
- मप्र में पीक आवर्स में सस्ती बिजली उपलब्ध कराने की तैयारी
- बीरसिंहपुर, बीना और सेंधवा में स्थापित होंगी अत्याधुनिक ऊर्जा भंडारण इकाइयां
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश बिजली क्षेत्र में ऊर्जा भंडारण (बैटरी स्टोरेज) की नई तकनीक अपनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। राज्य में पहली बार 625 मेगावाट क्षमता का स्टैंडअलोन बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) स्थापित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (एमपीपीएमसीएल) ने निविदा जारी कर दी है। परियोजना का उद्देश्य बिजली की बढ़ती मांग के समय महंगी बिजली खरीद पर निर्भरता कम करना, नवीकरणीय ऊर्जा का बेहतर उपयोग करना और प्रदेश की बिजली व्यवस्था को अधिक भरोसेमंद बनाना है।
करीब 1250 मेगावाट-घंटा (एमडब्ल्यूएच) ऊर्जा भंडारण क्षमता वाली यह परियोजना तीन प्रमुख केंद्रों—बीरसिंहपुर, बीना और सेंधवा—में विकसित होगी। इसमें बीरसिंहपुर और बीना में 250-250 मेगावाट (500-500 एमडब्ल्यूएच) तथा सेंधवा में 125 मेगावाट (250 एमडब्ल्यूएच) क्षमता की बैटरी इकाइयां स्थापित की जाएंगी। इन सभी को राज्य के ट्रांसमिशन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, ताकि जरूरत पडऩे पर तुरंत बिजली ग्रिड में उपलब्ध कराई जा सके।
अब ऑफ-पीक की सस्ती बिजली होगी पीक आवर्स की ताकत
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि दिन या रात के उन घंटों में, जब बिजली की मांग कम होती है और उत्पादन अधिक रहता है, अतिरिक्त बिजली को बैटरियों में संग्रहित किया जाएगा। बाद में शाम या अन्य पीक आवर्स में, जब मांग अचानक बढ़ जाती है और बिजली महंगी पड़ती है, उसी संग्रहित ऊर्जा को ग्रिड में वापस भेजा जाएगा। इस व्यवस्था से वितरण कंपनियों को एक्सचेंज या अन्य स्रोतों से ऊंची कीमत पर तत्काल बिजली खरीदने की जरूरत काफी कम हो जाएगी। इससे बिजली खरीद लागत नियंत्रित होगी और उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
सौर और पवन ऊर्जा का मिलेगा पूरा लाभ
प्रदेश में लगातार सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन बढ़ रहा है, लेकिन इन स्रोतों से मिलने वाली बिजली मौसम और समय पर निर्भर रहती है। कई बार उत्पादन अधिक होने पर बिजली का पूरा उपयोग नहीं हो पाता। बैटरी स्टोरेज सिस्टम इस समस्या का समाधान बनेगा। अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा को सुरक्षित रखा जाएगा और आवश्यकता पडऩे पर उपयोग किया जाएगा। इससे ग्रीन एनर्जी का अधिकतम इस्तेमाल संभव होगा तथा पारंपरिक ताप विद्युत संयंत्रों पर दबाव भी कम पड़ेगा।
प्रदर्शन में लापरवाही पर लगेगा दोगुना जुर्माना
एमपीपीएमसीएल ने परियोजना के संचालन के लिए कड़े मानक निर्धारित किए हैं। प्रत्येक बैटरी सिस्टम को प्रतिदिन दो पूर्ण चार्ज-डिस्चार्ज चक्र उपलब्ध कराने होंगे तथा सालभर में 95 प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। यदि डेवलपर तय क्षमता उपलब्ध नहीं करा पाया तो उसे उपलब्ध न कराई गई क्षमता के कैपेसिटी चार्ज का दोगुना लिक्विडेटेड डैमेज देना होगा। साथ ही बैटरियों की स्वाभाविक क्षमता में गिरावट (डिग्रेडेशन) के बावजूद पहले वर्ष के अंत तक 97.5 प्रतिशत तथा 12वें वर्ष तक कम से कम 70 प्रतिशत क्षमता बनाए रखना अनिवार्य होगा। परियोजना को समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा कराने के लिए कंपनियों के लिए वित्तीय पात्रता के सख्त मानदंड तय किए गए हैं। बोलीदाता को वार्षिक टर्नओवर, लाभ क्षमता या बैंक की लाइन ऑफ क्रेडिट के आधार पर अपनी आर्थिक मजबूती साबित करनी होगी। इससे केवल अनुभवी और वित्तीय रूप से सक्षम कंपनियां ही इस परियोजना में भाग ले सकेंगी।
रिवर्स ऑक्शन से तय होगी सबसे सस्ती दर
निविदा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए तकनीकी पात्रता के बाद ई-रिवर्स ऑक्शन कराया जाएगा। प्रत्येक परियोजना के लिए सबसे कम टैरिफ देने वाले डेवलपर को प्राथमिकता मिलेगी। यदि तीन से अधिक कंपनियां पात्र होती हैं तो एल-1 से पांच प्रतिशत से अधिक दर देने वाले सबसे महंगे बोलीदाता को रिवर्स ऑक्शन से बाहर किया जा सकेगा। अंतिम चयन तकनीकी योग्यता और सबसे कम दर के आधार पर होगा।
प्रदेश को मिलेंगे कई बड़े फायदे
सरकार के इस कदम से पीक आवर्स में महंगी बिजली खरीद की आवश्यकता घटेगी। बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर और भरोसेमंद बनेगी। सौर और पवन ऊर्जा का बेहतर उपयोग होगा। ग्रिड की लचीलापन बढ़ेगा। भविष्य में बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी। बिजली वितरण कंपनियों की खरीद लागत कम होने से दीर्घकाल में उपभोक्ताओं को भी लाभ मिलने की संभावना बढ़ेगी। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली भविष्य की बिजली व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बनने जा रही है। मध्यप्रदेश की यह पहल न केवल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि राज्य को आधुनिक, हरित और स्मार्ट पावर सिस्टम की दिशा में भी आगे ले जाएगी।
