
- नई टीम, नया फॉर्मूला: विधायक और जिला अध्यक्षों को दोहरी जिम्मेदारी से मिल सकती है मुक्ति
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश कांग्रेस संगठन में अगले कुछ महीनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। वर्ष 2028 के विधानसभा और 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश कांग्रेस की मौजूदा कार्यकारिणी को भंग कर नए सिरे से संगठन खड़ा करने की तैयारी है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में बनने वाली नई टीम में पुराने चेहरों की जगह सक्रिय, जमीनी और संगठन में समय देने वाले नेताओं को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार नई कार्यकारिणी का गठन अगले दो-तीन माह में पूरा करने का लक्ष्य है। वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी में करीब 253 पदाधिकारी हैं। नई टीम में यह संख्या लगभग 125 तक सीमित करने की तैयारी है। यानी संगठन को बड़ा करने के बजाय अब छोटा, सक्रिय और जिम्मेदार बनाने पर जोर रहेगा।
नई कार्यकारिणी के गठन में कांग्रेस का सबसे बड़ा बदलाव संगठनात्मक भूमिका को लेकर माना जा रहा है। पार्टी ऐसे नेताओं को प्रदेश संगठन में जिम्मेदारी देना चाहती है, जो स्वयं चुनाव लडऩे की तैयारी के बजाय संगठन को मजबूत करने और प्रत्याशियों को चुनाव लड़ाने की भूमिका निभा सकें। इसके लिए क्षेत्रीय और जातीय संतुलन के साथ-साथ नेताओं की सक्रियता को भी प्रमुख आधार बनाया जाएगा। वरिष्ठ नेताओं के समर्थकों को केवल राजनीतिक संतुलन साधने के लिए पद देने के बजाय उनकी उपयोगिता और संगठन के प्रति सक्रियता को प्राथमिकता देने की रणनीति अपनाई जा सकती है। इसका सीधा असर उन नेताओं पर पड़ सकता है, जो पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव जैसे वरिष्ठ नेताओं के करीबी माने जाते हैं और स्वयं आगामी चुनावों में टिकट की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे नेताओं को प्रदेश संगठन की जिम्मेदारी से मुक्त कर चुनावी मैदान में लगाया जा सकता है।
253 तक कैसे पहुंची कार्यकारिणी?
वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद पार्टी नेतृत्व ने संगठन में बदलाव की प्रक्रिया शुरू की थी। राहुल गांधी की पसंद के आधार पर जीतू पटवारी को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद जब नई टीम तैयार हुई तो उसमें कमल नाथ, दिग्विजय सिंह, अजय सिंह और अरुण यादव खेमे के समर्थकों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलने की शिकायत सामने आई। संगठन में संतुलन बनाने के प्रयास में कार्यकारिणी का आकार लगातार बढ़ता गया। करीब 150 सदस्यों से शुरू हुई कार्यकारिणी बढकऱ 253 पदाधिकारियों तक पहुंच गई। सचिव और सह सचिव जैसे पदों के माध्यम से विभिन्न नेताओं के समर्थकों को समायोजित किया गया। हालांकि, संख्या बढऩे के बावजूद संगठनात्मक गतिविधियों में अपेक्षित तेजी नहीं आ सकी। अब पार्टी नेतृत्व इसी अनुभव के आधार पर नई कार्यकारिणी को छोटा और अधिक सक्रिय रखने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
दिल्ली की समीक्षा बैठक के बाद बदला संगठन का फार्मूला
कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल द्वारा मध्य प्रदेश में संगठन सृजन की समीक्षा के बाद संगठन को नए सिरे से तैयार करने का निर्णय लिया गया। इसके तहत विभागों और प्रकोष्ठों के पुनर्गठन के साथ प्रदेश कार्यकारिणी को भी भंग कर नई टीम बनाने की तैयारी है। पार्टी नेतृत्व का संदेश साफ है कि संगठन में पद केवल राजनीतिक संतुलन के लिए नहीं बल्कि सक्रिय भूमिका निभाने वाले नेताओं को दिया जाएगा। बड़े नाम या वरिष्ठ नेता से अधिक महत्व संगठन को समय देने और जमीनी स्तर पर काम करने की क्षमता को दिया जाएगा।
नई कार्यकारिणी में दोहरी जिम्मेदारी निभाने वाले नेताओं की भूमिका भी तय की जाएगी। वर्तमान में कई नेता प्रदेश पदाधिकारी होने के साथ-साथ जिला कांग्रेस अध्यक्ष या अन्य संगठनात्मक पदों पर हैं। विधायक जयवर्धन सिंह प्रदेश उपाध्यक्ष के साथ गुना जिला कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसी तरह पूर्व विधायक प्रियव्रत सिंह प्रदेश उपाध्यक्ष होने के साथ राजगढ़ जिला कांग्रेस अध्यक्ष हैं। इनके अलावा भी कई पदाधिकारियों के पास दो या तीन संगठनात्मक जिम्मेदारियां हैं। नई व्यवस्था में ऐसे नेताओं को किसी एक जिम्मेदारी तक सीमित करने की संभावना है। खासकर जो विधायक हैं और जिला संगठन की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।
मिशन 2028 के लिए बनेगी टीम कांग्रेस
नई कार्यकारिणी को केवल संगठनात्मक फेरबदल के रूप में नहीं बल्कि वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारी की पहली बड़ी कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। यही टीम 2028 का विधानसभा चुनाव और उसके बाद 2029 का लोकसभा चुनाव कराने की जिम्मेदारी संभालेगी। इसलिए पार्टी के सामने चुनौती केवल पदों की संख्या घटाने की नहीं, बल्कि ऐसे नेताओं की पहचान करने की है जो अगले दो-तीन वर्षों तक लगातार संगठन के लिए काम कर सकें। युवा नेताओं को आगे बढ़ाने के साथ अनुभवी नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देने की रणनीति अपनाई जाएगी। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी संकेत दिया है कि नई टीम में युवा ऊर्जा और अनुभव का संतुलन रखा जाएगा। उनका कहना है कि अब सभी नेताओं को ‘टीम कांग्रेस’ के रूप में मिशन 2028 की तैयारी में जुटना होगा।
संगठन में बदलाव से गुटबाजी पर लगाम लगाने की कोशिश
मध्य प्रदेश कांग्रेस में लंबे समय से अलग-अलग नेताओं के प्रभाव वाले खेमों की चर्चा होती रही है। नई कार्यकारिणी के जरिए पार्टी नेतृत्व एक ऐसा संगठनात्मक ढांचा तैयार करना चाहता है, जिसमें किसी एक गुट के समर्थकों का दबदबा न हो और सक्रियता के आधार पर नेताओं को जिम्मेदारी मिले। अगर कार्यकारिणी की संख्या 253 से घटाकर करीब 125 की जाती है तो करीब आधे पद समाप्त हो जाएंगे। इसका अर्थ यह भी होगा कि नई टीम में शामिल होने के लिए नेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और पार्टी नेतृत्व के सामने सक्रिय एवं निष्क्रिय चेहरों की स्पष्ट पहचान करने की चुनौती होगी। आने वाले दो-तीन महीने कांग्रेस के लिए इसी लिहाज से महत्वपूर्ण होंगे। नई कार्यकारिणी के गठन से यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि 2028 के चुनाव में पार्टी पुराने संगठनात्मक समीकरणों के भरोसे आगे बढ़ती है या पूरी तरह नई पीढ़ी और नए चुनावी प्रबंधन को केंद्र में रखती है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का कहना है कि नई टीम जल्द ही गठित की जाएगी। इसमें युवा जोश के साथ अनुभव का मिश्रण नजर आएगा। अब सबको टीम कांग्रेस बनकर मिशन 2028 की तैयारी में जुटना है। टीम सबके साथ विचार-विमर्श कर बनाई जाएगी।
