
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (बीसीसीआई) में सहयोजित सदस्यों और सलाहकारों के मनोनयन को लेकर संगठन के भीतर सवाल उठने लगे हैं। चेंबर के विधान और आंतरिक प्रावधानों के जानकारों का कहना है कि संगठन में पूर्व निर्वाचित अध्यक्षों के अनुभव और मार्गदर्शन का लाभ लेने की परंपरा रही है, लेकिन हालिया मनोनयन प्रक्रिया में इस परंपरा की अनदेखी की गई है। दरअसल, हरिभूमि में प्रकाशित कार्यकारिणी की मंजूरी के बिना तीन सहयोजित सदस्य बनाने से बाजार प्रमुखों में रोष शीर्षक से खबर के बाद चेंबर अध्यक्ष गोविंद गोयल ने मंगलवार को कार्यकारिणी की बैठक बुलाई। बैठक में आठ सहयोजित सदस्यों के साथ वरिष्ठ पदों पर सलाहकारों की नियुक्ति का निर्णय लिया। अध्यक्ष गोविंद गोयल ने सहयोजित सदस्य में जिन लोगों को मनोनीत उसमें प्रमुख रूप से नवनियुक्त सहयोजित सदस्यों रूप में अरविंद गोयनका, जितेंद्र धाकड़, कन्हैयालाल इसरानी कन्नू भैया, मनोज सिंह मीक, प्रमोद जैन हिमांशु, संजीव गर्ग गांधी, वेंकटेश गोयल और विजय गौर शामिल हैं। इसके अलावा वरिष्ठ एवं अनुभवी व्यक्तित्वों को संगठन से जोड़ते हुए दीपक लालचंदानी को संरक्षक तथा विनोद जैन (एमपीटी) और कृष्ण कुमार बागड़ को मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया है।
विधान की अनदेखी का आरोप
चेंबर के वरिष्ठ सदस्यों और विधान की जानकारी रखने वाले चेंबर के मेंबर और पदाधिकारियों का आरोप है कि हालिया मनोनयन में अध्यक्ष द्वारा वन मैन रूल जैसी प्रक्रिया अपनाई गई। उनका कहना है कि संगठन के विधान और आंतरिक व्यवस्था के तहत निर्वाचित पूर्व अध्यक्ष को उनकी वरिष्ठता और अनुभव के आधार पर संगठन के मार्गदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका मिलनी चाहिए थी। आरोप है कि हालिया नियुक्तियों में पूर्व अध्यक्षों के अनुभव और मार्गदर्शन को अपेक्षित महत्व नहीं दिया गया।
