गांवों को शहर और रेलवे स्टेशन से जोड़ने की तैयारी

रेलवे स्टेशन
  • 351 बसों से शुरुआत, 2031 तक 14,981 बसों का नेटवर्क

गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश में यात्री परिवहन व्यवस्था को नए सिरे से खड़ा करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत 25 सितंबर से 351 बसों के साथ इस नेटवर्क की शुरुआत होगी। सरकार का लक्ष्य अगले मार्च तक 1000 बसों का नेटवर्क तैयार करने और वर्ष 2031 तक प्रदेश में 14,981 बसों का संचालन करने का है। इस व्यवस्था के जरिए गांवों और छोटे शहरों को बड़े शहरों के साथ-साथ रेलवे स्टेशनों से जोडऩे पर फोकस रहेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी 25 सितंबर को भोपाल के भेल दशहरा मैदान से बसों को हरी झंडी दिखाएंगे। पहले चरण में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड में बस सेवा शुरू होगी। पहले चरण की 351 बसों में 120 इंटरसिटी और 231 इंट्रासिटी बसें शामिल हैं। इंटरसिटी बसें दो या अधिक शहरों के बीच चलेंगी, जबकि इंट्रासिटी बसें शहरों के भीतर यात्रियों को परिवहन सुविधा देंगी। इंदौर में 145, भोपाल में 106 और जबलपुर में 67 बसें शुरू की जाएंगी। इसके अलावा रीवा में 18, देवास में 10, कटनी में 3 और भिंड में 2 इंटरसिटी बसें संचालित होंगी।
गांव से रेलवे स्टेशन तक कनेक्टिविटी
योजना का एक प्रमुख उद्देश्य गांवों और शहरों को रेलवे स्टेशनों से जोडऩा है। इससे यात्रियों को बड़े शहरों की रेल यात्रा के लिए नजदीकी स्टेशन तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी। इसके बाद पीपीपी मॉडल पर सात आधुनिक बस टर्मिनल विकसित करने की भी योजना है। सरकार के अनुसार वर्ष 2031 तक 14,981 बसों के नेटवर्क में इंटरसिटी, इंट्रासिटी और पीएम ई-बसें शामिल होंगी। इस नेटवर्क से प्रतिदिन 30 लाख से अधिक यात्रियों को परिवहन सुविधा देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ 180 से अधिक बस स्टैंड, टर्मिनल और डिपो के कायाकल्प की योजना है।
बसें निजी ऑपरेटर चलाएंगे, निगरानी सरकार की
इस योजना में सरकार स्वयं बसों की खरीद नहीं करेगी। बसों का संचालन निजी ऑपरेटरों के माध्यम से कराया जाएगा, जबकि रूट निर्धारण, सुरक्षा और सेवा की निगरानी सरकार के स्तर से की जाएगी। इलेक्ट्रिक बसों को प्राथमिकता दी जाएगी और पुरानी बसों को भी नेटवर्क में शामिल कर बाद में चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बसों में बदले जाने की योजना है।
सात कैमरे, पैनिक बटन और लाइव ट्रैकिंग
यात्री सुरक्षा के लिए बसों में सात सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन और रियल टाइम व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम लगाया जा रहा है। पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम, ड्राइवरों की तकनीकी ट्रेनिंग और त्वरित शिकायत निवारण व्यवस्था भी इसका हिस्सा होगी। बसों के संचालन की निगरानी इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम से की जाएगी। इसके लिए मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और उसकी सात सहायक कंपनियों में कमांड कंट्रोल सेंटर स्थापित किए गए हैं। यहां से बसों की लोकेशन, समयबद्धता और संचालन की रियल टाइम निगरानी की जाएगी। नई परिवहन व्यवस्था के विस्तार से बस संचालन के अलावा इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, वाहन निर्माण और तकनीकी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में निवेश और रोजगार के अवसर बढऩेे की उम्मीद जताई गई है।

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