बजट में अनुमान चूके तो विभागों से होगा जवाब-तलब

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  • 2027-28 के बजट की तैयारी शुरू, तीन साल का रोलिंग बजट बनेगा

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्यप्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2027-28 के बजट की तैयारी शुरू करने के साथ ही विभागों के बजट अनुमानों की जवाबदेही तय करने की तैयारी भी कर ली है। इस बार वित्त विभाग केवल अगले तीन वर्षों का रोलिंग बजट तैयार नहीं करेगा, बल्कि पिछले रोलिंग बजट में विभागों द्वारा लगाए गए अनुमानों की वास्तविक खर्च से तुलना भी करेगा। यानी विभागों ने जिस योजना, निर्माण कार्य या मद में जितनी राशि की जरूरत बताई थी, वास्तव में कितना खर्च हुआ और जरूरत का अनुमान कितना सही था, इसका बारीकी से विश्लेषण किया जाएगा। सरकार वित्तीय वर्ष 2027-28 के साथ 2028-29 और 2029-30 का भी रोलिंग बजट तैयार करेगी। इसके लिए वित्त विभाग ने सभी विभागों को दिशा-निर्देश जारी कर प्रस्ताव मांगे हैं। विभागों को अपने बजट प्रस्ताव 7 सितंबर तक वित्त विभाग को भेजने होंगे।
वित्त विभाग इस बार बजट तैयार करने की प्रक्रिया में पिछले अनुमानों को आधार बनाकर उनकी सटीकता जांचेगा। किसी विभाग ने किसी योजना के लिए जितनी राशि प्रस्तावित की थी, उसके मुकाबले वास्तविक खर्च कितना रहा, इसे देखा जाएगा। इसी तरह विकास कार्यों, योजनाओं और अन्य मदों में अनुमानित जरूरत तथा वास्तविक जरूरत के बीच अंतर का भी आकलन होगा। यदि किसी विभाग के अनुमान में लगातार बड़ा अंतर पाया गया तो वित्त विभाग संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर सकता है। अधिकारियों को भविष्य में बजट अनुमान तैयार करते समय वास्तविक जरूरत, पिछला खर्च और योजनाओं की प्रगति को ध्यान में रखने के निर्देश दिए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य बजट में कागजी जरूरत के बजाय वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप प्रावधान करना है।
हर प्रस्ताव के साथ बताना होगा पैसे का पूरा उपयोग
नए बजट में विभागों को केवल यह बताना पर्याप्त नहीं होगा कि उन्हें कितनी राशि चाहिए। प्रस्ताव के साथ यह भी बताना होगा कि राशि कहां और क्यों खर्च की जाएगी। विभागों को योजना के तहत प्रस्तावित राशि, लाभार्थियों की संख्या, पिछले वर्षों में हुए खर्च, योजना से मिले परिणाम और भविष्य में संभावित वित्तीय आवश्यकता का विवरण देना होगा। इससे वित्त विभाग को यह तय करने में आसानी होगी कि किस योजना में वास्तव में कितने बजट की जरूरत है। बजट से जुड़ी जानकारी बीईएमएस पोर्टल पर भी अपलोड करनी होगी। सरकार को मिलने वाले राजस्व और होने वाले खर्च को निर्धारित श्रेणियों में दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। राजस्व तथा विकास से जुड़े बड़े खर्चों को अलग-अलग दर्शाया जाएगा, ताकि बजट की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सके।
पहली बार नहीं, पिछले दो साल के डेटा से तय होगी जरूरत
वित्त विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 का बजट जीरो बेस्ड बजट प्रणाली के आधार पर तैयार किया था। इस व्यवस्था में प्रत्येक योजना को पुराने बजट के आधार पर स्वत: राशि देने के बजाय नए सिरे से उसकी जरूरत और उपयोगिता का आकलन किया गया था। अब विभाग का मानना है कि पिछले दो वर्षों में योजनाओं की जरूरत, उपयोगिता और वास्तविक खर्च की व्यापक समीक्षा हो चुकी है। इससे पर्याप्त डेटा उपलब्ध है। इसी आधार पर 2027-28 का बजट तैयार किया जाएगा। इसलिए इस बार बजट को जीरो बेस्ड प्रणाली से तैयार नहीं किया जाएगा।
तीन साल आगे तक की जरूरत का भी देना होगा अनुमान
रोलिंग बजट का उद्देश्य सरकार को केवल एक वित्तीय वर्ष की जरूरत के बजाय आने वाले वर्षों की वित्तीय तस्वीर पहले से उपलब्ध कराना है। विभागों को 2027-28 के साथ 2028-29 और 2029-30 के लिए भी अपनी संभावित वित्तीय जरूरत बतानी होगी। इससे सरकार को बड़ी योजनाओं, विकास परियोजनाओं और नियमित खर्चों के लिए पहले से वित्तीय संसाधन जुटाने की योजना बनाने में मदद मिलेगी।
फोकस अब ‘कितना मांगा’ पर नहीं, ‘कितना चाहिए’ पर
वित्त विभाग की इस कवायद का सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि विभागों के बजट प्रस्ताव केवल मांग के आधार पर स्वीकार नहीं किए जाएंगे। पिछले खर्च, योजना के परिणाम और वास्तविक जरूरत के आधार पर राशि तय करने पर जोर रहेगा। इससे बजट अनुमानों में अतिशयोक्ति पर अंकुश लगाने और सरकारी धन के अधिक प्रभावी उपयोग की कोशिश की जा रही है।

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