अब विधानसभा में सवाल पूछने के लिए नहीं लगाने होंगे चक्कर

  • 7 दिसंबर से शुरू होने वाले शीतकालीन सत्र में पहली बार लागू होगी नेवा व्यवस्था
  • विधायकों को मिलेगी हर सवाल की डिजिटल कुंडली, मंजूरी से खारिज होने तक रियल टाइम में दिखेगा स्टेटस
    गौरव चौहान

    विधानसभा में सवाल लगाने से लेकर उसके जवाब का इंतजार करने तक की पूरी प्रक्रिया अब बदलने जा रही है। विधायकों को अपने सवालों की स्थिति जानने के लिए विधानसभा सचिवालय की शाखाओं के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। वे टैबलेट से सवाल भेज सकेंगे और यह भी देख सकेंगे कि उनका सवाल मंजूर हुआ, खारिज हुआ या अभी विचाराधीन है। मध्यप्रदेश विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र से नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) के जरिए पूरी कार्यवाही पेपरलेस करने की तैयारी है। इसके साथ ही विधायकों और सरकारी विभागों के बीच सवाल-जवाब की प्रक्रिया भी डिजिटल हो जाएगी।
    अब तक सवाल और सूचनाएं भेजने के बाद उनकी स्थिति जानने के लिए विधायकों को सचिवालय से संपर्क करना पड़ता था। नई व्यवस्था में सवाल भेजते ही उसकी डिजिटल एंट्री होगी और डायरी नंबर भी ऑनलाइन मिल जाएगा। यानी सवाल की शुरुआत से लेकर जवाब मिलने तक हर चरण का रिकॉर्ड विधायक के टैबलेट पर उपलब्ध रहेगा। इससे न केवल कागजी प्रक्रिया कम होगी, बल्कि सवालों के निपटारे की निगरानी भी आसान होगी।
    सवाल भेजते ही बनेगी डिजिटल कुंडली
    विधायक अपने टैबलेट में नेवा एप या आधिकारिक पोर्टल पर व्यक्तिगत यूजर आईडी और पासवर्ड से लॉगिन करेंगे। इसके बाद डैशबोर्ड पर उनकी प्रोफाइल और डिजिटल गतिविधियों की जानकारी मिलेगी। विधायक तारांकित, अतारांकित प्रश्न, शून्यकाल, ध्यानाकर्षण, स्थगन प्रस्ताव, अशासकीय संकल्प और याचिकाएं ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। सवाल को पहले ड्राफ्ट के रूप में सुरक्षित रखने की सुविधा होगी। सचिवालय को भेजने से पहले उसमें संशोधन भी किया जा सकेगा।
    डायरी नंबर से लेकर जवाब तक ऑनलाइन ट्रैकिंग
    विधायक के सेंड विकल्प दबाते ही सवाल विधानसभा सचिवालय के सर्वर पर पहुंच जाएगा। सिस्टम तत्काल आधिकारिक डायरी नंबर जारी करेगा। सवाल भेजने की तारीख और समय भी दर्ज होगा। उसकी पीडीएफ प्रति तैयार होगी, जिसे विधायक डाउनलोड या प्रिंट कर सकेंगे। इसके बाद सवाल की मंजूरी, अस्वीकृति, विचाराधीन स्थिति और जवाब जारी होने की जानकारी भी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी।
    नोटिस की सीमा पार की तो सिस्टम नहीं मानेगा
    नई व्यवस्था में विधायकों के लिए सवाल और नोटिस भेजने की निर्धारित सीमा भी डिजिटल डैशबोर्ड पर दिखाई देगी। विधायक देख सकेंगे कि कितने नोटिस इस्तेमाल कर चुके हैं और कितने बाकी हैं। निर्धारित सीमा पूरी होते ही सिस्टम अतिरिक्त नोटिस स्वीकार नहीं करेगा। इससे नियमों के पालन की निगरानी स्वत: होगी।
    अब विभागों को भी फाइल नहीं, पोर्टल पर देना होगा जवाब
    नेवा व्यवस्था में सरकारी विभागों के नोडल अधिकारियों को भी सवालों के जवाब ऑनलाइन अपलोड करने होंगे। इससे विधानसभा सचिवालय और विभागों के बीच कागजी फाइलों की आवाजाही घटेगी। जवाब भेजने और उसकी स्थिति जानने की प्रक्रिया भी ऑनलाइन होगी। इससे जवाबों में देरी और लंबित मामलों की निगरानी करना आसान हो सकेगा।
    पांच दिन का सत्र, दूसरे अनुपूरक बजट पर रहेगी नजर
    16वीं विधानसभा का 12वां शीतकालीन सत्र 7 से 11 दिसंबर तक चलेगा। पांच दिवसीय सत्र में अवकाश नहीं रहेगा। सरकार इस दौरान दूसरा अनुपूरक बजट और महत्वपूर्ण विधेयक पेश करेगी। पहले चार दिन प्रश्नोत्तर और शासकीय कार्य होंगे, जबकि अंतिम दिन दोपहर 1.30 बजे के बाद अशासकीय कार्य लिए जाएंगे। इस बार सदन की कार्यवाही के साथ विधायकों के कामकाज का तरीका भी डिजिटल बदलाव का गवाह बनेगा।

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