
सुप्रीम कोर्ट ने देश में दो से ज्यादा बच्चे होने पर चुनाव लडऩे से रोकने वाले कानूनों की प्रासंगिकता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। साथ ही इस व्यवस्था पर दोबारा विचार करने की जरूरत बताई है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम के तहत तीसरे बच्चे के जन्म के कारण अयोग्य ठहराई गईं काकोड़ा ग्राम पंचायत की पूर्व सरपंच मंगला भीमराव को राहत देते हुए इस मामले को एक बड़ी पीठ के पास भेज दिया है। यह कदम 2003 के उस पुराने फैसले की समीक्षा के लिए उठाया गया है, जिसने दो बच्चों की शर्त को सही ठहराया था। याचिकाकर्ता को अतिरिक्त कलेक्टर, अतिरिक्त आयुक्त और 5 अगस्त 2025 को बॉम्बे हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली थी, जिसके बाद उन्होंने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। अब इसे विस्तृत सुनवाई के लिए वृहद पीठ को सौंप दिया है। अदालत ने देश के बदलते जनसांख्यिकी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि भारत की कुल प्रजनन दर वर्ष 2003 के 3.0 से घटकर अब 1.9 रह गई है।
