के बाद विधायकों को हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक या तेलंगाना ले जाने का फैसला किया जा सकता है। पार्टी नेतृत्व को आशंका है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान विधायकों की खरीद-फरोख्त की कोशिशें हो सकती हैं। हालांकि भाजपा ने इस संभावना पर तंज कसते हुए कहा है कि जब पार्टी को अपने ही विधायकों पर भरोसा नहीं रहता, तब हार के संकेत दिखाई देने लगते हैं। उधर, राज्यसभा उम्मीदवारों की घोषणा के बाद कांग्रेस ने भाजपा पर महिला नेतृत्व की उपेक्षा का आरोप लगाया। कांग्रेस का कहना है कि महिला सशक्तीकरण की बात करने वाली भाजपा ने राज्यसभा के लिए किसी महिला को मौका नहीं दिया, जबकि कांग्रेस ने महिला उम्मीदवार उतारकर महिलाओं को प्राथमिकता देने का संदेश दिया है। इसके जवाब में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेन्द्र शर्मा ने कहा कि कांग्रेस महिला प्रतिनिधित्व को लेकर तथ्यात्मक स्थिति को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा चुनिंदा नेताओं को ही आगे बढ़ाया है और इस बार भी शीर्ष नेतृत्व की पसंद को तरजीह देकर जमीनी महिला कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की गई है।
विधायक दल की बैठक पर टिकी निगाहें
प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आज होने वाली विधायक दल की बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी ने सभी विधायकों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। सूत्रों का कहना है कि यदि बैठक में उम्मीदवार को लेकर असंतोष या किसी प्रकार की नाराजगी सामने आती है तो कांग्रेस अपने विधायकों को राज्य से बाहर भेज सकती है। बताया जा रहा है कि यदि भाजपा अंतिम समय में तीसरी सीट पर भी उम्मीदवार उतारती है तो कांग्रेस की बाड़ाबंदी और लंबी चल सकती है। ऐसे में विधायक मतदान तक एक साथ रखे जा सकते हैं।
मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी पर उठे सवाल
कांग्रेस द्वारा मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी के भीतर कुछ असंतोष भी सामने आया है। बैरागढ़ विधानसभा क्षेत्र से पूर्व प्रत्याशी रहे नरेश ज्ञानचंदानी ने सोशल मीडिया के माध्यम से पार्टी नेतृत्व को संदेश देते हुए कहा कि राज्यसभा में ऐसे नेता को भेजा जाना चाहिए था जिसकी संगठन और चुनावी राजनीति में मजबूत पकड़ हो। उन्होंने दावा किया कि विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह फैसला पुनर्विचार योग्य है।
तीसरी सीट पर भाजपा की नजर
संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के एक बयान ने भी राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी नेतृत्व निर्देश देता है तो भाजपा राज्यसभा की तीसरी सीट जीतने का भी प्रयास करेगी। हालांकि उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी के घोषित दोनों उम्मीदवार निश्चित रूप से विजयी होंगे। प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जब विपक्षी दल खरीद-फरोख्त की राजनीति कर रहा हो तो विधायकों को एकजुट रखना जरूरी हो जाता है। उन्होंने कहा कि विधायक दल की बैठक के बाद पार्टी नेतृत्व अगली रणनीति पर फैसला करेगा। राज्यसभा चुनाव को लेकर बढ़ती बयानबाजी और संभावित बाड़ाबंदी ने मध्यप्रदेश की राजनीति में नया उत्साह पैदा कर दिया है। अब सबकी नजर कांग्रेस विधायक दल की बैठक और भाजपा की आगामी रणनीति पर टिकी हुई है।
चौंका सकती है भाजपा
अंदरखाने भाजपा में तीसरी सीट को लेकर समीकरण बिठाने का काम तेजी से चल रहा है। तीसरे उम्मीदवार को बहुमत के आंकड़े तक पहुंचाने के लिए मप्र के कुछ दिग्गज नेता समीकरण बनाने में लगे हुए हैं। सूत्र बताते हैं कि यदि जादुई आंकड़े तक पहुंचने की स्थिति में भाजपा आई तो पूर्व विधायक जीतू जिराती को उतारा जा सकता है। जिराती को जिताने के लिए मंत्री विजयवर्गीय भी पूरी ताकत लगाएंगे। इधर कांग्रेस से भाजपा में आए पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी का नाम भी तीसरी सीट के लिए चर्चा में हैं। कमलनाथ के कांग्रेस से कैंडिडेट घोषित न होने के चलते पचौरी समर्थक भी समीकरण बनाने में जुटे हुए हैं। हालांकि तीसरी सीट पर यदि जमावट हो गई तो दिल्ली से चौंकाने वाला फैसला हो सकता है।

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