धान से दूरी, मक्का और श्री अन्न की खेती बढ़ी

खेती बढ़ी
  • मानसून की बेरूखी से किसानों का रुझान बदला

    भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश में मानसून के असमान वितरण के बावजूद खरीफ सीजन 2026 की बोनी लगभग पिछले वर्ष के स्तर पर बनी रही है। 31 जुलाई 2026 तक प्रदेश में 164.46 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई पूरी हो चुकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 164.77 लाख हेक्टेयर था। यानी कुल बोनी में केवल 0.19 प्रतिशत की मामूली कमी दर्ज की गई। हालांकि इस बार सबसे बड़ा बदलाव कुल रकबे में नहीं, बल्कि फसल चयन में देखने को मिला है। किसान परंपरागत धान जैसी अधिक पानी वाली फसलों से हटकर मक्का, श्री अन्न (मिलेट्स), दलहन और तिलहन की ओर तेजी से बढ़े हैं।
    सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष बाजरा का रकबा 19.79 प्रतिशत बढकऱ 3.55 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि मक्का का क्षेत्रफल 4.22 प्रतिशत बढकऱ 26.20 लाख हेक्टेयर पहुंच गया। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे राज्य सरकार द्वारा श्री अन्न को बढ़ावा, बेहतर बाजार मूल्य और कम पानी में अच्छी पैदावार जैसी वजहें प्रमुख हैं। बदलते मौसम और अनिश्चित वर्षा के कारण किसान अब ऐसी फसलों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनमें जोखिम अपेक्षाकृत कम हो।
    धान की बोनी में सबसे बड़ी गिरावट
    इस सीजन में सबसे अधिक असर धान की खेती पर पड़ा है। धान का रकबा घटकर 25.47 लाख हेक्टेयर रह गया, जबकि पिछले वर्ष यह 31.72 लाख हेक्टेयर था। यानी 6.25 लाख हेक्टेयर (19.70 प्रतिशत) की कमी दर्ज की गई। इसी तरह ज्वार की बोनी भी 24.69 प्रतिशत घटकर 0.61 लाख हेक्टेयर रह गई।
    दलहन और तिलहन में तेजी
    दलहनी और तिलहनी फसलों के प्रति किसानों का रुझान बढ़ा है। मूंगफली का रकबा 35.25 प्रतिशत बढ़ा। मूंग की बोनी में 32.98 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उड़द का क्षेत्रफल 16.06 प्रतिशत बढ़ा। वहीं प्रदेश की सबसे बड़ी खरीफ फसल सोयाबीन का रकबा भी बढकऱ 52.09 लाख हेक्टेयर हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1.98 प्रतिशत अधिक है।
    बदल रही खेती की रणनीति
    कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों का फसल चयन अब केवल परंपरा के आधार पर नहीं, बल्कि बाजार की मांग, सरकारी प्रोत्साहन, कम पानी की उपलब्धता और जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखकर हो रहा है। इस कारण कुल बोनी सामान्य रहने के बावजूद फसलों के स्वरूप में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है। इस बार धान की खेती में 19.70 प्रतिशत कमी आई है। वहीं मक्का में 4.22 प्रतिशत वृद्धि, बाजरा में 19.79 प्रतिशत वृद्धि, सोयाबीन में 52.09 लाख हेक्टेयर (1.98 प्रतिशत वृद्धि), मूंगफली में 35.25 प्रतिशत वृद्धि, मूंग में 32.98 प्रतिशत वृद्धि और उड़द में 16.06 प्रतिशत वृद्धि हुई है। कुल मिलाकर, खरीफ सीजन 2026 के आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि मध्य प्रदेश में खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। किसान अब जलवायु की चुनौतियों और बाजार की मांग के अनुरूप फसलें चुन रहे हैं, जिससे भविष्य में प्रदेश की कृषि व्यवस्था और उत्पादन पैटर्न में भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। 

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