छह महीने में 8.24 लाख बेरोजगार कैसे हुए कम?

  • रोजगार पोर्टल पर पंजीकृत युवाओं की संख्या में अचानक आई गिरावट पर उठे सवाल

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्यप्रदेश सरकार के विधानसभा में दिए गए दो अलग-अलग जवाबों ने प्रदेश में बेरोजगारी के आंकड़ों को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार के मुताबिक, महज छह महीने में रोजगार पोर्टल पर पंजीकृत बेरोजगार युवाओं की संख्या 25.95 लाख से घटकर 17.71 लाख रह गई है। यानी 8.24 लाख पंजीकृत बेरोजगार कम हो गए। इतनी बड़ी गिरावट के पीछे क्या कारण हैं, इसे लेकर सरकार ने स्पष्ट जानकारी नहीं दी है।
यह मामला कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा के प्रश्न के लिखित उत्तर से सामने आया। उन्होंने प्रदेश में बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की योजनाओं, निजी क्षेत्र में रोजगार, रोजगार मेलों और एमपी रोजगार पोर्टल की स्थिति से जुड़ी जानकारी मांगी थी। कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल ने जवाब में बताया कि 30 जून 2026 तक एमपी रोजगार पोर्टल पर 17 लाख 71 हजार 132 पंजीकृत आकांक्षी बेरोजगार हैं। सरकार ने यह भी बताया कि युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए फेयर जॉब योजना संचालित की जा रही है और रोजगार संबंधी बैठकों में लिए गए निर्णयों पर कार्रवाई की जाती है। हालांकि, विधानसभा के ही बजट सत्र (फरवरी 2026) में विधायक प्रताप ग्रेवाल के प्रश्न के जवाब में इसी विभाग ने 31 दिसंबर 2025 तक रोजगार पोर्टल पर 25 लाख 95 हजार 680 पंजीकृत बेरोजगार होने की जानकारी दी थी। दोनों जवाबों की तुलना करने पर सामने आता है कि केवल छह महीने में 8 लाख 24 हजार 548 पंजीकृत बेरोजगार कम हो गए। इस बड़े अंतर ने रोजगार के सरकारी आंकड़ों की विश्वसनीयता और बेरोजगारी के वास्तविक स्वरूप पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रेवाल ने कहा कि सरकार ने यह भी माना है कि विभिन्न विभागों में दी गई सरकारी नौकरियों का समेकित आंकड़ा उसके पास उपलब्ध नहीं है। उनके मुताबिक इससे स्पष्ट होता है कि रोजगार व्यवस्था केवल पंजीयन और ऑफर लेटर जारी करने तक सीमित रह गई है। उन्होंने कहा कि केवल आंकड़ों में कमी दिखाकर बेरोजगारी कम होने का दावा नहीं किया जा सकता। सरकार को यह बताना चाहिए कि छह महीने में कम हुए 8.25 लाख पंजीकृत बेरोजगार आखिर कहां गए और उन्हें वास्तव में रोजगार मिला या नहीं।
सरकार के सामने उठ रहे प्रमुख सवाल
छह महीने में 8.24 लाख पंजीकृत बेरोजगार कम होने का आधार क्या है? क्या इतने युवाओं को वास्तव में रोजगार मिला या पोर्टल से उनका पंजीयन हटाया गया? क्या रोजगार पोर्टल के सत्यापन या डेटा अपडेट की प्रक्रिया के कारण यह कमी दर्ज हुई? सरकार इस अंतर की विस्तृत वजह सार्वजनिक करेगी या नहीं? अब विपक्ष सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग कर रहा है कि पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या में आई इस बड़ी गिरावट का वास्तविक कारण क्या है और इनमें से कितने युवाओं को वास्तव में रोजगार मिला है।

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