- बूथ से लेकर सोशल मीडिया तक युवाओं को साधने पर जोर
- गौरव चौहान

मध्यप्रदेश में 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा ने अब युवा वोटरों, खासकर जेन-जी, को अपने राजनीतिक एजेंडे के केंद्र में लाने की रणनीति पर मंथन शुरू कर दिया है। रामराजा की नगरी ओरछा में रविवार से शुरू हुई प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत करने के साथ युवाओं से लगातार संवाद बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। करीब 350 नेताओं की मौजूदगी में चल रही बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और केंद्रीय मंत्रियों सहित पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक का फोकस साफ तौर पर 2028 की चुनावी जमीन तैयार करने और बदलती युवा राजनीति को समझने पर दिखाई दिया।
बैठक में दिल्ली में हुए जेन-जी आंदोलन के बाद युवा वर्ग की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता पर चर्चा हुई। नेताओं ने माना कि युवा अब केवल पारंपरिक राजनीतिक भाषणों से प्रभावित होने वाला वर्ग नहीं है। ऐसे में संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर इस वर्ग के साथ सीधा संवाद बढ़ाने की जरूरत है। पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि युवाओं की समस्याओं और अपेक्षाओं को गंभीरता से समझना होगा। साथ ही विपक्ष द्वारा युवाओं को सरकार और भाजपा के खिलाफ प्रभावित या गुमराह करने की कोशिशों का राजनीतिक स्तर पर जवाब देना होगा। यानी भाजपा की रणनीति अब केवल युवा मोर्चा तक सीमित रखने के बजाय जेन-जी को व्यापक संगठनात्मक और चुनावी रणनीति से जोडऩे की दिखाई दे रही है।
रोजगार और विकास को बनाया जाएगा बड़ा नैरेटिव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैठक में आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य पर सरकार की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य को आत्मनिर्भर बनाने के लिए किसान और युवाओं का विकास जरूरी है। गरीबों और महिलाओं के सशक्तीकरण के साथ औद्योगिक विकास पर भी सरकार का जोर है। मुख्यमंत्री ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के जरिए प्रदेश में आए निवेश का उल्लेख करते हुए कहा कि औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। भाजपा के लिए यह मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि 2028 में पहली बार बड़ी संख्या में ऐसे युवा मतदाता प्रभावी होंगे, जिनकी राजनीतिक पसंद रोजगार, शिक्षा, अवसर, तकनीक और भविष्य की आर्थिक संभावनाओं जैसे मुद्दों से तय हो सकती है।
केन-बेतवा पर कांग्रेस को घेरा
कार्यसमिति में बुंदेलखंड और केन-बेतवा लिंक परियोजना भी राजनीतिक बहस के केंद्र में रही। भाजपा नेताओं ने परियोजना को बुंदेलखंड के विकास के लिए बड़ी उपलब्धि बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। नेताओं का आरोप रहा कि कांग्रेस ने केन-बेतवा परियोजना को लेकर जनता में भ्रम फैलाया और इसे असंभव बताती रही। भाजपा नेताओं ने कहा कि अब परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होने के बाद भी कांग्रेस इसके खिलाफ भ्रम फैलाने का काम कर रही है। भाजपा ने राजनीतिक प्रस्ताव में बुंदेलखंड के विकास, किसान हित, गरीब कल्याण, महिला सशक्तीकरण और औद्योगिक विस्तार को प्रमुखता दी।
अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग पर भाजपा का रुख साफ
कार्यसमिति के दौरान अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर भी पार्टी ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया। प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी ने कहा कि भाजपा बुंदेलखंड के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है और अलग बुंदेलखंड राज्य बनाने का कोई सवाल नहीं है। इससे भाजपा ने एक तरफ क्षेत्रीय अस्मिता और विकास के मुद्दे को राजनीतिक रूप से साधने की कोशिश की, वहीं अलग राज्य की मांग से खुद को दूर रखने का स्पष्ट संदेश भी दिया।
14 साल बाद फिर ओरछा में जुटी भाजपा
ओरछा में करीब 14 साल बाद प्रदेश भाजपा की कार्यसमिति आयोजित हो रही है। इससे पहले यहां कार्यसमिति का आयोजन उस समय हुआ था, जब स्वर्गीय प्रभात झा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री थे। मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में यह पहली प्रदेश कार्यसमिति है। इसलिए संगठनात्मक स्तर पर भी बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मन की बात’ भी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सुनी।
‘रामराज्य’ के साथ 2028 का रोडमैप
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ओरछा में भगवान श्रीराम राजा भी हैं और आराध्य भी। रामराज्य की स्थापना भाजपा का मूल लक्ष्य है और संगठन इसी दिशा में काम कर रहा है। हालांकि बैठक का धार्मिक-सांस्कृतिक संदर्भ अपनी जगह है, लेकिन राजनीतिक संदेश इससे आगे का है। भाजपा अब 2028 की लड़ाई के लिए संगठन, युवा वोटर, विकास और क्षेत्रीय मुद्दों को एक साथ साधने की कोशिश कर रही है। ओरछा की कार्यसमिति में जेन-जी पर हुआ मंथन इसी बदलती चुनावी रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
