सेवा संकल्प अभियान बनेगा संगठन की छंटनी का आधार

सेवा संकल्प अभियान
  • नेताओं के करीबियों पर गिरेगी गाज

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश भाजपा में अब संगठन के भीतर सक्रियता और निष्ठा का नया पैमाना तय करने की तैयारी है। सेवा संकल्प अभियान के दौरान पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की सक्रियता पर नजर रखी जा रही है। अभियान के बाद प्रदेश संगठन ऐसे पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की समीक्षा करेगा, जिनकी पहचान संगठन के बजाय किसी वरिष्ठ नेता के करीबी के तौर पर बनी हुई है। निष्क्रियता या संगठनात्मक कार्यक्रमों से दूरी सामने आने पर इनकी जगह जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने की तैयारी है।
पार्टी के भीतर लंबे समय से यह शिकायत सामने आती रही है कि कुछ पदाधिकारी संगठन के कार्यक्रमों में तभी सक्रिय होते हैं, जब उनके संरक्षक नेता मौजूद हों। ऐसे कार्यकर्ताओं के बारे में संगठन को यह भी फीडबैक मिला है कि वे पार्टी के आधिकारिक निर्देशों के बजाय अपने राजनीतिक आकाओं की प्राथमिकताओं के अनुसार काम करते हैं। इससे संगठन के फैसलों को जमीन पर लागू करने में दिक्कत आती है।
अभियान के बाद होगी पदाधिकारियों की समीक्षा
प्रदेश संगठन सेवा संकल्प अभियान को सिर्फ जनसंपर्क और संगठनात्मक गतिविधि तक सीमित नहीं रख रहा है। अभियान के दौरान जिलों और मंडलों में पदाधिकारियों की सक्रियता भी देखी जा रही है। इसके आधार पर वरिष्ठ नेताओं के साथ भोपाल में समीक्षा बैठक प्रस्तावित है। इसमें ऐसे पदाधिकारियों की सूची पर चर्चा हो सकती है, जिनकी संगठन के प्रति सक्रियता अपेक्षाकृत कम रही है। पार्टी का फोकस अब व्यक्ति विशेष के प्रभाव से ज्यादा संगठन की संरचना को मजबूत करने पर है। इसके तहत भविष्य में जिम्मेदारियों के लिए सक्रियता, संगठनात्मक भागीदारी और जमीनी पकड़ को प्राथमिक आधार बनाने की तैयारी है।
निगम-मंडल की नियुक्तियों में भी बदलेगा फॉर्मूला
संगठन के इस बदलाव का असर सरकारी राजनीतिक नियुक्तियों पर भी पड़ सकता है। प्रदेश में अभी भी एक दर्जन से अधिक निगम-मंडल, आयोग और प्राधिकरणों में नियुक्तियां होना बाकी हैं। पार्टी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इन पदों पर केवल किसी वरिष्ठ नेता की सिफारिश के बजाय कार्यकर्ता की सक्रियता, संगठन में योगदान और छवि को महत्व देने पर जोर है।
मंत्रियों के स्टाफ पर भी नजर
सरकार में मंत्रियों के निजी स्टाफ में पदस्थ उन लोगों की भूमिका की भी समीक्षा की जा सकती है, जिनकी नियुक्ति किसी प्रभावशाली नेता की सिफारिश से हुई है। संगठन के स्तर पर यह कोशिश बताई जा रही है कि कार्यकर्ताओं और आम लोगों की पहुंच सीधे मंत्री और संगठन तक हो, न कि कुछ चुनिंदा लोगों के माध्यम से।
करीबी से ज्यादा कार्यकर्ता को तवज्जो
भाजपा संगठन की इस कवायद का सबसे बड़ा असर उन पदाधिकारियों पर पड़ सकता है, जो किसी वरिष्ठ नेता के करीबी होने के कारण संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका तक पहुंचे हैं। पार्टी नेतृत्व जमीनी और पुराने कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। संवाद जैसी पहल को भी इसी दिशा में देखा जा रहा है, जिसमें कार्यकर्ताओं को सीधे मंत्रियों और वरिष्ठ पदाधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाने का अवसर दिया जा रहा है। कुल मिलाकर, सेवा संकल्प अभियान के बाद भाजपा में संगठनात्मक फेरबदल की जमीन तैयार हो सकती है। इसमें नेताओं की व्यक्तिगत पसंद के बजाय संगठनात्मक सक्रियता को जिम्मेदारी का आधार बनाने पर जोर रहेगा।

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