
मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण से जुड़े मामलों की सुनवाई गुरुवार को लगातार सातवें दिन भी हाईकोर्ट की जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ में जारी रही। ओबीसी आरक्षण के विरोध में दायर याचिकाओं पर सुनवाई पूरी होने के बाद दोपहर में एडवोकेट यूनियन फॉर डेमोक्रेसी एंड सोशल जस्टिस की 50% आरक्षण की मांग वाली याचिका पर बहस शुरू हुई। सुनवाई के दौरान पहली बार ईडब्ल्यूएस आरक्षण और आनुपातिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। ओबीसी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह, पुष्पेंद्र शाह और परमानंद साहू ने दलील दी कि प्रदेश में केबल ओबीसी आरक्षण पर ही सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कोर्ट के समक्ष जनसंख्या और आरक्षण का आंकड़ा रखते हुए कहा कि अनुसूचित जाति को 15.6% 21.1% आबादी पर 20% और सामान्य वर्ग आबादी पर 16%, अनुसूचित जनजाति को की 13% आबादी पर 10% ईडब्ल्यूएस आरक्षण मिला है, जबकि 51% आबादी वाले ओबीसी वर्ग को केवल 14% आरक्षण दिया जा रहा है।
