आयातित दवाओं की बची शेल्फ लाइफ 12 महीने अनिवार्य

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देश में मरीजों के स्वास्थ्य और उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सरकार ने दवा नियमों में बदलाव का एक मसौदा तैयार किया है, जिसके तहत अब विदेश से आयात होने वाली दवाओं की भारत आने के समय बची हुई उम्र (रेसिडुअल शेल्फ लाइफ) कम से कम 12 महीने यानी एक साल होनी चाहिए। ताकि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को ऐसी दवाएं न मिलें जो जल्द ही एक्सपायर होने वाली हों। इससे मरीजों को इस्तेमाल के लिए पूरा समय मिलेगा। सप्लाई चेन की मजबूती व बर्बादी पर लगाम वर्तमान नियम के अनुसार, आयातित दवाओं की शेल्फ लाइफ 60 प्रतिशत से अधिक होनी जरूरी थी। नए प्रस्ताव से न केवल दवाओं की बर्बादी रुकेगी, बल्कि पूरी सप्लाई चेन में तालमेल बेहतर होगा। समय रहते दवाओं के वितरण और उपभोग से लागत में कमी आएगी और देश में जरूरी दवाओं की किल्लत नहीं होगी।

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