
- 3डी मैपिंग से तय हुई निर्माण की सीमा
- कोर-बफर जोन में निर्माण पर नियंत्रण, ड्रोन सर्वे से तैयार हुआ पूरा डिजिटल रिकॉर्ड; स्मारकों की दृश्यता बचाने पर जोर
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। ओरछा में अब विकास की दिशा सिर्फ सडक़ों और भवनों से नहीं, बल्कि डिजिटल मैपिंग से तय होगी। सदियों पुरानी ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक निर्माण के दबाव से बचाने के लिए शहर के प्रमुख स्मारकों और उनके आसपास के क्षेत्र का 3डी लेजर स्कैनिंग, जीआईएस और ड्रोन तकनीक से डिजिटल सर्वे कराया गया है। इस सर्वे के आधार पर विरासत के कोर और बफर जोन चिह्नित किए गए हैं, ताकि आने वाले समय में होने वाले निर्माण और विकास कार्यों की सीमा पहले से तय रहे। श्रीरामराजा मंदिर, जहांगीर महल, चतुर्भुज मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर और बेतवा किनारे स्थित छतरियों सहित प्रमुख विरासत स्थलों को डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य सिर्फ स्मारकों की मौजूदा स्थिति दर्ज करना नहीं, बल्कि उनके आसपास के पूरे ऐतिहासिक परिदृश्य को सुरक्षित रखना है।
अब तक किसी ऐतिहासिक इमारत के संरक्षण के लिए कागजी नक्शे और पारंपरिक सर्वे पर निर्भरता अधिक रही है। 3डी लेजर स्कैनिंग के बाद स्मारकों की संरचना का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। भविष्य में किसी हिस्से में बदलाव, क्षति या संरक्षण कार्य की जरूरत पडऩे पर पुराने डिजिटल रिकॉर्ड से तुलना की जा सकेगी। जीआईएस मैपिंग से स्मारक, सडक़, भवन, जमीन और आसपास के क्षेत्र को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर देखा जा सकेगा। वहीं ड्रोन सर्वे ने पूरे विरासत क्षेत्र की ऊपर से विस्तृत तस्वीर और मैप तैयार किया है। इससे प्रशासन को यह तय करने में मदद मिलेगी कि किस क्षेत्र में विकास किया जा सकता है और कहां निर्माण गतिविधियों पर नियंत्रण जरूरी है।
100 से 300 मीटर तक निर्माण पर नियंत्रण
ओरछा में विरासत स्थलों की दृश्यता और ऐतिहासिक स्वरूप बनाए रखने के लिए कोर और बफर जोन तय किए गए हैं। जहांगीर महल, रामराजा मंदिर और कंचना घाट के आसपास करीब 100 से 300 मीटर के दायरे में नए निर्माण को नियंत्रित किया गया है। इसका सीधा असर भविष्य के भवन निर्माण और अन्य विकास गतिविधियों पर पड़ेगा। प्रशासन की कोशिश है कि आधुनिक निर्माण स्मारकों की पहचान और दृश्यता पर हावी न हों। इसी वजह से पार्किंग, यातायात, कचरा प्रबंधन और पर्यटक सुविधाओं को भी विरासत संरक्षण के साथ जोडकऱ विकसित करने की योजना है।
पर्यटन बढ़े तो स्थानीय कारोबार को मिलेगा फायदा
ओरछा का प्रस्तावित विश्व धरोहर नामांकन सिर्फ संरक्षण का मामला नहीं है। यदि नामांकन प्रक्रिया आगे बढ़ती है और भविष्य में यूनेस्को का दर्जा मिलता है, तो अंतरराष्ट्रीय पर्यटन में रुचि बढऩे की संभावना है। इसका असर होटल, परिवहन, स्थानीय गाइड, हस्तशिल्प और अन्य पर्यटन आधारित कारोबार पर पड़ सकता है। यानी ओरछा में अब चुनौती केवल पुरानी इमारतों को बचाने की नहीं है। असली चुनौती यह है कि पर्यटन और आधुनिक विकास बढ़े, लेकिन शहर की ऐतिहासिक पहचान उसी अनुपात में सुरक्षित भी रहे। 3डी स्कैनिंग और डिजिटल मैपिंग इसी संतुलन को जमीन पर लागू करने का नया आधार बन रही है।
