- राज्यसभा चुनाव: एमपी में कांग्रेस कर रही मंथन…दिग्गज चेहरों से होगा डैमेज कंट्रोल

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्य प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों में होने वाले राज्यसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। पार्टी में अंतर्कलह और क्रॉस-वोटिंग की आशंकाओं को देखते हुए आलाकमान पूरी रणनीति बना रहा है। यदि स्थानीय स्तर पर विधायकों में एकजुटता का अभाव दिखा, तो पार्टी डैमेज कंट्रोल के लिए किसी बड़े राष्ट्रीय दिग्गज या सर्वस्वीकार्य चेहरे को मैदान में उतार सकती है। मध्य प्रदेश में तीन सीटों पर चुनाव के लिए मतदान 18 जून को होना है। जून में कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। उन्होंने तीसरी बार चुनाव लडऩे से इन्कार कर दिया है, इसलिए पार्टी एक सुरक्षित सीट को जीतने के लिए किसी कद्दावर नेता पर मंथन कर रही है, ताकि क्रॉस वोटिंग की स्थिति से निपटा जा सके। फिलहाल, मीनाक्षी नटराजन के नाम पर कांग्रेस मंथन कर रही है, लेकिन संकट दिखा तो कमल नाथ या कोई बड़े केंद्रीय नेता को भी उतारा जा सकता है।
क्रॉस वोटिंग की चिंता
वर्ष 2016 के राज्य सभा चुनाव में ऐसा हुआ जब कांग्रेस उम्मीदवार विवेक तन्खा की जीत के लिए जरूरी 58 की जगह पार्टी के पास 52 विधायकों का ही मत थी। तब दूसरे दल के और निर्दलीय विधायकों ने भी उनके पक्ष में मतदान किया, जिससे 62 मत प्राप्त हुए। प्रत्याशी चयन में पार्टी द्वारा जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण भी साधने की कोशिश हो सकती है। वर्ष 2022 में राष्ट्रपति चुनाव में कांग्रेस विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग की गई थी। इस वर्ष फरवरी में हिमाचल प्रदेश और मार्च में हरियाणा में कांग्रेस विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की, जिससे मध्य प्रदेश में भी पार्टी चिंतित है।
वर्तमान विधानसभा स्थिति को देखें तो दतिया सीट से विधायक रहे राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। हालांकि विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर न्यायालय की रोक और बीना विधायक निर्मला सप्रे से जुड़ा मामला लंबित होने के कारण प्रभावी संख्या घटकर 62 रह गई है।
जीत के लिए सीटों का गणित
एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों का मत चाहिए। कहने को तो विधानसभा में कांग्रेस के 64 सदस्य हैं, पर इसमें श्योपुर के विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा के निर्वाचन का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण कोर्ट ने मतदान की अनुमति नहीं दी है। वहीं, बीना से कांग्रेस के टिकट पर जीतीं निर्मला सप्रे वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव के समय भाजपा के मंच पर आ गई थीं। पार्टी ने उनके विरुद्ध दल बदल विरोधी कानून के अंतर्गत कार्रवाई के लिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। इस तरह से उनके मत को पार्टी अपने पक्ष में नहीं गिन रही है। ऐसे में कांग्रेस के पास चार अतिरिक्त मत ही बचते हैं। हालांकि, कांग्रेस के पदाधिकारी कह रहे हैं कि उनके विधायक एक हैं।
2020 की याद फिर हुई ताजा
राज्यसभा चुनाव की मौजूदा तस्वीर ने एक बार फिर वर्ष 2020 के राजनीतिक घटनाक्रम की यादें ताजा कर दी हैं। उस समय कांग्रेस एक सीट पर दिग्विजय सिंह को उतार चुकी थी, जबकि दूसरी सीट पर ज्योतिरादित्य सिंधिया को मैदान में लाने की तैयारी थी। लेकिन चुनाव से पहले ही कांग्रेस में बड़ा राजनीतिक बदलाव हुआ और विधायकों के टूटने से पूरे समीकरण बदल गए थे।
