- पुराने वाहनों को कबाड़ में बदलने में सरकारी विभाग भी पिछड़े
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को सडक़ों से हटाने के लिए लागू की गई स्क्रैप पॉलिसी पांच साल बाद भी रफ्तार नहीं पकड़ पाई है। प्रदेश में नीति लागू होने के बावजूद पुराने वाहनों का बेहद छोटा हिस्सा ही स्क्रैप सेंटर तक पहुंच रहा है। निजी वाहन मालिकों के साथ सरकारी विभाग भी अपने 15 साल से अधिक पुराने और कंडम वाहनों को स्क्रैप कराने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
राजधानी भोपाल में ही 15 साल से अधिक पुराने वाहनों की संख्या 3 लाख से ज्यादा है, जबकि इस साल 25 अक्टूबर तक केवल 636 चार पहिया वाहन स्क्रैप हुए हैं। यानी पुराने वाहनों की संख्या के मुकाबले स्क्रैप होने वाले वाहनों का हिस्सा बेहद कम है। पिछले साल त्योहारी सीजन में तो सिर्फ 123 चार पहिया वाहन स्क्रैप सेंटर पहुंचे थे।
पांच शहरों में पांच सेंटर, फिर भी कम पहुंच रहे वाहन
प्रदेश में वाहन स्क्रैपिंग की व्यवस्था के तहत भोपाल में दो, जबकि इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में एक-एक स्क्रैप सेंटर संचालित हो रहे हैं। स्क्रैप पॉलिसी 2021 में लागू हुई थी और राजधानी समेत प्रमुख शहरों में सेंटर शुरू होने के बाद पुराने वाहनों को स्क्रैप कराने की सुविधा उपलब्ध कराई गई। परिवहन विभाग का कहना है कि शुरुआत में लोगों में जानकारी का अभाव था, लेकिन अब जागरूकता बढ़ रही है। आरटीओ जीतेन्द्र शर्मा के अनुसार भोपाल में स्क्रैप सेंटर शुरू होने के बाद धीरे-धीरे लोगों की रुचि बढ़ी है और अब आरटीओ कार्यालय में रोजाना लोग स्क्रैप पॉलिसी की जानकारी लेने पहुंच रहे हैं।
सरकारी विभागों के 3 हजार कंडम वाहन भी इंतजार में
स्क्रैप नीति के तहत पहले चरण में सरकारी विभागों के 15 साल पुराने कंडम वाहनों को स्क्रैप करने की योजना थी। परिवहन विभाग ने इसके लिए विभागों को पत्र भी भेजे, लेकिन सरकारी प्रक्रिया और नियमों के कारण बड़ी संख्या में वाहन अब तक स्क्रैप सेंटर तक नहीं पहुंच सके हैं। राजधानी में सरकारी विभागों के पास करीब 3 हजार 15 साल पुराने कंडम वाहन बताए जा रहे हैं। इसके मुकाबले स्क्रैप हुए वाहनों की संख्या काफी कम है। यानी जिस सरकारी व्यवस्था से पुराने वाहनों को स्क्रैप कराने की शुरुआत होनी थी, वहीं प्रक्रिया भी अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी है।
छूट और सुविधाएं, फिर भी नहीं बढ़ी रफ्तार
वाहन मालिकों को स्क्रैप कराने के लिए कई तरह की रियायतें दी जा रही हैं। बीएस-1 और बीएस-2 श्रेणी के पुराने वाहनों को आरवीएसएफ में स्क्रैप कराने और सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट प्राप्त करने पर नए वाहन की खरीद में छूट का प्रावधान है। यह लाभ उसी नाम पर नया वाहन पंजीकृत कराने पर मिलता है। स्क्रैप सर्टिफिकेट को परिवार के अन्य सदस्य को ट्रांसफर करने की सुविधा भी है। इसके अलावा परिवहन विभाग बकाया टैक्स में भी 90 प्रतिशत तक की छूट दे रहा है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में वाहन मालिक पुराने वाहनों को चलाते रहने या घर में खड़ा रखने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
