भर्ती के लिए आयोग-मंडल पर निर्भरता घटेगी

  • विभागों को एजेंसी चुनने की छूट

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश में बड़ी संख्या में खाली पदों को जल्द भरने के लिए सरकार भर्ती प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत करने की तैयारी में है। अब हर भर्ती के लिए राज्य लोक सेवा आयोग या कर्मचारी चयन मंडल पर निर्भरता जरूरी नहीं होगी। जिन विभागों के पास बड़ी संख्या में रिक्तियां हैं, वे जरूरत के अनुसार विभागीय स्तर पर भर्ती कर सकेंगे या किसी दूसरी सरकारी एजेंसी से चयन प्रक्रिया कराने की अनुमति ले सकेंगे।
इस बदलाव की जरूरत इसलिए महसूस की जा रही है क्योंकि राज्य की मौजूदा भर्ती एजेंसियों के पास पहले से बड़ी संख्या में परीक्षाओं और चयन प्रक्रियाओं का दबाव है। इसके चलते कई भर्तियों में लंबा समय लग रहा है। सरकार का फोकस अब रिक्त पदों को समयबद्ध तरीके से भरने पर है।
चार महीने में इंजीनियर भर्ती का प्रस्ताव
नगरीय विकास एवं आवास विभाग को करीब 375 इंजीनियरों की भर्ती करनी है। विभाग ने कर्मचारी चयन मंडल से संपर्क किया तो करीब दो साल तक समय उपलब्ध नहीं होने की जानकारी मिली। इसके बाद विभाग ने भारत सरकार की एजेंसी एजुकेशन कंसल्टेंट इंडिया लिमिटेड से संपर्क किया है। एजेंसी ने करीब चार महीने में चयन प्रक्रिया पूरी करने की बात कही है।
ऊर्जा विभाग खुद कर रहा छह हजार पदों की भर्ती
ऊर्जा विभाग ने करीब छह हजार संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए विभागीय स्तर पर परीक्षा कराने का निर्णय लिया है। विभाग अक्टूबर 2026 तक प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इससे पहले विभाग करीब 4300 पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी कर चुका है।
डॉक्टरों की भर्ती में हर महीने खुलेगा मौका
स्वास्थ्य विभाग को विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पद भरने के लिए एक बार की विशेष छूट दी गई है। अब विभागीय स्तर पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया होगी। हर महीने की पहली तारीख को एमपी ऑनलाइन पोर्टल पर रिक्तियां प्रदर्शित की जाएंगी। अभ्यर्थी 15 तारीख तक आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद पात्र उम्मीदवारों को उसी महीने के दूसरे बुधवार को साक्षात्कार के लिए बुलाने और पात्र पाए जाने पर नियुक्ति देने की व्यवस्था प्रस्तावित है।
पुलिस भी अपना भर्ती बोर्ड बनाने की तैयारी में
पुलिस मुख्यालय भी भर्ती प्रक्रिया को तेज करने के लिए अपना भर्ती बोर्ड बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसका उद्देश्य चयन प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करना है। इस बदलाव से भर्ती व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव यह होगा कि हर पद के लिए एक ही चयन एजेंसी पर निर्भरता कम होगी। विभाग अपनी जरूरत, पदों की संख्या और समयसीमा के हिसाब से विभागीय भर्ती या दूसरी सक्षम एजेंसी के जरिए चयन प्रक्रिया कराने का विकल्प चुन सकेंगे।

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