
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इंदौर नगर निगम के बहुचर्चित फर्जी बिल घोटाले में सोमवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए मास्टरमाइंड व पूर्व सहायक यंत्री अभय राठौर, मोहम्मद जाकिर और राहुल वडेरा को गिरफ्तार कर लिया। तीनों आरोपियों को पीएमएलए के स्पेशल जज के समक्ष पेश किया गया, जहां से कोर्ट ने उन्हें तीन दिन की ईडी रिमांड पर सौंप दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, साल 2024 में उजागर हुए इस घोटाले में जांच एजेंसी को अब तक 92 करोड़ रुपए की हेराफेरी के पुख्ता सबूत मिल चुके हैं। ईडी ने पिछले साल मामले में 20 से ज्यादा लोगों के ठिकानों पर छापे मारे और 34 करोड़ की 43 अचल संपत्तियां अटैच भी की हैं। अटैच की गई संपत्तियों में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में स्थित 43 रिहायशी और कृषि संपत्तियां शामिल हैं। अगली सुनवाई अब 5 जून को होगी।
फर्जी वर्क ऑर्डर और फाइलें तैयार की गईं। पुराने कामों को नया दिखाकर बिल बनाए गए। अधिकारियों के लॉगिन, आईडी-पासवर्ड और सिस्टम एक्सेस का दुरुपयोग हुआ। लेखा शाखा तक भुगतान की फाइलें पहुंचाई। बिना काम ही ऑडिट व तकनीकी अनुमोदन तक कर दिया गया। फर्जी बिलों का भुगतान ठेकेदारों के खातों तक पहुंच भी गया।
ड्रेनेज की फाइलों में घोटाला
2024 में नगर निगम के ड्रेनेज विभाग में पुराने कार्यों के नाम पर भुगतान की फाइलें निकाली गईं। जांच में पता चला कि कई काम या तो हुए ही नहीं थे या वर्षों पहले पूरे हो चुके थे, लेकिन उनके नाम पर नए बिल तैयार कर भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। शुरुआती जांच में लगभग 28 करोड़ रुपए के ऐसे बिल मिले, जो कथित तौर पर बिना काम के लगाए गए थे। जांच में पर्ते खुलती गईं और बड़ी गड़बड़ सामने आई।
34 करोड़ की संपत्ति अटैच
प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से मामले की जांच शुरू की। जुलाई 2025 में ईडी ने करीब 34 करोड़ रुपए की 43 संपत्तियां अटैच कीं। इनमें मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की जमीनें, मकान और अन्य संपत्तियां शामिल हैं। पकड़े गए तीन आरोपियों में राठौर पूर्व सहायक यंत्री हैं, जबकि बाकी दो मोहम्मद जाकिर और राहुल वडेरा ठेकेदार हैं।
