
- भोपाल में सरकारी स्कूलों के ऑडिट की सीजेपी की बैठक में हंगामा
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। सीजेपी की अभियान कोऑर्डिनेटर ने बताया कि ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति का नागरिक स्तर पर सर्वे किया जाएगा। उनका कहना है कि ग्रामीण और आदिवासी इलाकों के कई स्कूलों तक अधिकारियों की नियमित पहुंच नहीं हो पाती। ऐसे में स्थानीय लोगों की मदद से स्कूलों की वास्तविक स्थिति का डेटा तैयार करने की योजना है। ऑडिट के दौरान स्कूलों में पेयजल, शौचालय, बिजली, कक्षाओं की स्थिति, शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात और बच्चों की उपस्थिति जैसी व्यवस्थाओं की जानकारी जुटाई जाएगी। पाठ्यपुस्तक, यूनिफॉर्म, छात्रवृत्ति और मिड-डे मील की स्थिति भी देखी जाएगी। इसके अलावा स्कूल भवन की सुरक्षा, फस्र्ट-एड, अग्निशामक यंत्र, दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सुविधाएं, पुस्तकालय और कंप्यूटर जैसी सुविधाओं को भी सर्वे में शामिल किया जाएगा। सरकारी स्कूलों की स्थिति का नागरिक स्तर पर ऑडिट करने को लेकर भोपाल के गांधी भवन में रविवार शाम आयोजित सीजेपी की बैठक में उस समय विवाद की स्थिति बन गई, जब कुछ छात्र और युवा बैठक में पहुंच गए। युवाओं ने अभियान के उद्देश्य और स्कूलों के ऑडिट से जुड़े सवाल प्रतिनिधियों के सामने रखे। बातचीत के दौरान मामला गरम हो गया और कुछ युवाओं ने नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति बिगडऩे की सूचना मिलने पर पुलिस गांधी भवन पहुंची। पुलिसकर्मियों ने युवाओं से बातचीत कर उन्हें शांत कराया। इसके बाद वे वहां से चले गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बैठक चल रही थी, तभी युवाओं का एक समूह अंदर पहुंचा। इनमें कुछ युवक काली टी-शर्ट पहने हुए थे। उन्होंने सीजेपी के प्रतिनिधियों से सरकारी स्कूलों के प्रस्तावित ऑडिट को लेकर जानकारी मांगी। इसके साथ ही दिल्ली में हुए पूर्व प्रदर्शनों और संगठन की गतिविधियों से जुड़े सवाल भी किए गए। छात्र अंश पुरोहित ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल या समुदाय का विरोध करना नहीं था। उनका कहना था कि वे पुलिस और सेना का सम्मान करते हैं और हिंसा के पक्ष में नहीं हैं।
माइक को लेकर भी हुआ विवाद
हंगामे के दौरान युवाओं ने आरोप लगाया कि उनसे माइक लेने की कोशिश की गई। अंश पुरोहित के अनुसार, ऐसा एक से अधिक बार हुआ। इसके बाद वहां मौजूद कुछ छात्र भावुक हो गए और नारेबाजी शुरू हो गई। सीजेपी की एक महिला प्रतिनिधि ने युवाओं को शांत कराने और उनकी बात सुनने की कोशिश की। उन्होंने छात्रों से पहले पूरी चर्चा सुनने को कहा। इस पर छात्रों ने कहा कि यदि उन्हें अपनी बात रखने का मौका नहीं मिलेगा तो वे सवाल कैसे पूछ पाएंगे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी रही।
बातचीत के दौरान लगे नारे
छात्रों का कहना था कि वे बैठक में विरोध करने के इरादे से नहीं आए थे। उनका दावा था कि वे अभियान के बारे में जानना और अपनी शंकाओं के जवाब लेना चाहते थे। अंश पुरोहित के मुताबिक, दिल्ली में पहले हुए विवादों को देखते हुए भोपाल में अभियान के दौरान ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए क्या व्यवस्था की गई है, यह जानना जरूरी है। युवाओं ने अभियान की कुछ गतिविधियों पर भी सवाल उठाए और सीजेपी से इसके उद्देश्य को स्पष्ट करने की मांग की। बातचीत के दौरान विवाद बढऩे पर ‘यह दिल्ली नहीं, भोपाल है’, ‘कॉकरोच पार्टी मुर्दाबाद’ और ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ जैसे नारे लगाए गए।
