- मप्र में बिजली संकट की आशंका, सरकार ने शुरू की कंटीजेंसी प्लानिंग

- जरूरत पड़ने पर सौर, थर्मल और बाहरी राज्यों से होगी बिजली की व्यवस्था
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्यप्रदेश में संभावित अलनीनो प्रभाव ने केवल कृषि ही नहीं, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र की भी चिंता बढ़ा दी है। मानसून का लगभग एक-तिहाई समय बीतने के बावजूद प्रदेश में सामान्य से कम बारिश होने के कारण प्रमुख जलाशयों का जलस्तर अपेक्षित गति से नहीं बढ़ पाया है। इसका सीधा असर आने वाले समय में जलविद्युत उत्पादन पर पड़ सकता है। इसी आशंका को देखते हुए राज्य सरकार और ऊर्जा विभाग ने भविष्य की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए वैकल्पिक ऊर्जा रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। ऊर्जा विभाग का मानना है कि यदि मानसून के शेष दिनों में भी पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो इसका असर अगले वर्ष जलविद्युत उत्पादन में दिखाई देगा। जलाशयों में कम पानी होने से बिजली उत्पादन घट सकता है और पीक डिमांड के समय अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ सकती है। राज्य में जलविद्युत उत्पादन मुख्य रूप से इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, बरगी और बाणसागर जैसी बड़ी परियोजनाओं से होता है। इन बांधों में जलभराव की स्थिति पर ऊर्जा विभाग लगातार निगरानी रख रहा है। अधिकारियों के अनुसार यदि बारिश सामान्य से कम रहती है तो बिजली उत्पादन के साथ-साथ जल प्रबंधन की प्राथमिकताएं भी बदल जाएंगी। ऐसी स्थिति में पेयजल और सिंचाई को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
सरकार ने तैयार किया वैकल्पिक ऊर्जा प्लान
संभावित संकट से निपटने के लिए ऊर्जा विभाग ने पहले से कंटीजेंसी प्लान तैयार करना शुरू कर दिया है। यदि जलविद्युत उत्पादन कम होता है तो उसकी भरपाई अन्य स्रोतों से की जाएगी। सरकार की रणनीति के अनुसार, सौर ऊर्जा उत्पादन का अधिकतम उपयोग किया जाएगा। तापीय (थर्मल) बिजली घरों से अतिरिक्त उत्पादन किया जाएगा। आवश्यकता पडऩे पर अन्य राज्यों या बिजली एक्सचेंज से प्रतिस्पर्धी दरों पर बिजली खरीदी जाएगी। उपलब्ध ऊर्जा स्रोतों के बीच संतुलन बनाकर निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
कम बारिश से कम सकता है उत्पादन
ऊर्जा विभाग के आकलन के अनुसार वर्षा की कमी का असर सीधे जलविद्युत उत्पादन पर पड़ेगा। जानकारी के अनुसार, 10-15 प्रतिशत कम बारिश से जलविद्युत उत्पादन में 5 से 15 प्रतिशत तक कमी होगी। 20-30 प्रतिशत या अधिक कमी से उत्पादन में 20 से 40 प्रतिशत तक गिरावट होगी। गंभीर सूखे की स्थिति में कुछ परियोजनाओं में उत्पादन अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है, क्योंकि पानी को पेयजल और सिंचाई के लिए सुरक्षित रखना होगा। मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (एमपीपीएमसीएल) के प्रबंध निदेशक विशेष घरपाले का कहना है कि वर्तमान में राज्य के पास बिजली की पर्याप्त उपलब्धता है और उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि प्रतिकूल मौसम के कारण जलविद्युत उत्पादन प्रभावित भी होता है तो राज्य के पास वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध है। सरकार का लक्ष्य हर परिस्थिति में निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखना है।
मानसून के अगले चरण पर टिकी उम्मीदें
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अभी मानसून का बड़ा हिस्सा शेष है। यदि आने वाले सप्ताहों में अच्छी बारिश होती है तो जलाशयों का जलस्तर सुधर सकता है और जलविद्युत उत्पादन पर संकट काफी हद तक टल सकता है। लेकिन यदि वर्षा का मौजूदा रुझान जारी रहता है तो अगले वर्ष ऊर्जा प्रबंधन सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। सरकार का दावा है कि उपभोक्ताओं को बिजली संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा। प्रदेश में फिलहाल निगाहें मानसून के अगले दौर पर टिकी हैं। आने वाले सप्ताह यह तय करेंगे कि जलाशयों में पर्याप्त पानी पहुंचेगा या फिर ऊर्जा विभाग को अपनी वैकल्पिक रणनीति पर पूरी तरह अमल करना पड़ेगा।
