- कर्मचारियों के आंदोलनों को थामने सरकार ने बनाया फॉर्मूला
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश में पिछले छह माह से अलग-अलग कर्मचारी संगठनों के आंदोलनों के बीच अब सरकार कर्मचारी असंतोष को कम करने के लिए नए फॉर्मूले पर काम कर रही है। सरकार की रणनीति केवल आंदोलनों को रोकने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि कर्मचारियों की लंबित मांगों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने, विभागों में सीधे संवाद बढ़ाने और पदोन्नति जैसी समस्याओं का समयबद्ध समाधान करने पर जोर रहेगा।
सरकारी स्तर पर कर्मचारी संगठनों के साथ बातचीत के अलावा विभागवार कर्मचारियों से सीधे फीडबैक लेने की भी तैयारी है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार यह आकलन करना चाहती है कि किन मांगों का तत्काल समाधान संभव है और किन मामलों में चरणबद्ध तरीके से निर्णय लिया जा सकता है। बेहतर कार्य करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने और पदोन्नति से जुड़े मामलों के निराकरण पर भी विचार किया जा रहा है।
छह माह में कई मुद्दों पर सडक़ पर उतरे कर्मचारी
प्रदेश में जून से अक्टूबर के बीच विभिन्न कर्मचारी वर्गों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किए हैं। स्कूल शिक्षकों का एमपी-टीईटी के विरोध में सितंबर से आंदोलन चला। भोपाल के नीलम पार्क में शिक्षकों ने करीब 10 दिन तक क्रमिक भूख हड़ताल और प्रदर्शन किया। शिक्षक टीईटी की बाध्यता खत्म करने और कर्नाटक व जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री स्तर पर समीक्षा भी हुई है। इसी दौरान अंशकालीन, चतुर्थ श्रेणी और आउटसोर्स कर्मचारियों ने न्यूनतम वेतन की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। विभिन्न सरकारी विभागों, हॉस्टलों और स्कूलों में काम करने वाले कर्मचारियों ने भोपाल में प्रदर्शन की कोशिश की। मेडिकल इंटर्न चिकित्सकों का आंदोलन भी सितंबर में चर्चा में रहा। उन्होंने मासिक स्टाइपेंड 14,337 से बढ़ाकर 30 हजार रुपये करने की मांग की थी। सरकार से बातचीत के बाद स्टाइपेंड 21,500 रुपये करने का निर्णय लिया गया और आंदोलन समाप्त हुआ। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की सहायक ग्रेड-3 पद पर पदोन्नति में सीपीसीटी की अनिवार्यता का कर्मचारी संगठनों ने विरोध किया। इसके अलावा लघु वेतन और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने 15 सूत्रीय मांगों को लेकर जून में आंदोलन किया। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने भी जून से अक्टूबर तक चरणबद्ध प्रदर्शन किए।
सरकार के सामने लंबित मांगों की लंबी सूची
कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगों में पुरानी पेंशन योजना की बहाली, केंद्र के समान महंगाई भत्ता और एरियर, आउटसोर्स व संविदा व्यवस्था को खत्म करना तथा ई-अटेंडेंस समाप्त करना शामिल है। इसके अलावा पदोन्नति और वेतन से जुड़े मुद्दे भी लगातार उठते रहे हैं। सरकार के सामने चुनौती यह है कि सभी मांगों का एक साथ समाधान संभव नहीं है। ऐसे में प्राथमिकता तय कर मांगों के निराकरण का रोडमैप तैयार किया जा सकता है।
600 अनुकंपा नियुक्तियों से संदेश
सामान्य प्रशासन विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार कर्मचारी असंतोष कम करने की दिशा में सरकार ने पहले ही कुछ कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर स्कूल शिक्षा विभाग में करीब 600 अनुकंपा नियुक्तियां की गई हैं। इसे लंबित मामलों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने सीपीसीटी परीक्षा की बाध्यता समाप्त करने और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पदोन्नति देने का आश्वासन भी दिया है। सरकार अब कर्मचारी संगठनों के साथ संवाद को बढ़ाकर उन मांगों की सूची तैयार कर सकती है, जिनका प्रशासनिक स्तर पर तत्काल समाधान संभव है। इसके बाद नीतिगत मामलों को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम होगा। इससे एक तरफ कर्मचारियों की लंबित समस्याओं को निपटाने की कोशिश होगी, वहीं लगातार सामने आ रहे आंदोलनों को कम करने का रास्ता भी तैयार किया जा सकेगा।
