- राज्यसभा की तीसरी सीट पर सियासी घमासान
- क्रॉस वोटिंग की आशंका के बीच कांग्रेस विधायकों की घेरेबंदी की तैयारी में, 18 जून के मतदान पर टिकी नजरें
- गौरव चौहान

मप्र में राज्यसभा की तीसरी सीट का चुनाव अब केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं रह गया है, बल्कि यह भाजपा और कांग्रेस के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। कांग्रेस के हिस्से में मानी जा रही सीट पर भाजपा ने महेश केवट को उम्मीदवार बनाकर सियासी समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है। दोनों दल अपने-अपने विधायकों की एकजुटता का दावा कर रहे हैं, लेकिन चुनावी गणित और संभावित क्रॉस वोटिंग को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं। अपनी सीट को बचाए रखना कांग्रेस के लिए किसी अग्रिपरीक्षा से कम नहीं है।
कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन ने नामांकन दाखिल करने के बाद विश्वास जताया कि पार्टी एकजुटता और विचारधारा के आधार पर चुनाव जीतेगी। वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दावा किया कि भाजपा का तीसरा प्रत्याशी भी राज्यसभा पहुंचेगा। विधानसभा परिसर सोमवार को पूरे दिन राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बना रहा। मौजूदा संख्या बल के अनुसार भाजपा को केवट की जीत के लिए 10 अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी। यही कारण है कि चुनाव में क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि कांग्रेस नेताओं ने इसे सिरे से खारिज किया है। राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान 18 जून को होगा। तीसरी सीट पर भाजपा का अतिरिक्त उम्मीदवार उतारना और कांग्रेस का विधायकों को एकजुट रखने का प्रयास संकेत दे रहा है कि यह चुनाव केवल संख्या का नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रबंधन और रणनीति का भी बड़ा परीक्षण बनने जा रहा है।
भाजपा का दांव, कांग्रेस की चिंता
भाजपा ने रविवार देर रात महेश केवट को तीसरा उम्मीदवार घोषित किया। विधानसभा के मौजूदा गणित के अनुसार भाजपा के पास दो सीटें जीतने के लिए पर्याप्त वोट हैं, लेकिन तीसरी सीट के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता होगी। इसी कारण राजनीतिक हलकों में क्रॉस वोटिंग की चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व का दावा है कि उसके सभी विधायक एकजुट हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा पर महिला विरोधी राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि महिला आरक्षण की बात करने वाली पार्टी महिला उम्मीदवार को रोकने का प्रयास कर रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस के विधायक पूरी तरह एकजुट हैं और भाजपा की रणनीति सफल नहीं होगी। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का कहना है कि भाजपा के पास तीसरा उम्मीदवार जिताने लायक संख्या नहीं है और केवल भ्रम का वातावरण बनाया जा रहा है। संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दावा किया कि कांग्रेस को अपने विधायकों पर भरोसा नहीं है, इसलिए उन्हें दूसरे राज्यों में ले जाने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि बीना विधायक निर्मला सप्रे राज्यसभा चुनाव में भाजपा का समर्थन करेंगी।
नामांकन में शक्ति प्रदर्शन
कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के नामांकन के दौरान जीतू पटवारी, दिग्विजय सिंह, हरीश चौधरी, कांतिलाल भूरिया, अरुण यादव और विक्रांत भूरिया सहित अधिकांश वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए, हालांकि उन्होंने अपना समर्थन घोषित किया है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ महेश केवट ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल तथा प्रदेश प्रभारी महेन्द्र सिंह की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया। भाजपा नेताओं ने तीसरी सीट जीतने का दावा दोहराया।
कांग्रेस विधायकों को बाहर ले जाने की तैयारी
क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं के बीच कांग्रेस केंद्रीय नेतृत्व ने बी.के. हरिप्रसाद और भंवर जितेन्द्र सिंह को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। सूत्रों के अनुसार मतदान से पहले कांग्रेस विधायकों को तेलंगाना और कर्नाटक भेजा जा सकता है, जहां रणनीतिक बैठकें आयोजित होंगी। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भाजपा के तीसरे उम्मीदवार को भ्रम पैदा करने की कोशिश बताया। वहीं कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे ने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि परिणाम कांग्रेस के पक्ष में आएंगे। विधायक सुनील उईके ने दावा किया कि मीनाक्षी नटराजन को कांग्रेस के घोषित समर्थन से भी अधिक वोट मिलेंगे। भाजपा ने भी मतदान से पहले अपने विधायकों को भोपाल में दो दिवसीय प्रशिक्षण देने का फैसला किया है। 16 और 17 जून को आयोजित होने वाले इस प्रशिक्षण में राज्यसभा चुनाव की मतदान प्रक्रिया और रणनीति समझाई जाएगी।
कांग्रेस को झटका
नरेला से कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी नरेश ज्ञानचंदानी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को भेजे पत्र में मीनाक्षी नटराजन की जीत की संभावनाओं पर सवाल उठाए और असहमति के चलते इस्तीफा देने की बात कही। राजनैतिक गलियारों में चर्चा है कि ज्ञानचंदानी का यह इस्तीफा अचानक नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे गहरी नाराजगी है। हाल ही में कांग्रेस द्वारा मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने के बाद नरेश ज्ञानचंदानी ने उनके खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया था। माना जा रहा है कि स्थानीय नेताओं की उपेक्षा और राज्यसभा टिकट वितरण को लेकर उपजे असंतोष के चलते ही उन्होंने पार्टी छोडऩे का मन बनाया।
भाजपा को 10 विधायकों की जरूरत
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 58 वोटों की आवश्यकता है। विधानसभा में दतिया विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद कांग्रेस की संख्या 64 रह गई है। वहीं विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर न्यायालय की रोक के कारण कांग्रेस के प्रभावी वोट घटकर 63 हो जाते हैं। बीना विधायक निर्मला सप्रे का रुख भाजपा की ओर माना जा रहा है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस के भरोसेमंद वोट लगभग 62 माने जा रहे हैं। यह संख्या जीत के लिए आवश्यक आंकड़े से केवल चार वोट अधिक है। ऐसे में यदि कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग होती है तो पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। दूसरी ओर भाजपा के पास 164 विधायक हैं। दो सीटें आराम से जीतने के बाद उसके पास 48 वोट शेष रहेंगे। तीसरी सीट जीतने के लिए उसे 10 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। भारत आदिवासी पार्टी का एक वोट भाजपा को मिलने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में कांग्रेस के भीतर यदि असंतोष या क्रॉस वोटिंग होती है तो तीसरी सीट का परिणाम अप्रत्याशित हो सकता है।
