
- डॉ. मोहन सरकार की नीतियों का कमाल
मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनकी सरकार ने प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जो नीतियां बनाई और क्रियान्वित की हैं, उनका असए अब दिखने लगा है। डॉ. मोहन सरकार की नीतियों का ही कमाल है कि मप्र टेक हब बन रहा है।
गौरव चौहान/बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल (डीएनएन)। एक समय था जब मध्य प्रदेश की पहचान केवल कृषि, खनिज संपदा और पारंपरिक उद्योगों से होती थी। निवेशक राज्य का मूल्यांकन मुख्य रूप से उसकी भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक संसाधनों और औद्योगिक संभावनाओं के आधार पर करते थे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह तस्वीर तेजी से बदली है। अब प्रदेश सूचना प्रौद्योगिकी , आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस , डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, स्टार्टअप और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे भविष्य के क्षेत्रों में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहा है। इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर जैसे शहर केवल प्रशासनिक या शैक्षणिक केंद्र नहीं रह गए हैं, बल्कि नई डिजिटल अर्थव्यवस्था के वाहक बनते जा रहे हैं। राज्य सरकार की नई आईटी नीति, निवेशकों को दी जा रही सुविधाएं, आधुनिक आधारभूत ढांचा और तेजी से विकसित हो रहे आईटी पार्क मध्य प्रदेश को देश के नए टेक्नोलॉजी कॉरिडोर के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और भारत टेक्स जैसे आयोजनों के जरिए प्रदेश ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि अब वह केवल विनिर्माण या कृषि आधारित निवेश का गंतव्य नहीं, बल्कि डिजिटल भविष्य की अर्थव्यवस्था का भी मजबूत दावेदार है। हाल के वर्षों में हजारों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव, डेटा सेंटर, एआई सिटी और नई आईटी परियोजनाओं की घोषणाएं इसी बदलाव की गवाही देती हैं। देश के आर्थिक मानचित्र पर मध्य प्रदेश लंबे समय तक हार्ट ऑफ इंडिया के रूप में जाना जाता रहा है। लेकिन अब यह पहचान केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि आर्थिक और तकनीकी भी बन रही है। राज्य सरकार ने आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर, स्टार्टअप और डिजिटल सेवाओं को औद्योगिक विकास की नई धुरी बनाया है। इसके पीछे दो प्रमुख कारण हैं-युवाओं के लिए उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार सृजित करना। प्रदेश को भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था के अनुरूप तैयार करना। देश में डिजिटल इंडिया अभियान के बाद आईटी उद्योग का तेजी से विस्तार हुआ। बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, गुरुग्राम और नोएडा जैसे शहर पहले से स्थापित थे, लेकिन अब कंपनियां कम लागत, बेहतर कनेक्टिविटी और नई प्रतिभाओं की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर भी रुख कर रही हैं। मध्य प्रदेश इसी अवसर का लाभ उठाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
नीति से लेकर निवेश तक बदली रणनीति
किसी भी राज्य का आईटी हब बनना केवल भवन बनाने से संभव नहीं होता। इसके लिए मजबूत नीति, कुशल मानव संसाधन, निवेश-अनुकूल माहौल, तेज प्रशासनिक प्रक्रिया और आधुनिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है। मध्य प्रदेश सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में इन्हीं क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया है। सरकार ने- आईटी एवं आईटीईएस नीति को प्रोत्साहन दिया। स्टार्टअप नीति लागू की। डेटा सेंटर और एआई निवेश को प्राथमिकता दी। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया। निजी कंपनियों को भूमि और प्रोत्साहन उपलब्ध कराए। सिंगल विंडो सिस्टम को मजबूत बनाया। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में देश-विदेश की कई बड़ी कंपनियां निवेश के लिए आगे आई हैं।
भोपाल में आयोजित एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव केवल एक निवेश सम्मेलन नहीं था, बल्कि यह प्रदेश की नई आर्थिक सोच का प्रदर्शन भी था। इस आयोजन में हजारों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव सामने आए। सरकार ने स्पष्ट किया कि प्रदेश अब केवल पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एआई, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, ड्रोन टेक्नोलॉजी, डिजिटल सर्विसेज और डीप टेक जैसे क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया जाएगा। इसी दौरान भोपाल में विशाल नॉलेज एंड एआई सिटी विकसित करने की घोषणा भी महत्वपूर्ण रही। लगभग 3500 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित यह परियोजना उच्च शिक्षा, अनुसंधान, स्टार्टअप और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उद्योगों का केंद्र बनने की दिशा में काम कर रही है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के सहयोग से एक गीगावॉट क्षमता वाले एआई डेटा सेंटर की दिशा में भी पहल की गई है। आईटी पार्क केवल बड़ी कंपनियों के लिए नहीं हैं। इनके साथ विकसित होने वाला स्टार्टअप इकोसिस्टम भी उतना ही महत्वपूर्ण है। प्रदेश में फिनटेक, एग्रीटेक, एडटेक, हेल्थटेक, डीप टेक, ई-कॉमर्स और एआई आधारित स्टार्टअप तेजी से उभर रहे हैं। सरकार इनक्यूबेशन सेंटर, सीड फंडिंग, मेंटरशिप और नवाचार कार्यक्रमों के माध्यम से इन्हें प्रोत्साहित कर रही है। यही स्टार्टअप भविष्य में प्रदेश की डिजिटल अर्थव्यवस्था की नई रीढ़ बन सकते हैं। मध्य प्रदेश तेजी से देश का नया टेक और सेमीकंडक्टर हब बन रहा है।
स्टार्टअप संस्कृति का विस्तार
हाल ही में एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0 में 40,000 करोड़ के भारी निवेश और हजारों नए रोजगारों की घोषणाएं की गई हैं। भोपाल, इंदौर और जबलपुर इसके मुख्य केंद्र होंगे। भोपाल में हवाई अड्डे और भौंरी के पास 3700 एकड़ में एक विशाल नॉलेज और एआई सिटी विकसित की जा रही है, जो अनुसंधान और उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र होगी। वहीं इंदौर में नए आईटी टावर, स्पार्क सिटी और सेमीकंडक्टर सेक्टर के विकास पर जोर दिया जा रहा है। स्पेन, अमेरिका और कनाडा की कंपनियों के साथ मिलकर 1 गीगावाट क्षमता का एआई डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए एमओयू भी साइन किया गया है। सीएम मोहन यादव ने भोपाल में एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0 में कहा कि एमपी टेक सेक्टर में तेजी से आगे बढ़ रहा है। साथ ही उन्होंने 20 औद्योगिक इकाइयों का भी लोकार्पण किया है। समारोह में इंडिया लीड फॉर गूगल प्ले और एमपीएसईडीसी के बीच महत्वपूर्ण एमओयू भी साइन किया गया। सीएम मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की पहचान भी पहले केवल एग्रीकल्चर, माइनिंग और फॉरेस्ट थी, लेकिन अब डिफेंस से लेकर ड्रोन, साइंस टेक से लेकर रिन्युएबल एनर्जी, इंडस्ट्री कॉरिडोर से लेकर फ्यूचर गोइंग सेक्टर तक एमपी तेज गति से आगे बढ़ रहा है। हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि ग्रोथ कॉन्क्लेव तीसरे संस्करण तक पहुंच गया है। पिछले दो वर्षों में हमने जो संकल्प लिए, उन्हें पूरा किया। दो संस्करणों में हमें 46 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, 22 नए औद्योगिक इकाइयों का लोकार्पण हुआ और 4 नई परियोजनाओं का भूमि-पूजन किया गया।
उन्होंने कहा कि ग्लोबल इंवेस्टर्स मीट 2025 से लेकर आज तक टेक सेक्टर में 12 हजार करोड़ से अधिक का निवेश धरातल पर उतर चुका है। इससे हमारी काम करने की गति और आत्मविश्वास झलकता है। मोहन यादव ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की वजह से भी भोपाल पहचाना जाता है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण दिया था। इसी तरह हमारे प्रधानमंत्री मोदी भी दुनिया के सामने राष्ट्र भाषा को गौरवांवित करते हैं। मध्यप्रदेश में स्पेन, कनाडा, यूके, जापान, दक्षिण कोरिया की बड़ी-बड़ी कंपनियों ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के माध्यम से अब तक 28 हजार 200 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश किया है। बार्सिलोना (स्पेन) के सबमर ग्रुप ने अपने संकल्प को दोहराया है और 1 गीगा बाइट के डाटा सेंटर स्थापित करने के लिए निवेश कर रही है। मध्यप्रदेश सरकार एआई, डाटा सेंटर और सेमीकंडकर सहित सभी छोटे और बड़े उद्योगों के विकास के लिए सदैव तत्पर है। मध्यप्रदेश डीप टेक पार्क और डाटा सेंटर सहित सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है। एआई से लेकर टेक्नोलॉजी सेक्टर के विकास के लिए राज्य सरकार कटिबद्ध है। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि जीआईएस में प्रदेश को अभूतपूर्व निवेश मिला। इसमें 10 लाख करोड़ निवेश धरातल पर उतर चुका है। एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0 इसी औद्योगिक निवेश यात्रा का एक पड़ाव है। मध्यप्रदेश में जीसीसी, डाटा सेंटर और सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी के विकास के लिए निवेश और भविष्य की संभावनाओं पर महत्वपूर्ण चर्चा हो रही है। डिजिटल और टेक्नोलॉजी सेक्टर में अब तक 12 हजार करोड़ से अधिक निवेश धरातल पर आ चुका है और आगे भी इस पर काम हो रहा है। एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0 में अलग-अलग दिग्गज टेक कंपनियां 40 हजार करोड़ रुपए से अधिक का निवेश करने जा रही हैं।
विदेशी निवेश की बड़ी उड़ान
मध्य प्रदेश में विदेशी निवेश अब केवल एमओयू तक सीमित न रहकर धरातल पर साकार हो रहा है। स्पेन, कनाडा, अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, जापान, दक्षिण कोरिया, आयरलैंड और इंडो-जर्मन सहयोग सहित आठ देशों की 10 प्रमुख कंपनियों की 28 हजार 200 करोड़ रुपये से अधिक की निवेश परियोजनाएं प्रदेश में ग्राउंडब्रेकिंग चरण में हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि इनमें स्पेन की सबमर इंडिया प्रालि द्वारा भोपाल में लगभग 20 हजार करोड़ रुपये (यूएसडी दो बिलियन डॉलर) के एआइ-रेडी डेटा सेंटर की स्थापना, कनाडा की मैक्केन फूड की 3,800 करोड़ रुपये की फूड प्रोसेसिंग इकाई, यूनाइटेड किंगडम की हेलियन (जीएसके) की तीन हजार करोड़ रुपये की फार्मास्यूटिकल्स परियोजना और जापान की टोपान स्पेशियलिटी फिल्म्स की 1,100 करोड़ रुपये की स्पेशियलिटी फिल्म्स इकाई शामिल है। एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा लागत वाली इन परियोजनाओं के साथ अमेरिका ट्रूयर स्पिलट वाटर्स की रिन्यूएबल्स एनर्जी की 500 करोड़ रुपये की नवकरणीय ऊर्जा परियोजना, दक्षिण कोरिया की बू यंग स्कीकार्प की 225 करोड़ रुपये की लेदर एवं फुटवियर इकाई, एफीबार की 207 करोड़ रुपये का मेडिकल डिवाइस पार्क, आयरलैंड की फेलिक्स जेनेरिक्स की 134 करोड़ रुपये की फार्मास्यूटिकल्स इकाई, यूनाइटेड किंगडम की क्लिनीसप्लाइज की 127 करोड़ रुपये की मेडिकल डिवाइस पार्क और इंडो-जर्मन सहयोग से टीडब्ल्यूई ओबीटी प्रालि की 126 करोड़ रुपये की टेक्सटाइल इकाई के कार्य भी निरंतर प्रगति पर हैं। पारस सेमीकंडक्टर्स के सीईओ संतोष कुमार ने कहा कि उनकी कंपनी पारस सेमीकंडक्टर्स द्वारा मध्य प्रदेश में भारत की पहली अत्याधुनिक एडवांस्ड हेटेरोजीनियस पैकेजिंग ओसेट (आउटसोस्र्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट) इकाई की स्थापना के लिए लगभग 6,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। सीटीआरएलएस के रणनीति प्रमुख सिद्धार्थ रेड्डी ने कहा कि मध्य प्रदेश की तीनों टेक ग्रोथ कांक्लेव का हिस्सा बनना उनके लिए सुखद अनुभव रहा है। एस्टेरा लैब्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (आईटी) एवं प्रबंध निदेशक शिवानंद आर. कोटेश्वर ने कहा कि मध्य प्रदेश भविष्य में अंतरिक्ष (स्पेस) में डेटा सेंटर स्थापित करने वाला देश का पहला राज्य बनने की क्षमता रखता है।
500 से ज्यादा आईटी कंपनियां काम कर रही
इसी तरह प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में आईटी पार्क डेवलप किए जा रहे हैं। भोपाल में मौजूदा आईटी पार्कों का विस्तार कर इसे देश का सबसे बड़ा मेगा एआइ और नॉलेज सिटी भी बनाया जा रहा है। इंदौर में आइटी पार्क के लिए भूमि आरक्षित की गई है। मध्य प्रदेश में वर्तमान में 1,200 से अधिक टेक स्टार्टअप्स और लगभग 500 से अधिक छोटी-बड़ी आईटी कंपनियां काम कर रही हैं। राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) विभाग के अनुसार, प्रदेश में 50 से अधिक प्रमुख, बड़ी आईटी कंपनियां सक्रिय रूप से स्थापित हैं। भारत में इस वर्ष डेढ़ लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन और 23 हजार करोड़ रुपये का निर्यात हुआ। आगामी तीन वर्ष में इसे दोगुना करने का लक्ष्य है। भारत सरकार की योजना के तहत रक्षा उत्पाद बनाने के लिए तीन से पांच साल अनुभव की अनिवार्यता नहीं होगी। नवाचार या तकनीक अच्छी है तो उसे विशेष मामला मानकर प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रदेश में रक्षा उत्पादन के लिए अदाणी डिफेंस, हिंदुस्तान शिपयार्ड, बीईएल और जेबीएम जैसे समूहों ने रुचि दिखाई है। सागर, कटनी, रतलाम, सतना और मुरैना सहित आठ जिलों में रक्षा उत्पादन क्षेत्र के लिए 2700 हेक्टेयर से अधिक लैंड बैंक उपलब्ध है। भौगोलिक स्थिति और सहयोगी इको सिस्टम के कारण मध्य इसके लिए सबसे उपयुक्त राज्य है। धार के पीएम मित्रा पार्क में भी रक्षा क्षेत्र से जुड़े निवेश प्रस्ताव बुलाए गए हैं। सरकार की निवेश नीतियों के तहत डीपीआर बनाकर निवेशकों को इकाई लगाने तुरंत जमीन दी जाएगी। जबलपुर में व्हीकल फैक्ट्री और गन कैरिज फैक्ट्री जैसे रक्षा इको सिस्टम पहले से मौजूद हैं। व्हीकल फैक्ट्री में भारतीय सेना के टैंकों की रिपेयरिंग की क्षमता बढ़ाई जाएगी। यहां भारतीय सेना के टी-90 और टी-72 जैसे मुख्य युद्धक टैंकों की ओवरहालिंग शुरू हो गई है। जबलपुर, इटारसी और कटनी में आर्डनेंस फैक्ट्री हैं। ग्वालियर और इंदौर के नजदीक महू में फायरिंग रेंज है। राज्य के चारों ओर रक्षा क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश में अब कटनी, जबलपुर, इटारसी और सागर के बीच डिफेंस कारिडोर की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। सरकार का मानना है कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) सेक्टर रक्षा क्षेत्र में हर साल 400 करोड़ रुपये तक की स्थानीय आपूर्ति कर सकता है। महाकोशल क्षेत्र में मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहाल (एमआरओ) हब इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। जबलपुर के आर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया (ओएफके) में उन्नत एल-70 एंटी-एयरक्राफ्ट गन का उत्पादन फिर से शुरू करने की तैयारी है। यह अब आधुनिक इलेक्ट्रिक ड्राइव, फायर कंट्रोल सिस्टम और रडार से लैस होगी। ऑपरेशन सिंदूर में अपने अचूक निशाने और सटीक प्रदर्शन के चलते एंटी एयरक्राफ्ट गन एल-70 ने गर्व का अहसास कराया। बताया जा रहा है कि म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड (एमआइएल) की एक इकाई ओएफके एल-70 के ट्रायल उत्पादन शुरू करने से पहले इन-हाउस तैयारियों को पुख्ता करने के साथ मंथन में जुटी है। माना जा रहा है कि सेना से रक्षा उत्पादन को हरी झंडी मिलने के बाद कार्य के गति पकडऩे की संभावना है।
मध्यप्रदेश निवेश का रिकार्ड तोड़ेगा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश टेक्सटाइल, गारमेंट और फुटवियर सेक्टर में आकर्षक नीतियों से विशेष पहचान बना रहा है। राज्य में उद्योगों को आर्थिक सब्सिडी, बिजली आपूर्ति, भूमि आवंटन, स्टांप ड्यूटी में छूट से निवेशक आकर्षित हो रहे हैं। राज्य में महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन, कौशल विकास प्रशिक्षण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम हो रहा है। मध्यप्रदेश देश के मध्य में होने और अपनी विशेषताओं के कारण दुनियाभर के निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 में मध्यप्रदेश को प्राप्त निवेश प्रस्ताव में से लगभग 10 लाख करोड़ का निवेश धरातल पर आ चुका है। वर्ष 2027 में फिर जीआईएस का आयोजन होगा, उम्मीद है कि इसमें निवेश का रिकॉर्ड टूटेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि उद्यमियों को साढ़े पांच हजार करोड़ की सब्सिडी राशि डीबीटी के माध्य से दी जा चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में संभाग स्तर पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित की गईं, जिससे छोटे शहरों में भी औद्योगिक विकास हुआ है। नर्मदापुरम में 11 हजार 500 करोड़ से निवेश से नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित हो रहा है। रीवा में आईटी पार्क शुरू हो रहा है। ग्वालियर, जबलपुर, सिंगरौली, सतना, कटनी और सागर में इंडस्ट्रियल पार्क स्थापित किए जा रहे हैं। शिवपुरी को डिफेंस पार्क और गुना को बड़े सीमेंट प्लांट की सौगात मिली है। वर्तमान में प्रदेश में 37 से अधिक इंडस्ट्रियल पार्क संचालित हैं। मध्यप्रदेश टेक्सटाइल और गारमेंट के साथ उद्योग के अन्य क्षेत्रों में भी आगे बढ़ रहा है। राज्य में पर्याप्त मात्रा में कपास और रेशम उत्पादन हो रहा है। केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह ने मध्यप्रदेश के रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव मॉडल की सराहना की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने गैर-जरूरी खर्चों को कम करते हुए वैश्विक चुनौतियों के बीच भी अपने वार्षिक बजट में बढ़ोतरी की है। पहले सरकार किसानों को 20 हजार करोड़ की पहले सब्सिडी देती थी, इसके स्थान पर सोलर एनर्जी को प्रोत्साहन प्रदान करते हुए किसानों को सोलर पंप दिए जा रहे हैं। किसान अपनी जरूरत की बिजली का स्वयं उत्पादन कर रहे हैं। जरूरत से अधिक बिजली को राज्य सरकार खरीद भी रही है। नदी जोड़ो परियोजनाओं के माध्यम से जल बंटवारे को नई दिशा दी गई है। मध्यप्रदेश सरकार पड़ोसी राज्यों के साथ परस्पर संबंधों को बेहतर करते हुए पर्यटन को बढ़ावा दे रही है।
बदल रही है प्रदेश की अर्थव्यवस्था
कभी कृषि, उद्योग और पारंपरिक विनिर्माण के लिए पहचाना जाने वाला मध्य प्रदेश अब सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। राज्य सरकार की आईटी एवं स्टार्टअप नीतियों, बेहतर आधारभूत ढांचे, निवेश अनुकूल माहौल और कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता ने प्रदेश को देश के उभरते आईटी गंतव्यों में शामिल कर दिया है। वर्तमान में प्रदेश में 15 से अधिक आईटी पार्क संचालित हैं और आने वाले वर्षों में इनकी संख्या और क्षमता दोनों बढऩे की उम्मीद है। इस पूरी तस्वीर में इंदौर सबसे बड़े आईटी हब के रूप में सामने आया है, जबकि भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर भी तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन रहे हैं। इंदौर ने पिछले कुछ वर्षों में जिस गति से आईटी क्षेत्र में विकास किया है, वह प्रदेश के लिए एक नई पहचान बन रहा है। लगातार स्वच्छता में नंबर-1 रहने वाला शहर अब बहुराष्ट्रीय कंपनियों, स्टार्टअप्स और आधुनिक कॉर्पोरेट कैंपस का केंद्र बन चुका है। सुपर कॉरिडोर पर विकसित हो रहा आईटी इकोसिस्टम आज इंदौर की सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है। यहां आधुनिक कार्यालय भवन, चौड़ी सडक़ें, मेट्रो परियोजना, एयरपोर्ट कनेक्टिविटी और नियोजित व्यावसायिक विकास ने कंपनियों के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है। क्रिस्टल आईटी पार्क को प्रदेश का सबसे प्रतिष्ठित सरकारी आईटी पार्क माना जाता है। यहां कई आईटी और आईटीईएस कंपनियां संचालित हैं तथा हजारों युवाओं को रोजगार मिला है। भंवरकुआं क्षेत्र के पास स्थित अतुल्य आईटी पार्क स्टार्टअप्स और मध्यम आकार की तकनीकी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। सिनहासा आईटी पार्क एमएसएमई और उभरते आईटी स्टार्टअप्स को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। कम लागत पर बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने की इसकी विशेषता है। सुपर कॉरिडोर पर स्थापित टीसीएस और इंफोसिस के एसईजेड कैंपस प्रदेश के आईटी सेक्टर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिने जाते हैं। इनके आने से सहायक उद्योगों, हॉस्टल, होटल, परिवहन और रियल एस्टेट क्षेत्र को भी बड़ा लाभ मिला है। विजय नगर क्षेत्र में स्थित निजी स्केप आईटी पार्क, जहां कई निजी कंपनियां कार्यरत हैं और नई कंपनियों के लिए भी अवसर उपलब्ध हैं। इंदौर का सुपर कॉरिडोर आज प्रदेश के सबसे महत्वाकांक्षी विकास क्षेत्रों में शामिल है। यहां आईटी कंपनियों के अलावा शिक्षा संस्थान, मेडिकल सुविधाएं, रिहायशी टाउनशिप, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स और मेट्रो नेटवर्क विकसित हो रहा है। रियल एस्टेट कंपनियां भी यहां बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं, जिससे रोजगार और निवेश दोनों बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले पांच वर्षों में सुपर कॉरिडोर देश के प्रमुख टेक कॉरिडोर में शामिल हो सकता है।
राजधानी भोपाल में भी आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर लगातार मजबूत हो रहा है। बदवई आईटी पार्क भोपाल का प्रमुख सरकारी आईटी पार्क है, जहां कई सॉफ्टवेयर और आईटीईएस कंपनियां संचालित हैं। यहां स्टार्टअप्स को भी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण, एंबेडेड सिस्टम, आईटीईएस और हार्डवेयर उद्योगों के लिए विकसित किया गया है। सरकार इसे इलेक्ट्रॉनिक्स निवेश का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में काम कर रही है। ग्वालियर स्थित सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पाक्र्स ऑफ इंडिया केंद्र वर्ष 2012 से संचालित है। यहां स्थानीय युवाओं को आईटी क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिल रहे हैं तथा छोटे और मध्यम स्तर की सॉफ्टवेयर कंपनियों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। महाकौशल क्षेत्र के प्रमुख शहर जबलपुर में भेड़ाघाट रोड स्थित जबलपुर आईटी पार्क क्षेत्रीय आईटी विकास का केंद्र बनकर उभरा है। यहां आईटी, बीपीओ और डिजिटल सेवाओं से जुड़ी कंपनियों को आकर्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में वर्तमान समय में 15 से अधिक आईटी पार्क विभिन्न चरणों में संचालित हैं। इनमें सरकारी और निजी दोनों प्रकार की परियोजनाएं शामिल हैं। राज्य सरकार नई औद्योगिक नीति और आईटी नीति के माध्यम से निजी निवेशकों को भूमि, कर प्रोत्साहन, सिंगल विंडो क्लीयरेंस और अन्य सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। आईटी पार्कों के विस्तार से केवल बड़ी कंपनियां ही नहीं आ रही हैं, बल्कि स्टार्टअप संस्कृति भी तेजी से विकसित हो रही है। इंदौर, भोपाल और ग्वालियर में इनक्यूबेशन सेंटर, को-वर्किंग स्पेस और स्टार्टअप एक्सेलेरेशन कार्यक्रम युवाओं को उद्यमिता की ओर आकर्षित कर रहे हैं। राज्य सरकार स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता, मेंटरशिप और तकनीकी सहयोग भी उपलब्ध करा रही है।
