
- एआई पर सरकारी फाइल डाली तो एक्शन, 30 दिन में बतानी होगी सोशल मीडिया कमाई
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र के डीजीपी कैलाश मकवाणा ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर 24 बिंदुओं वाली गाइडलाइन जारी की है। इसमें फेसबुक, वाट्सएप, एक्स, इंस्टाग्राम और यू-ट्यूब समेत अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर पोस्ट, कमेंट, फोटो, वीडियो व दस्तावेज साझा करने के नियम तय किए हैं। पुलिसकर्मी सरकारी या निजी सोशल मीडिया अकाउंट से शासन के निर्णयों और नीतियों की आलोचना नहीं करेंगे। वरिष्ठ अधिकारियों या सहकर्मियों के खिलाफ सार्वजनिक रूप से अपमानजनक या गरिमा प्रभावित करने वाली टिप्पणी करने से भी बचना होगा। ऐसी सामग्री पोस्ट नहीं करने को कहा है, जिससे विभाग में मतभेद हो । वहीं ऐसे शासकीय दस्तावेज जिन्हें सार्वजनिक करना नियमों के खिलाफ है, उन्हें स्कैन, स्क्रीनशॉट या किसी अन्य तरीके से सोशल मीडिया पर साझा नहीं किया जा सकेगा।
जांच और कोर्ट केस की जानकारी साझा करने पर रोक
किसी अपराध की जांच या विवेचना चल रही हो अथवा मामला न्यायालय में लंबित हो, तो उससे जुड़ी ऐसी जानकारी सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं की जाएगी, जिससे जांच या अभियोजन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। पुलिस कार्रवाई में जब्त सामग्री या हथियारों की बिना सील की गई फोटो और वीडियो भी सरकारी या निजी सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट नहीं की जा सकेगी। व्यक्तिगत सोशल मीडिया अकाउंट बनाने या चलाने के लिए शासकीय सीयूजी सिम, इंटरनेट, वाई-फाई या सरकारी ई-मेल आईडी का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। पुलिस के सोशल मीडिया लॉगिन क्रेडेंशियल व्यक्तिगत मोबाइल फोन पर साझा न करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
महिला-बाल पीडि़तों की पहचान उजागर नहीं होगी
पॉस्को या अन्य मामलों में पीडि़त महिला, बालिका या किशोर की पहचान बताने वाली फोटो, वीडियो या अन्य सामग्री साझा नहीं की जाएगी। इसका उद्देश्य पीडि़तों की निजता और पहचान की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। वहीं पुलिस विभाग की उपलब्धियों को किसी एक अधिकारी की व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में पेश करने के बजाय पुलिस बल की उपलब्धि के तौर पर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
राजनीतिक प्रतीकों की पहचान के इस्तेमाल पर भी नियम
पुलिसकर्मी अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल या डीपी में राजनीतिक विरोध अथवा किसी राजनीतिक दल या संगठन के समर्थन से जुड़े प्रतीक, पोस्टर या चिन्ह इस्तेमाल नहीं करेंगे। अपने निजी अकाउंट पर ऐसे संकेत या विवरण भी नहीं लगाए जा सकेंगे, जिससे वह आधिकारिक पुलिस अकाउंट जैसा लगे। सरकारी सोशल मीडिया अकाउंट से बिना अधिकृत अनुमति पोस्ट करने की भी मनाही है।
ऑपरेशन और हथियार प्रशिक्षण की लाइव स्ट्रीमिंग पर रोक
दबिश, संवेदनशील ड्यूटी, वीआईपी सुरक्षा, हथियार प्रशिक्षण और फायरिंग प्रैक्टिस से जुड़ी लाइव स्ट्रीमिंग, फोटो-वीडियो बनाने और जियो टैगिंग पर भी रोक लगाई गई है। गाइडलाइन का मकसद पुलिस से जुड़ी संवेदनशील जानकारी को सार्वजनिक होने से रोकना और सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मियों की गतिविधियों के लिए स्पष्ट नियम तय करना है।
