हाईटेक होगा आस्था का महापर्व सिंहस्थ

महापर्व सिंहस्थ
  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मॉनिटरिंग में बदल रहा उज्जैन

सिंहस्थ 2028 परंपरा के साथ आधुनिक तकनीक, विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना, सुरक्षित प्रबंधन और सतत विकास की मिसाल बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मॉनिटरिंग में मप्र सरकार ने सिंहस्थ-2028 को हाईटेक बनाने के अभियान में जुटी हुई है।

विनोद कुमार उपाध्याय/बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल (डीएनएन)।
उज्जैन की पावन धरती पर वर्ष 2028 में होने वाला सिंहस्थ महापर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं होगा, बल्कि आधुनिक भारत की तकनीकी क्षमता और सनातन संस्कृति के समन्वय का भी साक्षी बनेगा। मध्य प्रदेश सरकार ने इस बार सिंहस्थ को दिव्य, भव्य, सुरक्षित और हाईटेक बनाने का लक्ष्य तय किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं इसकी तैयारियों की नियमित समीक्षा कर रहे हैं और अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से सभी परियोजनाएं पूरी करने के निर्देश दे रहे हैं। राज्य सरकार की योजना है कि सिंहस्थ-2028 केवल कुछ सप्ताह का आयोजन न रह जाए, बल्कि उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों के दीर्घकालिक विकास का आधार बने। इसी सोच के साथ हजारों करोड़ रुपये की आधारभूत संरचना परियोजनाएं, स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम, डिजिटल कमांड सेंटर, आधुनिक घाट, शिप्रा नदी संरक्षण, नई सडक़ें, रेलवे विस्तार, स्वास्थ्य सुविधाएं और पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्य एक साथ आगे बढ़ाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सिंहस्थ को प्रदेश की पहचान से जोडक़र देख रहे हैं। वे लगातार विभागवार समीक्षा बैठकें कर रहे हैं ताकि किसी भी परियोजना में देरी न हो। निर्माण एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि गुणवत्ता और समय-सीमा दोनों का विशेष ध्यान रखा जाए। मुख्यमंत्री का मानना है कि सिंहस्थ केवल श्रद्धालुओं की सुविधा तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उज्जैन को स्थायी रूप से आधुनिक धार्मिक नगरी के रूप में विकसित करने का अवसर भी है। यही कारण है कि अधिकांश परियोजनाएं ऐसी बनाई जा रही हैं जिनका लाभ सिंहस्थ के बाद भी शहर को मिलता रहेगा। इस बार सिंहस्थ में तकनीक की भूमिका पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक होगी। सरकार स्मार्ट सिंहस्थ की अवधारणा पर काम कर रही है, जिसके तहत पूरे आयोजन को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इसके लिए अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किया जाएगा, जहां से सुरक्षा, ट्रैफिक, बिजली, पेयजल, सफाई, स्वास्थ्य सेवाएं और भीड़ प्रबंधन की निगरानी एक साथ की जा सकेगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सॉफ्टवेयर विभिन्न स्थानों पर भीड़ का विश्लेषण करेंगे। यदि किसी घाट पर श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होती है तो तुरंत वैकल्पिक मार्गों पर यातायात मोड़ा जा सकेगा। सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व बनाने की तैयारी है। पूरे मेला क्षेत्र में हजारों हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। ड्रोन लगातार हवाई निगरानी करेंगे और कंट्रोल सेंटर को लाइव फीड उपलब्ध कराएंगे। भीड़ की गतिविधियों पर नजर रखने, संदिग्ध वस्तुओं की पहचान, ट्रैफिक नियंत्रण तथा आपदा की स्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा। सरकार एक ऐसा मोबाइल एप विकसित कर रही है जो श्रद्धालुओं की यात्रा को आसान बनाएगा। इसमें घाटों की जानकारी, स्नान तिथियां, पार्किंग, बस सेवा, चिकित्सा केंद्र, पुलिस सहायता, खोया-पाया केंद्र, धार्मिक कार्यक्रम और ट्रैफिक अपडेट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। श्रद्धालु अपने मोबाइल से ही यह जान सकेंगे कि किस घाट पर भीड़ कम है, कौन-सा मार्ग खुला है और निकटतम चिकित्सा सुविधा कहां उपलब्ध है।

आस्था, आधुनिकता और विकास का महाकुंभ
जब भी सिंहस्थ का नाम लिया जाता है, मन में शिप्रा के पावन तट, अखाड़ों की भव्य पेशवाई, नागा साधुओं की आध्यात्मिक परंपरा, संतों के प्रवचन और करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था की तस्वीर उभर आती है। लेकिन वर्ष 2028 का सिंहस्थ इन पारंपरिक स्वरूपों के साथ एक नई पहचान भी लेकर आएगा। यह पहचान होगी-आधुनिक तकनीक, विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना, सुरक्षित प्रबंधन और सतत विकास की। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश सरकार ने सिंहस्थ-2028 को केवल धार्मिक आयोजन के रूप में नहीं, बल्कि प्रदेश के समग्र विकास, धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक संरक्षण और आधुनिक शहरी प्रबंधन के वैश्विक मॉडल के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया है। सरकार की दृष्टि स्पष्ट है—आस्था से समझौता किए बिना तकनीक का अधिकतम उपयोग और श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराना। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सिंहस्थ-2028 की तैयारियों की स्वयं नियमित समीक्षा कर रहे हैं। विभागवार बैठकों में वे प्रत्येक परियोजना की प्रगति, समय-सीमा और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। उनका मानना है कि सिंहस्थ केवल कुछ दिनों का आयोजन नहीं, बल्कि आने वाले कई दशकों तक उज्जैन और मालवा क्षेत्र के विकास की दिशा तय करने वाला अवसर है। इसी सोच के अनुरूप सरकार ने लोक निर्माण, नगरीय विकास, जल संसाधन, ऊर्जा, पर्यटन, संस्कृति, स्वास्थ्य, गृह, परिवहन और सूचना प्रौद्योगिकी सहित सभी विभागों को साझा कार्ययोजना के तहत जोड़ दिया है। सिंहस्थ की तैयारियों के साथ उज्जैन में आधारभूत संरचना का अभूतपूर्व विस्तार किया जा रहा है। शहर में नई सडक़ों का निर्माण, मौजूदा मार्गों का चौड़ीकरण, फ्लाईओवर, रिंग रोड, आधुनिक पार्किंग, बस टर्मिनल, रेलवे सुविधाओं का विस्तार, विद्युत नेटवर्क का सुदृढ़ीकरण, पेयजल व्यवस्था, सीवरेज प्रणाली और स्मार्ट स्ट्रीट लाइटिंग जैसे कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल सिंहस्थ के दौरान आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को सुविधा देना नहीं है, बल्कि उज्जैन को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना भी है। वर्ष 2028 का सिंहस्थ आधुनिक तकनीक से संचालित होने वाला पहला व्यापक स्मार्ट सिंहस्थ बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पूरे मेला क्षेत्र को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोडऩे की योजना है। अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किया जाएगा, जहां से सुरक्षा, ट्रैफिक, बिजली, जलापूर्ति, सफाई, स्वास्थ्य सेवाओं और भीड़ प्रबंधन की निगरानी एक ही स्थान से होगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा एनालिटिक्स और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसी तकनीकों का उपयोग प्रशासनिक निर्णयों को अधिक प्रभावी बनाएगा। प्रदेश सरकार श्रद्धालुओं के लिए एक समग्र डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित कर रही है। मोबाइल एप और ऑनलाइन सेवाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं को स्नान तिथियों, घाटों की जानकारी, पार्किंग, यातायात, चिकित्सा सुविधाओं, धार्मिक कार्यक्रमों, आवास, खोया-पाया केंद्र और आपातकालीन सहायता जैसी जानकारियां तुरंत उपलब्ध होंगी। रियल टाइम अपडेट के कारण श्रद्धालु भीड़ वाले क्षेत्रों से बचते हुए आसानी से अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि सिंहस्थ-2028 से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, धार्मिक सामग्री, खाद्य उद्योग, पर्यटन, ई-कॉमर्स और स्थानीय व्यापार में व्यापक वृद्धि होगी। हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। छोटे व्यवसायों और स्थानीय उद्यमियों के लिए भी यह बड़ा अवसर साबित होगा। सरकार का कहना है कि तकनीक का उपयोग केवल सुविधा और सुरक्षा के लिए होगा। सिंहस्थ की धार्मिक परंपराओं, अखाड़ों की व्यवस्था और संत समाज की गरिमा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समय-समय पर संत समाज और अखाड़ा परिषद के प्रतिनिधियों से संवाद कर सुझाव प्राप्त कर रहे हैं। प्रशासनिक योजनाओं में इन सुझावों को शामिल करने का भी प्रयास किया जा रहा है। सिंहस्थ की तैयारियों के साथ उज्जैन में जो आधारभूत संरचना विकसित हो रही है, वह आने वाले वर्षों में शहर के विकास की नई पहचान बनेगी। बेहतर सडक़ें, आधुनिक परिवहन, स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम, स्वच्छ नदी, डिजिटल सेवाएं, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और पर्यावरण अनुकूल विकास उज्जैन को देश के प्रमुख धार्मिक शहरों की श्रेणी में नई ऊंचाई देंगे।
सिंहस्थ-2028 की तैयारियां यह संकेत दे रही हैं कि मध्य प्रदेश सरकार इस आयोजन को केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, आर्थिक, पर्यटन और तकनीकी विकास के अवसर के रूप में भी देख रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में चल रही योजनाओं का उद्देश्य है कि करोड़ों श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और यादगार अनुभव मिले तथा उज्जैन विश्व मानचित्र पर एक ऐसे आध्यात्मिक नगर के रूप में स्थापित हो, जहां सनातन परंपरा और आधुनिक तकनीक का संतुलित संगम दिखाई दे। यदि सभी परियोजनाएं निर्धारित समय पर पूरी होती हैं, तो सिंहस्थ-2028 न केवल भारत का, बल्कि दुनिया का सबसे आधुनिक, सुव्यवस्थित और तकनीक-सक्षम आध्यात्मिक आयोजन बन सकता है। यही सरकार की परिकल्पना है और इसी दिशा में प्रशासनिक मशीनरी पूरी गति से काम कर रही है। सिंहस्थ-2028 की तैयारियां यह संकेत देती हैं कि मध्य प्रदेश सरकार इसे केवल एक आयोजन के रूप में नहीं, बल्कि राज्य के दीर्घकालिक विकास, धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक संरक्षण और आधुनिक शहरी प्रबंधन के मॉडल के रूप में देख रही है। यदि निर्धारित योजनाएं समयबद्ध तरीके से पूरी होती हैं, तो उज्जैन न केवल करोड़ों श्रद्धालुओं की मेजबानी करेगा, बल्कि दुनिया के सामने यह भी प्रदर्शित करेगा कि किस प्रकार प्राचीन आस्था और आधुनिक तकनीक का सफल समन्वय किया जा सकता है। सिंहस्थ-2028 इसी दृष्टि से एक नए युग का प्रतीक बन सकता है—जहाँ शिप्रा के पावन तट पर सनातन परंपरा की दिव्यता और डिजिटल भारत की आधुनिकता साथ-साथ दिखाई देगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में चल रही तैयारियों का उद्देश्य भी यही है कि उज्जैन आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु सुरक्षित, सुविधाजनक और अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव लेकर लौटे तथा मध्य प्रदेश की पहचान विश्व के अग्रणी धार्मिक एवं सांस्कृतिक गंतव्य के रूप में और अधिक सशक्त हो।

सुरक्षा के लिए हाईटेक तैयारी
सिंहस्थ-2028 को सुरक्षित व व्यवस्थित बनाने के लिए उज्जैन पुलिस ने सुरक्षा योजना तैयार की है। योजना के तहत सिंहस्थ से पहले शहर और जिले के संवेदनशील क्षेत्रों में 350 स्थानों पर 3 हजार नए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों के लगने के बाद जिले में कुल कैमरों की संख्या बढक़र 10 हजार से अधिक हो जाएगी। वर्तमान में जिले में 6,054 कैमरे कार्य कर रहे। पुलिस की रणनीति अनुसार अपराधियों की शहर से लेकर गांवों के अंतिम छोर तक घेराबंदी करने की है, ताकि किसी भी वारदात के बाद आरोपियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सके। सिंहस्थ के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इसमें विभिन्न प्रकार के विशेष कैमरे शामिल होंगे जिसमें 30 डोम कैमरे लगाए जाएंगे, जो 360 डिग्री एंगल से निगरानी करेंगे। इससे चौराहों और खुले मैदानों की हर गतिविधि रिकॉर्ड होगी। 30 अंडर-वॉटर कैमरे शिप्रा नदी में लगाए जाएंगे, ताकि स्नान के दौरान होने वाली किसी भी आपात स्थिति पर तुरंत नजर रखी जा सके। 5,000 बॉडी-वॉर्न कैमरे ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को दिए जाएंगे, जिनसे मौके की लाइव रिकॉर्डिंग होगी। 400 डैश कैमरे पुलिस वाहनों में लगाए जाएंगे, जो गश्त के दौरान आगे और पीछे दोनों ओर की गतिविधियों को रिकॉर्ड करेंगे। साथ ही पुलिस की पीसीआर वैन पर विशेष कैमरे लगाए जाएंगे, जिससे गश्त के दौरान चारों दिशाओं में निगरानी रखी जा सकेगी। उज्जैन जिले में वर्तमान में कुल 6,054 सीसीटीवी कैमरे कार्यरत हैं। इनमें 548 शासकीय, 255 पंचायतों के माध्यम से तथा 5,281 जनभागीदारी (निजी) के कैमरे शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि लोगों में सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढऩे से निजी कैमरों की संख्या तेजी से बढ़ी है। महाकाल क्षेत्र इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां सरकारी कैमरों की तुलना में निजी कैमरों की संख्या कई गुना अधिक है। पुलिस की योजना केवल शहर तक सीमित नहीं है। यदि कोई अपराधी शहर से भागकर ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचता है तो वहां भी कैमरों के नेटवर्क के जरिए उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। इसके लिए पंचायतों और स्थानीय नागरिकों की भी भागीदारी ली जा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार सीसीटीवी कैमरों की मदद से कई बड़ी वारदातों का खुलासा पहले भी हो चुका है। ऐसे में सिंहस्थ-2028 के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और अपराध नियंत्रण के लिए यह हाईटेक निगरानी तंत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जानकारी देते हुए उज्जैन पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने बताया कि ”सिंहस्थ से पहले पूरे जिले को अत्याधुनिक सीसीटीवी नेटवर्क से लैस किया जाएगा, जिससे मेले के साथ-साथ शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में भी सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत हो सकेगी। सिंहस्थ 2028 को लेकर उज्जैन में अधोसंरचना विकास कार्यों ने गति पकड़ ली है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और यातायात प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए शहर के 100 प्रमुख चौराहों का विकास और आधुनिकीकरण किया जाएगा। इन चौराहों को हाईटेक तकनीक से लैस किया जाएगा, जिससे ट्रैफिक और क्राउड मैनेजमेंट को बेहतर बनाया जा सकेगा। उज्जैन कलेक्टर रौशन सिंह ने बताया कि सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों के तहत शहर में सडक़ों के विस्तार के साथ-साथ चौराहों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शहर के 100 से अधिक चौराहों को चिन्हित किया गया है, जहां आधुनिक डिजाइन के अनुरूप निर्माण कार्य किया जाएगा। सभी चौराहों पर लेफ्ट टर्न और यू-टर्न की सुविधा को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि यातायात का प्रवाह सुचारु बना रहे। उन्होंने बताया कि वर्तमान में कई प्रमुख सडक़ों को छह लेन और चार लेन में विकसित किया जा रहा है। शहर के भीतर 60 से अधिक सडक़ों का चौड़ीकरण किया जा रहा है। सडक़ निर्माण कार्यों के पूरा होने के बाद चरणबद्ध तरीके से चौराहों का विकास शुरू किया जाएगा। इसके लिए डिजाइन भी तैयार कर ली गई है। कलेक्टर रौशन सिंह के अनुसार सभी विकसित चौराहों को स्मार्ट तकनीक से जोड़ा जाएगा। चौराहों पर लगाए जाने वाले कैमरों और ट्रैफिक सिग्नलों की लाइव फीड एक केंद्रीय कंट्रोल रूम तक पहुंचेगी। इससे किसी भी स्थान पर भीड़ बढऩे या ट्रैफिक जाम की स्थिति बनने पर तत्काल कार्रवाई की जा सकेगी।

आग बुझाएगा छोटा रोबोट
सिंहस्थ 2028 को सुरक्षित और तकनीक से सशक्त बनाने के लिए उज्जैन में पहली बार हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था तैयार की जा रही है। ड्रोन, अग्निशमन रोबोट, एटीवी और क्विक रिस्पॉन्स व्हीकल भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में तेजी से राहत पहुंचाएंगे। प्रशासन का लक्ष्य करोड़ों श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुव्यवस्थित व्यवस्था उपलब्ध कराना है। धर्मनगरी उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियां अब हाईटेक होती नजर आ रही हैं। करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए पुलिस और प्रशासन आधुनिक तकनीकों का सहारा ले रहे हैं। पहली बार सिंहस्थ में ड्रोन, रोबोट और अत्याधुनिक निगरानी उपकरणों का इस्तेमाल किया जाएगा। जिससे भीड़ प्रबंधन, घाटों की निगरानी और आपदा की स्थिति में कार्रवाई संभव हो सकेगी। इन तकनीकों की एक झलक दशहरा मैदान में आयोजित विशेष डेमो के दौरान देखने को मिली। जहां सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में कई आधुनिक प्रयोग किए गए। सिंहस्थ 2028 मे करोड़ो की संख्या मे श्रद्धांलु का आगमन होगा। अनुमान है कि सिंहस्थ में करीब 40 करोड़ श्रद्धालु आने की संभावना है। ऐसे में भगदड़,नदी में लोगों के डूबने की ओर कैंपों में आगजनी की भी घटनाएं हो जाती है।लेकिन भीड़ ओर सकरे रास्तों के कारण तय स्थानों पर राहत टीम समय पर नहीं पहुंच पाती। यही वजह है कि प्रशासन इस बार अत्याधुनिक तकनीक का इंतजाम करने में जुटा हुआ है।
सिंहस्थ 2028 को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में दशहरा मैदान पर अत्याधुनिक अग्नि सुरक्षा तकनीकों का प्रदर्शन किया गया,जहां विशेषज्ञों ने फायर कर्मियों को आपदा प्रबंधन के नए तरीके समझाए अधिकारियों ने बताया कि सिंहस्थ जैसे विशाल आयोजन में कुछ मिनटों की देरी भी बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है। यही वजह है कि इस बार ऑल टेरेन व्हीकल और क्विक रिस्पॉन्स व्हीकल को आधुनिक कम्प्रेस्ड एयर फोम सिस्टम से लैस किया जाएगा। खास आकर्षण अग्निशमन रोबोट रहा, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उन्होंने ने बताया कि, सिंहस्थ मेले की सुरक्षा को हाईटेक बनाने के लिए अत्याधुनिक रोबोट और ड्रोन तकनीक का सहारा लिया जाएगा। इन रोबोटों को उन संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया जाएगा, जहां इंसानों का पहुंचना खतरे से खाली नहीं होगा। आग, धुएं या विस्फोट जैसी आपात स्थितियों में ये मशीनें राहत और बचाव कार्य में मदद करेंगी। वहीं ड्रोन पूरे मेला क्षेत्र की रियल टाइम निगरानी करेंगे, थर्मल इमेजिंग के जरिए आग की शुरुआती सूचना देंगे और किसी भी घटना का तुरंत आकलन संभव बनाएंगे। उज्जैन नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने कहा कि, यह आधुनिक तकनीक सिर्फ सिंहस्थ महापर्व तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे शहर की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती देगी। इस विशेष प्रशिक्षण से फायर टीम को अत्याधुनिक उपकरणों और तकनीकों की जानकारी के साथ व्यावहारिक अनुभव भी मिलेगा। महापौर मुकेश टटवाल ने कहा कि आस्था के इस महाकुंभ को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और तकनीक से सशक्त बनाने के लिए निगम हर चुनौती से निपटने को पूरी तरह तैयार है।

विकसित मप्र की नई पहचान
सिंहस्थ-2028 की तैयारियां केवल उज्जैन तक सीमित नहीं हैं। यह विकसित मध्य प्रदेश की उस व्यापक सोच का हिस्सा हैं, जिसमें सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक पर्यटन, आधुनिक अधोसंरचना, डिजिटल गवर्नेंस और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2028 का सिंहस्थ विश्व के सबसे सुव्यवस्थित, सुरक्षित, स्वच्छ और तकनीक-सक्षम आध्यात्मिक आयोजनों में अपनी अलग पहचान बनाए। जब करोड़ों श्रद्धालु शिप्रा के तट पर आस्था की डुबकी लगाएंगे, तब वे एक ऐसे उज्जैन को भी देखेंगे जो अपनी प्राचीन आध्यात्मिक विरासत के साथ आधुनिक भारत की प्रगति और नवाचार का भी जीवंत प्रतीक होगा। सिंहस्थ-2028 केवल एक महापर्व नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की विकास यात्रा का ऐसा अध्याय बनने जा रहा है, जिसमें आस्था, संस्कृति, तकनीक और सुशासन का अद्भुत संगम पूरी दुनिया को दिखाई देगा। उज्जैन में सिंहस्थ-2028 को लेकर तैयारियां अब तकनीकी और आधुनिक सुरक्षा प्रबंधन के नए दौर में प्रवेश कर रही हैं।करोड़ों श्रद्धालुओं की संभावित मौजूदगी को देखते हुए जिला प्रशासन, नगर निगम और अग्निशमन विभाग मिलकर ऐसी व्यवस्था तैयार कर रहे हैं, जिससे किसी भी आपदा की स्थिति में तत्काल और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। सिंहस्थ दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल है। प्रशासन का अनुमान है कि 2028 में करीब 40 करोड़ श्रद्धालु उज्जैन पहुंच सकते हैं। इतने बड़े जनसमूह के बीच आगजनी, भगदड़, नदी में डूबने और आकस्मिक हादसों की आशंका को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को तकनीक आधारित बनाया जा रहा है। सिंहस्थ-2028 को लेकर सरकार नया कानून लाने की तैयारी कर रही है। इस नए सिंहस्थ एक्ट में यह साफ किया जाएगा कि मेला क्षेत्र में कोई भी स्थायी निर्माण करना कानूनन अपराध होगा। अगर कोई व्यक्ति या संस्था ऐसा करती है तो उसके खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा। यह मेला क्षेत्र करीब 3500 से 4000 हेक्टेयर में फैला होगा। सरकार का मकसद है कि पूरे क्षेत्र में किसी तरह का अतिक्रमण या पक्का निर्माण न हो, ताकि आयोजन के समय व्यवस्था बनी रहे। नए नियमों के अनुसार, अतिक्रमण रोकने में लापरवाही करने वाले तहसीलदार, राजस्व अधिकारी, पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकेगी। इसके लिए भारतीय न्याय संहिता के तहत प्रावधान जोड़े जा रहे हैं। कलेक्टर इन सभी अधिकारियों की निगरानी करेंगे और समय-समय पर रिपोर्ट लेंगे। नगरीय विकास विभाग ने नए सिंहस्थ एक्ट का मसौदा तैयार कर लिया है। इसे जल्द ही वरिष्ठ सचिवों की समिति से मंजूरी मिलने के बाद कैबिनेट में पेश किया जाएगा। सरकार की कोशिश है कि इस बिल को मानसून सेशन में ही पास कराया जाए। यह नया कानून पुराने मध्यभारत सिंहस्थ मेला अधिनियम 1955 की जगह लागू होगा। पुराने कानून में लगभग 17 नियम थे, जिन्हें बढ़ाकर अब 50 से ज्यादा किया जा रहा है। नए एक्ट का प्रेजेंटेशन भी हाई लेवल पर किया जा चुका है। नए कानून में मेला अधिकारी को भी अधिक अधिकार दिए जाएंगे। वह मेला क्षेत्र में अस्थायी जमीन अधिग्रहण, मेले की व्यवस्था, सुरक्षा और प्रशासनिक कामों की जिम्मेदारी संभालेंगे। यह नियुक्ति राज्य सरकार करेगी। जमीन का अधिग्रहण केवसिंहस्थ आयोजन के लिए दो लेवल की समितियांल मेले की अवधि तक ही रहेगा, उसके बाद जमीन पहले जैसी हो जाएगी। इसके अलावा, पहली केंद्रीय समिति होगी, जिसकी अध्यक्षता से जुड़े मंत्री करेंगे। दूसरी स्थानीय समिति होगी, जिसमें नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस सहित 15 से 20 अधिकारी शामिल होंगे। जरूरत पडऩे पर सरकार अन्य नामों के सदस्यों को भी जोड़ सकेगी।

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