ओरछा में भाजपा बनाएगी… अगले डेढ़ दशक की रणनीति

  • प्रदेश कार्यसमिति में संगठन विस्तार से लेकर बूथ सशक्तीकरण तक मंथन
  • सरकार की योजनाओं को वोटर तक पहुंचाने पर रहेगा फोकस
  • गौरव चौहान
भाजपा

ऐतिहासिक नगरी ओरछा में 30 और 31 अगस्त को होने वाली भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक को महज संगठनात्मक बैठक के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। 14 साल बाद ओरछा में जुट रहा भाजपा का प्रदेश नेतृत्व संगठन की मौजूदा स्थिति की समीक्षा के साथ आने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी, बूथ स्तर पर पकड़ मजबूत करने और सरकार की योजनाओं को जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की रणनीति पर मंथन करेगा। प्रदेश कार्यसमिति में करीब 350 प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। इनमें प्रदेश कार्यसमिति के 106 सदस्य, संभाग प्रभारी, जिला अध्यक्ष, जिला प्रभारी, मोर्चा अध्यक्ष और पार्टी के अन्य पदाधिकारी शामिल रहेंगे। बैठक के जरिए भाजपा प्रदेश संगठन अगले चरण की राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियों की प्राथमिकताएं तय करेगा।
भाजपा के सामने सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और संगठन की ताकत को बूथ स्तर तक जोडऩे की चुनौती है। ऐसे में कार्यसमिति में इस बात पर जोर रहेगा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और पार्टी कार्यकर्ता उसकी जानकारी जनता तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। बैठक में बूथ सशक्तीकरण, संगठन विस्तार, प्रशिक्षण और आगामी संगठनात्मक कार्यक्रमों को लेकर रणनीति तैयार की जाएगी। यानी पार्टी का फोकस केवल प्रदेश स्तर के संगठन को मजबूत करने पर नहीं, बल्कि मंडल और बूथ स्तर तक सक्रिय नेटवर्क तैयार करने पर रहेगा।
2028 के लिए अभी से संगठन की मशीनरी तैयार करने का संकेत
मध्य प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव 2028 में होना है। ऐसे में प्रदेश कार्यसमिति को चुनावी तैयारी की शुरुआती रणनीति तय करने वाले मंच के रूप में भी देखा जा रहा है। भाजपा संगठन के सामने अगले दो वर्षों में कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने, नए मतदाताओं और युवाओं तक पहुंच बढ़ाने तथा सरकार के कामकाज को जनसंपर्क के जरिए लगातार जनता के बीच ले जाने की चुनौती होगी। दूसरे दिन होने वाली कार्यशाला में सेवा संकल्प अभियान के साथ संगठनात्मक कार्यक्रमों, बूथ सशक्तीकरण और विस्तार पर चर्चा इसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी की कोशिश होगी कि चुनावी तैयारियां अंतिम समय में शुरू करने के बजाय संगठन को लगातार सक्रिय रखा जाए।
2047 का विजन भी एजेंडे में
कार्यसमिति का एजेंडा केवल तत्काल राजनीतिक रणनीति तक सीमित नहीं रहेगा। पहले दिन ‘विकसित भारत 2047’ को लेकर भी विचार-विमर्श होगा। इसके जरिए भाजपा अपने दीर्घकालीन राजनीतिक और वैचारिक एजेंडे को संगठन के निचले स्तर तक ले जाने की कोशिश करेगी। राजनीतिक प्रस्ताव पर चर्चा के साथ समरसता और विकसित भारत के संकल्प को जोडऩा भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व कार्यकर्ताओं के जरिए इन मुद्दों को समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंचाने पर जोर दे सकता है।
ओरछा से संगठन को मिलेगा राजनीतिक संदेश
14 साल बाद प्रदेश कार्यसमिति के लिए ओरछा का चयन भी अपने आप में महत्वपूर्ण है। रामराजा सरकार की नगरी में होने वाली बैठक के दौरान राष्ट्रीय और प्रदेश नेतृत्व की मौजूदगी में पार्टी कार्यकर्ताओं को वैचारिक और संगठनात्मक संदेश दिया जाएगा। शनिवार को प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे ने ओरछा पहुंचकर स्थानीय पदाधिकारियों के साथ तैयारियों की समीक्षा की। खंडेलवाल ने कार्यकर्ताओं से पद से ऊपर संगठन और कार्यकर्ता की भावना को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने बाहर से आने वाले प्रतिनिधियों की बेहतर मेहमाननवाजी और व्यवस्थाओं को यादगार बनाने के निर्देश भी दिए।
राष्ट्रीय नेतृत्व से मिलेगा चुनावी रोडमैप का संकेत
बैठक में राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल सहित वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया, वीरेंद्र कुमार, दुर्गादास उईके और सावित्री ठाकुर समेत कई नेता भी बैठक में शामिल होंगे। उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लालसिंह आर्य, राष्ट्रीय महासचिव गजेंद्र पटेल, केंद्रीय कार्यालय प्रभारी तरुण चुघ, राष्ट्रीय प्रकोष्ठ संयोजक विष्णुदत्त शर्मा और राष्ट्रीय मंत्री कविता पाटीदार समेत पार्टी और सरकार के वरिष्ठ पदाधिकारी भी बैठक में भाग लेंगे। ऐसे में ओरछा की दो दिवसीय बैठक का असली फोकस आज के संगठन की समीक्षा से ज्यादा आने वाले वर्षों के संगठन की दिशा तय करना होगा। बूथ से लेकर प्रदेश संगठन तक सक्रियता बढ़ाने, सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने और 2028 की चुनावी जमीन तैयार करने के साथ भाजपा अपने ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को भी संगठनात्मक एजेंडे में पिरोने की कोशिश करेगी।

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