
देश में मौसम की चरम घटनाएं अब चुनौती बनती जा रही हैं। सीएसई और डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट क्लाइमेट इंडिया 2026 के मुताबिक, इस साल जनवरी से सितंबर के बीच देश में 273 में से 251 दिन यानी 92 प्रतिशत दिनों में कहीं न कहीं अति विषम मौसमी घटनाएं दर्ज की गईं। इन घटनाओं में 3320 लोगों की मौत हुई, 42.5 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई, 1,28,334 मकान तबाह हुए और 47,244 पशुओं की जान गई। मौसम की मार के मामले में उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश सबसे अधिक प्रभावित रहे। दोनों राज्यों में साल के शुरुआती नौ महीनों के 64 प्रतिशत दिनों में चरम मौसमी घटनाएं दर्ज की गईं। हालांकि, मौतों के मामले में उत्तर प्रदेश 811 के आंकड़े के साथ पहले स्थान पर रहा। महाराष्ट्र में 286 और बिहार में 245 लोगों की मौत हुई। हर साल लगभग रोजाना कोई न कोई चरम मौसमी घटना हो रही है। सरकारों को केवल आपदा के बाद राहत और बचाव तक सीमित रहने के बजाय जोखिम कम करने, जल निकासी व्यवस्था मजबूत करने, जल पुनर्भरण और हरित क्षेत्रों के संरक्षण पर ध्यान देना होगा।
